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Sunday, 11 September 2011
Thursday, 28 July 2011
राजस्थान में पुरुष भी बच्चे पैदा करते हैं?
गिनीज बुक के विश्व रिकार्ड को तोड़ देने वाले इन आंकड़ों से साफ जाहिर है कि यह हकीकत नहीं बल्कि एक नया घोटाला है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को आईएएनएस को बताया कि कोटड़ा कस्बे के गोगुंडा सामुदायिक केंद्र में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को इस घोटाले का पता लगाया।
इस केंद्र की गर्भावस्था सहायिकाओं ने केंद्र सरकार की जननी सुरक्षा योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे की गर्भवती महिलाओं के लिए निर्धारित सहायता राशि को हड़पने के लिए गलत रिपोर्ट पेश की।
जननी सुरक्षा योजना के तहत पहले दो बच्चों के जन्म के लिए गरीबी रेखा से नीचे की महिला को 1700 रुपये और प्रत्येक प्रसव पर मिडवाइफ को इसके लिए 200 रुपये मिलते हैं। योजना का मकसद प्रसव के दौरान जच्चे और बच्चे की होने वाली मृत्यु को रोकना है। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले कई तरह की सेवाएं और सुविधाएं दी जाती हैं।
अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के रिकार्ड में ऐसे 32 पुरुषों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने संतान को जन्म दिया। इनमें से कुछ के नाम कई बार दर्ज हैं।
रिकार्ड के अनुसार 60 साल की महिला ने साल में दो बार संतान उत्पन्न किया और सीता नाम की महिला ने तो साल में 24 संतान उत्पन्न किए।
अधिकारी ने बताया कि गर्भवास्था वार्ड की प्रमुख ने खुद भी एक साल में 11 बार संतान उत्पन्न किये।
अधिकारी ने बताया कि घोटालों के उजागर होने के बाद वार्ड प्रमुख को पद से हटा दिया गया है और वह इस समय फरार है।
उसने बताया कि विभागीय जांच के बाद शिकायत दर्ज कराई जाएगी। जांच के लिए तीन वरिष्ठ चिकित्सकों का दल गठित कर दिया गया है।
उप्र सरकार बलात्कारियों को बचाने में लगी है: उमा भारती
सुश्री भारती आज यहां महिलाओं के उत्पीड़न की बढ़ी घटनाओं को लेकर एक दिवसीय मौन धरने पर बैठने से पहले पत्रकारों से बात कर रही थी।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं का उत्पीड़न बढ़ा है।
बलात्कार में तेजी आई है और सरकारी अमला बलात्कारियों को बचाने में लगा हुआ है। इसीलिए लखीमपुरखीरी में नाबालिग लड़की के शव का दो बार पोस्टमार्टम कराना पड़ा और बाराबंकी में एक व्यक्ति को पुलिस ने पीट-पीटकर मार डाला तथा उसकी मृत्यु को आत्महत्या साबित करने में पूरी ताकत लगा दी।
उत्तर प्रदेश में दलालों की सरकार है: राहुल गांधी
उन्होंने कहा कि इस तरह की कई घटनाएं हैं जिसमें अपराध के बाद सरकारी अमले की भूमिका पर सवाल खड़े हुए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मायावती समाज के सबसे कमजोर तबके से हैं, इसलिए ऐसी घटनाओं को रोकने की सर्वाधिक जिम्मेदारी बनती है।
सुश्री भारती ने कहा कि मुख्यमंत्री को जवाब देना होगा कि लखीमपुर खीरी की 14 वर्षीय सोनम का दो बार पोस्टमार्टम क्यों कराना पड़ा। सरकारी अमला बलात्कारियों को बचाने में क्यों लगी है।
उन्होंने कहा कि घटनाओं के खुलासे में सरकार की कोई भूमिका नहीं है। भूमिका तो न्यायालय के साथ ही विपक्ष और मीडिया ने निभाई। इन संस्थाओं ने सच को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
उ. प्र. में 'पहलवान' मुलायम भिड़ेंगे तीन महिलाओं से!
सुश्री भारती ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अपनी इस कार्यकाल में सिर्फ धन एकत्र करने में लगी हुई हैं। अच्छे अधिकारियों को किनारे कर दिया गया है। धन एकत्र करने वाले अधिकारियों को अच्छी तैनाती दी जा रही है। इसलिए भ्रष्टाचार और अपराध दोनों तेजी से बढ़े और इसके लिए सुश्री मायावती जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को समाज के कमजोर तबके का माना जाता है। दबे-कुचले वर्ग की महिलाएं और कमजोर होती हैं। खास बात यह है कि इसी वर्ग की मुख्यमंत्री होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में दलित पिछड़े और अल्पसंख्यक महिलाओं का सर्वाधिक उत्पीड़न हुआ।
सुश्री भारती ने कहा कि पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने वाली मुख्यमंत्री के राज में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मौन अत्याचार का सशक्त विरोध माना जाता है, इसलिए वे महिलाओं पर अत्याचार की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मौन धरने पर बैठ रही हैं। इसके बाद भी महिलाओं का उत्पीड़न हुआ तो आन्दोलन और संघर्ष किया जाएगा।
उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि लूट, बलात्कार और महिलाओं के साथ होने वाले दूसरे अत्याचारों को तत्परता से उजागर करे, ताकि उन्हें न्याय मिल सके। भाजपा नेताओं के आपसी कलह सम्बंधी अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि धरने पर बैठने से पहले उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र समेत कई नेताओं से विचार-विमर्श किया है। सभी अपनी-अपनी जगह पार्टी को मजबूत करने में लगे हुए हैं।
ममता कांग्रेस को बंगाल की खाड़ी में डुबा देगीं: उमा भारती
इस मौके पर मौजूद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि विडम्बना है कि महिला मुख्यमंत्री के शासन में सबसे ज्यादा परेशान महिलाएं ही हैं। बलात्कार की घटनाएं बढ़ी हैं। बसपा के विधायक और मंत्री भी ऐसे अपराधों में आरोपी हैं। बांदा के बहुचर्चित शीलू मामले में विधायक को बचाने की पुरजोर कोशिश की गयी। पहले तो पीड़िता को ही जेल भेज दिया गया था।
उत्तर प्रदेश में दलालों की सरकार है: राहुल गांधी
पूर्वी उत्तर प्रदेश के दो दिन के दौरे पर आये राहुल ने युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के हाल में आये आदेश से साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश दलालों की तरह काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन आपात उपबंध के नाम पर हथियाई जा रही है और उसे भवन निर्माताओं को बेचा जा रहा है। विकास के अलावा खेती की जमीन इस तरह के काम के लिए नहीं ली जानी चाहिए, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ऐसा ही कर रही है। उन्होंने कहा कि दलाल जिस तरह बीच में कमाई करता है यह सरकार भी ठीक वैसा ही कर रही है।
दलाल चला रहे हैं उत्तर प्रदेश सरकार: राहुल गांधी
राहुल ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सरकार घोटालों और विवादों से घिरी हुई है। परिवार कल्याण विभाग में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ और इसी को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की हत्या तक की गयी। अब उच्च न्यायालय के डर से इसकी केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच के आदेश दिये गये हैं।
उन्होंने गोरखपुर के सैयद मोदी रेलवे स्टेशन के बैडमिंटन हाल में युवा कांग्रेस के करीब तीन हजार कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और उनसे जमीनी स्तर पर काम करने को कहा ताकि पार्टी की जनता के बीच अच्छी छवि बने। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर काम करके आगे आते हैं तो उन्हें राहुल गांधी भी नहीं रोक सकता।
राहुल ने युवा कार्यकर्ताओं से लोगों की समस्याएं दूर करने के लिए काम करने की अपील की और कहा कि आम जनता का विश्वास ऐसे ही हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने अपने 40 मिनट के संबोधन में कार्यकर्ताओं से चुनाव के लिए जुट जाने का आह्वान किया और कहा कि जनता कांग्रेस को विकल्प के रूप में देख रही है। अब कार्यकर्ताओं को अपने काम पर खरा उतरना है।
मायावती सरकार की नीयत खोटी, भूमि लेकर देती है गोली: राहुल
राहुल ने युवा कांग्रेस के सदस्यता अभियान की भी जानकारी ली। कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के बाद वह संतकबीरनगर आये और कबीर के मजार पर गये। कबीर की निर्वाणस्थली पर उनकी हिन्दू और मुसलमान दोनों की अलग-अलग मजारे हैं। कार्यक्रम के अनुसार उन्हें मऊ जाना था लेकिन संतकबीरनगर जाने के बाद वे सहजनवां के कटका गांव चले आये।
ग्रामीणों ने राहुल से कानून-व्यवस्था में गिरावट, रोज हो रहे अपराध और नदी में प्रदूषण की शिकायत की। उन्होंने गांव में किसानों से भी बातचीत की।
गोरखपुर हवाईअड्डे पर अपराह्न 11 बजे पहुंचने पर राहुल का जोरदार स्वागत किया गया। पूरे शहर में उनके आगमन को लेकर होर्डिंग और बैनर लगाये गये थे। राहुल मऊ जायेंगे और बुनकरों के सम्मेलन में शामिल होंगे। अपने दो दिन के दौरे में उन्हें बलिया और वाराणसी भी जाना है। कुछ महीने पहले गोरखपुर से स्लीपर क्लास से उनका रेल का सफर पूरे देश में चर्चा का विषय रहा था।
स्पीक एशिया का झूठ पर झूठ और रही जनता को लूट
युवाओ को बरगलाने वाली स्पीक एशिया ऑनलाईन पर सरकारी शिकंजा कसता जा रहा है। नई खबरो के मुताबिक सिंगापुर के यूनाइटेड ओवरसीज बैंक ने स्पीक एशिया के खातों को बंद कर दिया है। जबकि स्पीक एशिया ग्राहको को बरगलाने मे कोई कसर नही छोड़ रही है, इस घटना क्रम के बाद स्पीक एशिया ने एक बयान में कहा, 'सिंगापुर में हमारे खातों को फ्रीज नहीं किया गया है, बल्कि हम सिर्फ कंपनी के खातों को दूसरे बैंक में ले जा रहे हैं।' कम्पनी दूसरे बैंक मे खाता खोलने की बात कर रही है जबकि सिंगापुर में नया बैंक अकाउंट खोलने में छह माह से भी ज्यादा का समय लगेगा। ऐसे में किसी भी निवेशक को पैसे वापस नहीं किए जा सकते हैं।
जबकि भारत मे भी कड़ा कदम उठाते हुये रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के एजीएम आर माहेश्वरी ने साफ कर दिया है कि भारत में स्पीक एशिया को कारोबार करने या गैर बैंकिंग वित्तीय संस्था के रूप में काम करने की अनुमति नहीं दी गई है। शुक्रवार सुबह कंपनी के खाते फ्रीज किए जाने की खबर मिलते ही राजधानी के निवेशकों में खलबली मच गई।
ग्राहको को बरगलाने के मामले मे स्पीक एशिया जरा भी पीछे नही दिख रही है है, वह सार्वजनिक स्थानो पर झूठ पर झूठ बोले जा रही है। कम्पनी ने कहा था कि आईसीआईसीआई, बाटा, एयरटेल, नेस्ले उसके ग्राहक, यह तथ्य झूठ पाए गए, भारत में तीन ऑफिस खुलने की बात कही जबकि अभी तक एक भी ऑफिस नहीं है। कई रिटेल कंपनियों के पार्टनर बनने की बात कही थी किन्तु हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। सिंगापुर में कारोबार करने की बात की थी किन्तु तथ्यों से मेल नहीं खाई।
स्पीक एशिया का भारत में करीब 19 लाख लोगों को डायरेक्ट एजेंट बना चुकी स्पीक-एशिया के खातों में 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की रकम जमा है और यह पूरा पैसा भारत से बाहर जा चुका है या जाने की प्रक्रिया में है। भारत के युवा वर्ग को इस प्रकार चालो मे फंसने से बचना चाहिये। और उद्यमिता की ओर रूख करना चाहिये।
Saturday, 16 July 2011
लड़कियों पर जुल्म: बेटी को डुबो कर मार डाला, टीचर बनाते थे गंदे वीडियो
हैदराबाद. आंध्र प्रदेश में एक पति-पत्नी ने अपनी तीन महीने की बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी। इन्होंने दलील दी कि बेटी के रोने से रोज रात को उनकी नींद खराब होती थी। उधर, मदुरै में एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर और दो अन्य शिक्षक लड़कियों का यौन शोषण करने और उनके गंदे वीडियो बनाने के आरोप में पकड़े गए हैं। इनकी पोल तब खुली जब दसवीं की एक लड़की ने स्कूल जाने से मना कर दिया और एक दूसरी लड़की ने भी शिक्षकों की करतूत के बारे में अपने माता-पिता को बताया। ये शिक्षक तब लड़कियों का वीडियो बनाते थे, जब वे योग किया करती थीं।
आंध्र की घटना के बारे में पुलिस ने बताया कि करीमनगर जिले के भारत नगर में रहने वाले के रवींद्र और स्वाति पढ़े-लिखे हैं। दोनों की उम्र 30 से कुछ ज्यादा है। बुधवार को उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि एक साधु ने कोई पाउडर छिड़ककर स्वाति को बेहोश कर दिया और उनकी बेटी चेरी को लेकर चला गया। साधु पर स्वाति का मंगलसूत्र ले जाने का भी आरोप लगाया गया।
पुलिस ने इलाके के कई साधुओं को पकड़ कर पूछताछ की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। तब पुलिस को माता-पिता पर शक हुआ। गुरुवार को पुलिस उनके घर पहुंची। तलाशी लेने पर मंगलसूत्र बिस्तर के नीचे पड़ा मिला। इसके पुलिस का शक और गहरा हो गया। सख्ती से पूछताछ करने पर दंपती ने गुनाह कुबूल कर लिया।
चेरी के माता-पिता का कहना है कि वह रात भर रोती थी, जिससे वे दोनों परेशान रहते थे। चेरी की मां स्वाति ने यह भी बताया कि वह चेरी को सोने के लिए सिरप पीलाती थी, लेकिन बावजूद इसके वह रात भर रोती थी। स्वाति ने पुलिस को यह भी बताया कि चेरी के जन्मकुंडली में यह बताया गया था कि उसका भविष्य मुश्किलों भरा होगा।
इसके बाद ही स्वाति और रवींद्र ने चेरी को मारने का फैसला किया। पुलिस ने चेरी की लाश को शुक्रवार को एक कू़ड़ेदान से बरामद किया। डीएसपी डी वी श्रीनिवास राव ने कहा, स्वाति और रवींद्र ने सोती हुई बच्ची को हौद में डाल दिया। दोनों का कहना है कि डॉक्टरों के मुताबिक बीमारी की वजह से वह रात भर रोती थी।
राव का कहना है कि उन्हें अब भी चेरी की मौत की वजह पर रिपोर्ट का इंतजार है। रवींद्र एक कॉरपोरेट घराने के लिए काम करते हैं जबकि स्वाति स्नातक हैं। चेरी उनकी दूसरी संतान थी। दोनों की एक तीन साल की बेटी भी है। गौरतलब है कि स्वाति के छोटे भाई ने चेरी को गोद लेने की पेशकश की थी। लेकिन स्वाति ने मना कर दिया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है।
अन्ना की ललकार: आंदोलन के लिए तैयार हो जाएं युवा
हजारे ने यह बात 'क्या सरकार जन आंदोलनों से डरती है?' विषय पर व्याख्यान देते हुए कहीं।वहीं, सिविल सोसाइटी की अहम सदस्य और अन्ना की सहयोगी किरण बेदी ने कहा है कि अन्ना हजारे की टीम को यह पता नहीं है कि संसद में किस तरह का ड्राफ्ट पेश किया जाएगा। उनके मुताबिक टीम अन्ना को यह पता नहीं है कि किस तरह का लोकपाल बिल देश की संसद में मंजूरी के लिए पेश होगा।
हजारे ने कहा कि जन आंदोलन को दबाने के लिए सरकार ने उनके खिलाफ ड्राफ्टिंग कमिटी बनते ही अप्रैल में मुहिम छेड़ दी। गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, 'सरकार ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप साबित करने के लिए लोगों को लगाया। लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए। मैं अब भी पाकसाफ हूं।' उन्होंने यूपीए सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा, 'इस सरकार की नीयत ठीक नहीं है। सरकार ने शांति भूषण और प्रशांत भूषण के खिलाफ झूठे आरोप लगाए। सरकार ने अरविंद केजरीवाल पर भी हमले किए।' हजारे ने जानकारी दी कि उनका आंदोलन 9 अगस्त से शुरू होगा और वह अप्रैल में हुए आंदोलन की तर्ज पर होगा।
दूसरी तरफ, इसी कार्यक्रम में मौजूद पूर्व आईपीएस अफसर किरण बेदी ने कहा, संसद में किस तरह का लोकपाल बिल मंजूरी के लिए पेश होगा, यह राजनीतिक दलों को भी नहीं पता है। हमें यह नहीं पता है कि कैबिनेट ने कौन सा ड्राफ्ट मंजूर किया है। इस बारे में सिविल सोसाइटी और कैबिनेट के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। बेदी ने यह भी कहा कि उनसे हमेशा यह सवाल पूछा जाता है कि लोकपाल बिल का सरकारी ड्राफ्ट कांग्रेस ने बतौर पार्टी बनाया है या फिर सरकार के पांच मंत्रियों ने।
देश पर एक हजार हमलों की साजिश है ‘कराची प्रोजेक्ट’?
खुफिया सूत्रों ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान में कराची प्रोजेक्ट नाम से एक खास आतंकवादी मिशन तैयार किया गया है। 26/11 को मुंबई में हुए बड़े हमले के बाद आतंकवादी गुट बदले हालात में काम कर रहे हैं। कराची प्रोजेक्ट का नाम सबसे पहले पिछले साल अमेरिका में गिरफ्तार किए गए आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने एफबीआई से पूछताछ में लिया था। उसने साफ बताया था कि पाकिस्तान की ओर से सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि वहां हिंदुस्तान पर एक हजार हमले करने का एक मिशन तैयार किया जा रहा है। कराची प्रोजेक्ट खासतौर पर भारत की फौजी ताकत और आर्थिक तरक्की को घाव देगा।
क्यों है शक के घेरे में इंडियन मुजाहिदीन?
कराची प्रोजेक्ट के तहत अब भारत पर 26/11 जैसे बड़े हमले नहीं किए जाएंगे, बल्कि पूरे देश में छोटे-छोटे हमले कर नाक में दम कर दिया जाएगा। 26/11 के बाद पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी संगठन खासे अंतर्राष्ट्रीय दबाव में हैं और इसीलिए वे अब कम लोगों को लेकर छोटे हमलों की साजिश तैयार कर रहे हैं।
कराची प्रोजेक्ट के तहत बेरोजगार नौजवानों और दाऊद कंपनी के गुर्गों को साथ लेकर छोटे हमले किए जाते रहेंगे। आरडीएक्स या बेहद घातक विस्फोटकों की जगह बम में दूसरे विस्फोटकों का इस्तेमाल होगा-जैसे अमोनियम नाइट्रेट।
मुंबई जैसे एक हजार धमाके भारत के अलग-अलग शहरों में हों, तो जितनी दहशत फैलेगी, उतनी ही बार सरकार और खुफिया एजेंसियां कठघरे में खड़ी की जाएंगी। धमाकों में सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम भी नहीं उछलेगा।
अब 26/11 जैसा बड़ा हमला नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा हमला हुआ तो भारत और पाकिस्तान के बीच जंग की नौबत आ सकती है, इसलिए देश की तरक्की, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर सीधा वार करने के लिए छोटे-छोटे हमले ज्यादा कारगर हैं।
खुफिया अफसरों का कहना है कि अब आतंकवादियों का मकसद ज्यादा लोगों को मारना नहीं है, बल्कि अलग-अलग इलाकों में दहशत फैलाना है।
मुंबई विस्फोट में 'इंडियन मुजाहिदीन' पर उंगली उठी
यानी सरहद पार भारत की तबाही की नई कहानी लिखी जा रही है। इस कहानी में एक के बाद एक करीब एक हजार छोटे हमलों की साजिश है। पाकिस्तान में अब तक चल रहा आपराधिक गठजोड़ अब अपराध और आतंकवाद की घुट्टी पी चुका है।
कराची प्रोजेक्ट दरअसल अपराधी, माफिया और आतंकवादियों का नापाक गठजोड़ है। इसकी नींव आईएसआई, लश्कर-ए-तैयबा और हूजी ने मिलकर 2003 में डाली थी। इससे नाम जुड़ा मीर और जकी-उर्रहमान का। और फिर आतंक के सौदागर, हिंदुस्तान के गद्दार दाऊद के साथ मिलकर यह कराची प्रोजेक्ट फल-फूल रहा है।
Friday, 15 July 2011
आतंकवाद पर राहुल के बयान से बवाल मचा
नई दिल्ली। विपक्षी दलों ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के इस बयान की निंदा की कि प्रत्येक आतंकवादी हमले को रोका नहीं जा सकता। विपक्षी दलों ने कहा कि इससे भारतीयों का मनोबल गिरेगा और इस बयान से कांग्रेस महासचिव के गैर-जिम्मेदाराना रवैए का भी पता चलता है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कहा कि इससे आतंकवादियों का 'हौसला' बढ़ेगा।
पार्टी नेता राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा, "भाजपा स्पष्ट रूप से कहना चाहती है कि ऐसा बयान आतंकवादियों का हौसला बढ़ाएगा। मैं समझता हूं कि इससे देश के लोगों का मनोबल गिरेगा और हम कोई उम्मीद नहीं कर सकते।" उन्होंने कहा कि पार्टी उम्मीद करती है कि सरकार अपनी चूक को स्वीकार करेगी।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी. राजा ने आईएएनएस से कहा, "इस बयान से अत्यंत लापरवाही और लापरवाही भरे रवैए का पता चलता है।"
100 फीसदी आतंकवादी हमले रोकना मुमकिन नहीं: राहुल
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने गुरुवार को ओडिशा के भुवनेश्वर में कहा कि बेहतर खुफिया तंत्र सहित विविध उपायों की बदौलत देश में 99 फीसदी आतंकवादी हमले रोके जा चुके हैं।
मुम्बई में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के एक दिन बाद राहुल ने यह बात यहां संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कही।
इन विस्फोटों में कम से कम 17 लोग मारे गए और 131 से ज्यादा घायल हो गए। राहुल ने देश में आतंकवादी हमलों पर काबू पाने के लिए प्रयास करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, "99 फीसदी हमले रोके जा चुके हैं। हमें 100 फीसदी हमले अवश्य रोकने चाहिए।"
बुधवार के हमले का हवाला देते हुए राहुल ने कहा कि सरकार ने तत्काल कदम उठाया। उन्होंने कहा कि हमले के बाद व्यवस्थित ढंग से कदम उठाए गए। लेकिन उन्होंने यह भी कहा, "किसी अकेले आतंकवादी हमले को रोकना बहुत कठिन है।"
इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजा ने कहा, "चिदम्बरम कहते हैं कि यह समन्वयपूर्ण हमला था तो हम इसे रोकने में क्यों नहीं सक्षम हुए? चिदम्बरम गृह मंत्री के रूप में विफल रहे हैं और राहुल गांधी उनके बचाव का प्रयास कर रहे हैं।"
मुंबई बम विस्फोट नीति की विफलता है: आडवाणी
वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि हालांकि वह राहुल के बयान पर टिप्पणी करना नहीं करेंगे लेकिन इतना जरूर कहेंगे कि मुम्बई में आतंकवादी हमले को दोहराया जाना सरकार की चूक को प्रदर्शित करता है।
आडवाणी ने कहा, "मैं राहुल के बयान पर टिप्पणी नहीं करूंगा। अमेरिका हमारे देश की तरह ही एक लोकतांत्रिक देश है, लेकिन मैंने यह नहीं सुना है कि वहां 9/11 के बाद कोई हमला हुआ।"
उधर, उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने मुम्बई में कल हुए सिलसिलेवार विस्फोट की निंदा करते हुए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के उस बयान की कड़ी आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा है सभी आतंकवादी घटनाओं को रोकना संभव नहीं है।
सुश्री मायावती ने यहां जारी बयान में विस्फोट में मारे गये और घायलों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि केन्द्र सरकार को आतंकवाद को रोकने के लिये कडे कदम उठाने चाहिए।इस मामले में सभी पार्टियों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आतंकवाद की समस्या के हल के लिये काम करना चाहिए।
उन्होंने गांधी का नाम लिये बिना कहा कि कांग्रेस के एक पदाधिकारी का बयान जिसमें उन्होंने कहा है कि ऐसे हमले होते रहते हैं और इसे रोकना संभव नहीं है, कांग्रेस पदाधिकारी ने इस घटना की तुलना इराक और अफगानिस्तान से की है। सुश्री मायावती ने कहा कि ऐसे बयान गैर जिम्मेदाराना हैं और इससे जनता का मनोबल गिरता है। लोगों को ढांढ़स बंधाने और उनका भरोसा कायम करने के लिये इस तरह की बयानबाजी नहीं की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के पदाधिकारी आतंकवादी घटनाओं को लेकर गंभीर नहीं हैं और ऐसे नाजुक समय पर सतही बयानबाजी कर मृतकों के परिजनों और घायलों के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय उन पर नमक छिड़क रहे हैं।
सुश्री मायावती ने कहा कि आतंकवाद को रोकने के लिये उसके मुख्य कारणों की तह तक जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी घटनाओं पर रोक के लिए सभी दलो की बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा की जानी चाहिए और इसपर सर्वसम्मति से ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।
उत्तर भारतीय, बांग्लादेशी हैं मुंबई विस्फोटों के जिम्मेदार: राज ठाकरे
मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने मुम्बई में हुए तीन विस्फोटों के लिए गुरुवार को अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों सहित उत्तर भारतीयों और प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "मुम्बई, ठाणे और राज्य के अन्य हिस्से उत्तर प्रदेश, बिहार के प्रवासियों तथा अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों से भरे पड़े हैं। सरकार जब तक प्रवासियों की आवाजाही को नहीं रोकेगी, तब तक आतंकवादी गतिविधियां नहीं रुकेंगी।"
ठाकरे ने कहा कि प्रवासी लोग सभी तरह की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहते हैं, बलात्कार से लेकर हत्या तक। पिछले कुछ दिनों में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं।
मुंबई धमाका: प्रधानमंत्री, सोनिया घायलों से मिले, जांच जारी
अपने सिद्धांत पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि इसकी निगरानी नहीं की जा रही है कि प्रतिदिन कितने प्रवासी मुम्बई आते हैं। वे कौन हैं, कहां से आए हैं, मुम्बई में वे कहां रहते हैं, उनका कौन-सा व्यवसाय है और वे कहां जाते हैं।
विभिन्न प्रवेश-स्थलों से महाराष्ट्र में प्रवेश करनेवाले प्रत्येक प्रवासी की जांच की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि आज यह कोई नहीं जानता कि सब्जियां लेकर घूमने वाले लोग अपनी टोकरी में सब्जियां रखे रहते हैं या बम।
उल्लेखनीय है कि बुधवार शाम मुम्बई में तीन जगहों पर हुए विस्फोटों में 17 लोगों की मौत हो गई है और 131 लोग घायल हो गए हैं।
Thursday, 14 July 2011
यह कैसी पीसीएस परीक्षा: हाईकोर्ट
इलाहाबाद [जासं]। 'यह कैसी परीक्षा आयोग करा रहा है, जब मन आया रिजल्ट निकाला, जब मन आया संशोधित किया और जब मन आया अभ्यर्थी को बाहर कर दिया, यह ठीक नहीं है।' यह तल्ख तेवर गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट का था। अदालत पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 2010 के संशोधित परीक्षा परिणाम में अनर्ह कर दिए गए छात्रों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
न्यायमूर्ति विनीत शरण और न्यायमूर्ति रणविजय सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। याचियों के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि आयोग परीक्षार्थियों के आपत्तियों का निस्तारण किए बिना ही परिणाम जारी कर रहा है। प्री-परीक्षा 2010 का संशोधित परीक्षा परिणाम छह जुलाई को जारी किया गया, लेकिन उस समय कट आफ मार्क्स में संशोधन नहीं किया गया। याचिका की सुनवाई के ठीक एक दिन पहले आयोग ने 13 जुलाई को कट आफ मार्क्स भी संशोधित कर दिया। कोर्ट से मांग की गई कि आयोग परीक्षा के 'की-आंसर' को जारी करें। की-आंसर पर आपत्तियों को निस्तारित करें इससे बाद परिणाम घोषित करें।
इस पर कोर्ट ने कहा कि आयोग उस आधार को बताएं जिसके तहत 107 छात्रों को अर्हता सूची से बाहर कर दिया गया साथ ही परीक्षा संबंधित पूरे रिकार्ड को बीस जुलाई को कोर्ट में पेश किया जाए। अधिवक्ता अनिल तिवारी ने बताया कि याचिका की अगली सुनवाई 20 जुलाई से 21 जुलाई तक लगातार होगी।
क्या हैं यह मामला
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 2010 परिणाम को पहली जून को घोषित किया गया था। इसी पर विवाद शुरू हुआ। अधिवक्ता अनिल बिसेन ने बताया कि इसमें विभिन्न ऐच्छिक विषयों में आयोग द्वारा जारी किए गए उत्तर पत्रक से असंतुष्ट होकर कई विषयों के छात्रों ने परिणाम को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
याचिका की सुनवाई 17 जून को न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी व न्यायमूर्ति सभाजीत यादव की खंडपीठ ने करते हुए लोक सेवा आयोग से जवाब तलब करते हुए सुनवाई की तिथि 14 जुलाई नियत की थी। लेकिन इसके पूर्व ही छह जुलाई को आयोग ने संशोधित परिणाम घोषित कर दिया। इससे पूर्व में मुख्य परीक्षा के लिए अर्ह 107 छात्र बाहर हो गए और 122 ऐसे छात्रों को मुख्य परीक्षा के लिए मौका मिला, जिन्हें पूर्व में अनर्ह पाया गया था। इस पर संशोधित परिणाम में अनर्ह किए गये छात्रों ने 12 जुलाई को याचिका दाखिल करके परिणाम को चुनौती दी।
मुंबई धमाकों के लिए पाक जिम्मेदार
मुंबई। मुंबई विस्फोटाें की सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने निंदा की है तथा भाजपा ने इस तरह के हमले को पाकिस्तान द्वारा छेड़ा गया 'छद्म युद्ध' कहा, जबकि वाम दलों ने इस घटना को अंजाम देने वालों का पता लगाने में सरकार पर अक्षम रहने का आरोप लगाया।
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने इस घटना पर सरकार की ओर से आई प्रतिक्रिया को लेकर उसकी पीठ थपथपाई और कहा कि यह प्रतिक्रिया शीघ्रता से दी गई।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संवाददाताओं से कहा कि भारत सरकार को आतंकवाद को रत्ती भर बर्दाश्त नहीं करने की नीति अवश्य ही अपनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार को आतंकवाद के खिलाफ अपनी दुविधा अवश्य छोड़नी चाहिए। यह घोषणा करनी चाहिए कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति रत्ती भर बर्दाश्त नहीं करने की है। उसे यह अवश्य ही स्पष्ट करना चाहिए कि बुधवार को हुए हमले के बाद आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पूर्व उप प्रधानमंत्री ने कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकी ढांचे को नेस्तनाबूद नहीं करता है तब तक वार्ता करने से कोई उद्देश्य हासिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आतंकी हमले खुफिया तंत्र की नाकामी नहीं, बल्कि नीतिगत नाकामी है।
आडवाणी ने कहा कि मुंबई आतंकवादियों का पसंदीदा निशाना बन गया है, चाहे वह देश के अंदर के आतंकी हों या पड़ोसी देश के।
वाम दलों ने सिलसिलेवार विस्फोटों की तीखी निंदा करते हुए हालिया आतंकी हमले को अंजाम देने वालों का पता लगाने में सरकार के अक्षम रहने पर अफसोस जताया।
माकपा के पोलितब्यूरो ने यहां एक बयान में कहा कि यह परेशान करने वाली बात है कि हाल ही में देश के विभिन्न भागों में हुए बम विस्फोटों के पीछे मौजूद ताकतों की पहचान नहीं हो पाई है और उन्हें पकड़ा नहीं जा सका है। मुंबई विस्फोटाें को अंजाम देने वालों का पता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए।
भाकपा ने भी इसी स्वर में कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह के विस्फोट हुए हाें। इस बात के स्पष्ट सबूत हैं कि अपनी खुफिया एजेंसियों के जरिए सरकार 'विस्फोट को अंजाम देने वालों' का पता लगाने में अक्षम है। इसलिए आतंकियों का पता लगाने के लिए केंद्र को उचित कदम उठाना चाहिए।
पार्टी महासचिव एबी वर्धन ने केरल के मलाप्पुरम में कहा कि हमलावरों का उद्देश्य कई लोगाें की हत्या कर आतंक और दहशत फैलाना था।
भाकपा के वरिष्ठ नेता डी राजा ने बीती रात मुंबई में विस्फोट स्थल और अस्पतालों का दौरा किया। उन्होंने गृहमंत्री पी चिदंबरम पर आरोप लगाया कि वह शांति कायम रखने में लगातार नाकाम हो रहे हैं।
भुवनेश्वर में राहुल ने कहा कि प्रत्येक आतंकी हमले को रोक पाना 'बहुत मुश्किल' है लेकिन देश में 99 फीसदी हमले सतर्कता और खुफिया कोशिशों से नाकाम कर दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक आतंकी हमले को रोक पाना बहुत मुश्किल है। इसका उपाय यह है कि हमे स्थानीय स्तर आतंकवाद से लड़ना होगा। हमने बहुत तेजी से बहुत कुछ किया है। लेकिन आतंकवाद एक ऐसी चीज है जिसे हर समय रोक पाना असंभव है।
शिवसेना ने राहुल को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कांग्रेस नेता का यह बयान कि सभी आतंकवादी हमले नहीं रोके जा सकते 'मुंबई का अपमान' है।
शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि राहुल मुंबई को अपमानित करने का एक भी मौका नहीं छोड़ते हैं। जब उन्होंने कहा कि आतंकी हमले होते रहेंगे, यह जाहिर करता है कि भारत में रहने के लायक नहीं हैं।
पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि सरकार को सिर्फ मुंबई वालों के जज्बे को महज सलाम करने की बजाय सरकार को इस बात की परवाह करनी चाहिए कि निर्दोष लोग न मारे जाए।
उधर, कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यदि मुंबई रोता है तो बंगाल भी रोता है। हम मुंबई के लोगों के दुख और पीड़ा को पूरी तरह से साझा करते हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि मुंबई को इस सदमें से उबरने की ताकत मिले।
Tuesday, 12 July 2011
स्वतंत्रता की सालगिरह पर बत्तियां बुझा देना: अन्ना
अन्ना ने दोहराया है कि मानसून सत्र में सख्त लोकपाल विधेयक संसद में पेश नहीं हुआ तो 16 अगस्त से वे हर हाल में अनशन करेंगे। इसी के साथ उन्होंने पुणे की विवादित लवासा परियोजना की जांच कराने के लिए भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।
अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार ने अगर हमें जंतर-मंतर पर आंदोलन करने की इजाजत नहीं दी तो हम राजघाट पर अनशन करने का प्रयास करेंगे और कहीं पर भी आंदोलन करने नहीं दिया तो जेल में अनशन करेंगे। ये लोकतंत्र है इसमें आम जनता को आंदोलन करने का अधिकार है।
रामदेव अन्ना के अनशन में आ सकते हैं, मगर शर्त है कि...
जाहिर है, अन्ना देश का मिजाज भांप रहे हैं। हाल में हुए कई सर्वेक्षण बताते हैं कि अन्ना की साख सरकार से कहीं ज्यादा है। यही वजह है कि अन्ना ने पुणे की लवासा परियोजना के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। ये परियोजना एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के दिमाग की उपज कही जाती है। आरोप है कि इसके लिए पर्यावरण नियमों सहित तमाम कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। अन्ना ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर परियोजना की जांच कराके प्रभावित आदिवासियों को उनकी जमीन वापस करने की मांग की है।
एअरपोर्ट पर हमले की साजिश, एलर्ट
वाराणसी। लाल बहादुर शास्त्री एअरपोर्ट सहित देश के किसी भी हवाई अड्डे पर आतंकी हमला हो सकता है। यह चेतावनी एक अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने दी है। इसके साथ ही सभी हवाई अड्डों पर सिक्योरिटी एलर्ट जारी कर दिया गया है।
हालांकि स्वतंत्रता दिवस से पहले पूर्व के वर्षो में भी हवाई अड्डों पर सिक्योरिटी एलर्ट होता रहा है, लेकिन इस साल इसे तकरीबन एक माह पहले ही जारी कर दिया गया है। इस नाते आशंका जतायी जा रही है कि आतंकी स्वतंत्रता दिवस से पहले ही साजिश को अंजाम दे सकते हैं। खतरे के लिहाज से लाल बहादुर शास्त्री एअरपोर्ट को प्राथमिकता पर रखने के निर्देश ऊपर से जारी किये जाने की खबर है। इसकी वजह भी साफ है। वाराणसी देश का एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां पांच आतंकी वारदातें हो चुकी हैं। शीतलाघाट पर ताजा हमला अभी मात्र सात ही महीने पहले हुआ था। समझा जाता है कि सूचना मिलने के साथ ही एअरपोर्ट प्रशासन हरकत में आ गया है।
एअरपोर्ट पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। इस संबंध में पूछने पर एअरपोर्ट निदेशक एसके मलिक ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने सेंट्रल इंटेलीजेंस को इनपुट दिया है कि आतंकी भारत के किसी भी एअरपोर्ट पर हमला कर सकते हैं। इसे देखते हुए दिल्ली से सिक्योरिटी एलर्ट जारी करने के निर्देश मिले हैं।
ममता कांग्रेस को बंगाल की खाड़ी में डुबा देगीं: उमा भारती
दिग्विजय राहुल गांधी की 'स्टेपनी' हैं: उमा भारती
'समग्र गंगा अभियान' पर यहां पहुंचीं सुश्री भारती ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि ममता बनर्जी के पास एक खास तरह का चातुर्य है, जिससे वे अपने सहयोगियों को बरबाद कर देती हैं। वे सुनिश्चित करती हैं कि जो भी राजनीतिक दल उन्हें समर्थन दे वह नष्ट हो जाये।
सुश्री भारती ने कहा कि उन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा को बरबाद कर दिया। अब उनके नये सहयोगी कांग्रेस की बारी है। मैं कामना करती हूं और प्रार्थना करती हूं कि ऐसा ही घटित हो।
राज्य में 34 वर्ष के वामपंथी शासन को उखाड़कर प्रचंड बहुमत से सुश्री बनर्जी के सत्ता में आने के बारे में उन्होंने कहा कि अगर वे जनता के लिए काम नहीं करेंगी तो उनका भी वही हश्र होगा जो वामपंथियों का हुआ है।
मुख्यमंत्री के रूप में सुश्री बनर्जी के प्रदर्शन पर सुश्री भारती ने टिप्पणी से करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
उमा ने प्रण लिया, जब तक गंगा साफ नहीं होगी अन्न नहीं लेंगी!
अपने गंगा अभियान के बारे में उन्होंने कहा कि गंगा को हिन्दुत्व या सांप्रदायिकता से जोड़ना गलत है। उन्होंने विशेषज्ञों का एक दल बनाने और एक ऐसा कानून बनाने की मांग दोहरायी जो सुनिश्चित करे कि गंगा हर तरह के प्रदूषण से मुक्त हो।
‘दुनिया फिर आ सकती है मंदी की चपेट में’
नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बार फिर मंदी की चपेट में आने का खतरा पैदा हो गया है।
अर्थव्यवस्थाओं की सेहत पर नजर रखने वाली पेरिस स्थित अंतर्राष्ट्रीय संस्था 'आर्थिक सहयोग एंव विकास संगठन' (ओईसीडी) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में आ रही लगातार गिरावट को देखते हुए उसने यह निष्कर्ष निकाला है।
संगठन ने कहा है कि अर्थव्यवस्थाओं की सेहत नापने का उसका पैमाना (कंपोजिट लीडिंग इंडीकेटर) मई में लगातार दूसरे महीने गिरकर 102.8 अंक से 102.5 अंक पर आ गया है।
दुनिया में फिर आ सकती है मंदी: ओबामा
संगठन ने चीन को दुनिया की अर्थव्यवस्था का इंजन बताते हुए कहा है कि यह इंजन अब धीमा पड़ने लगा है। इसके साथ ही यूरोप गहरे ऋण संकट में फंसता जा रहा है। अमेरिका में रोजगार के आंकड़े बता रहे हैं कि वह मंदी से उबरने के लिए अभी भी संघर्ष कर रहा है। उधर जापान की कमर प्राकृतिक आपदा की मार ने तोड़ रखी है।
दुनिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का रुतबा पाने वाले भारत और ब्राजील की हालत भी खस्ता है। लगातार बढ़ती मंहगाई ने यहां विकास की सारी संभावनाओं को कमजोर बना दिया है। ऐसे में लगता है कि 'हम फिर वहीं लौट रहे हैं जहां से वर्ष 2008 में हमने शुरूआत की थी।'
ओईसीडी का कहना है कि सारे हालात इस ओर संकेत कर रहे हैं कि दुनिया की आर्थिक सेहत बिगड़ रही है। हालांकि इसे सुधारने के प्रयासों के तहत 10 हजार अरब डॉलर आर्थिक तंत्र में झोंके जा चुके हैं। इसमें अमेरिका और चीन के केन्द्रीय बैंक भी अहम भूभिका निभा रहे हैं। इसके अलावा सरकारी खर्चों में कटौती की पुरजोर कोशिश भी जारी है।
ओईसीडी के मुताबिक उसने अपने 34 सदस्य देशों की आर्थिक विकास दर 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है लेकिन उसका मानना है कि जैसे हालात है उससे ऐसा लगता है कि अन्य देशों की हालत जो होगी सो होगी पर अमीर देशों की विकास दर भी 2.3 प्रतिशत पर ही सिमट कर रह जाएगी। संगठन के मुताबिक मंहगाई विकास के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा बन रही है। केन्द्रीय बैंक ब्याज दरें बढाकर इसे रोकने के उपाय कर रहे हैं पर इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। चीन और भारत पर इसकी सबसे ज्यादा मार पड़ रही है।
Monday, 11 July 2011
रामलीला मैदान की घटना में चिदंबरम का हाथ
नई दिल्ली। योग गुरू बाबा रामदेव ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि काले धन के मुद्दे पर धरने के दौरान उन पर तथा उनके समर्थकों पर पिछले माह रामलीला मैदान में मध्यरात्रि को जो ज्यादतियां की गई, उसके पीछे केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम थे।
स्वामी रामदेव की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने अनुरोध किया कि गृह मंत्री को मामले पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया जाए और उन्हें स्वयं पेश होने के लिए नोटिस जारी किया जाए। न्यायमूर्ति बी एस चौहान और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की पीठ ने कहा कि चार जून की इस घटना के बारे में दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया मिल जाने के बाद ही वह इस अनुरोध पर विचार करेगी। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 जुलाई की तारीख निर्धारित की। जेठमलानी ने कहा कि योगगुरू ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विरोध करने के लिए जंतर-मंतर नहीं जाने का निर्णय किया था। वह अपने समर्थकों के साथ रामलीला मैदान पर ही प्रदर्शन कर रहे थे और उसी दौरान पुलिस कार्रवाई की गई।
जेठमलानी ने कहा कि चिदंबरम को इस बात का जवाब देने के लिए तलब किया जाना चाहिए कि यह निर्णय कब किया गया और पूरे क्षेत्र को खाली कराने का निर्णय क्यों किया गया।
इससे पूर्व पीठ ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे से कहा कि कुछ ऐसे मुद्दों पर प्रतिक्रिया दिए जाने की जरूरत है जिन पर कानून लागू करने वाली एजेंसी ने मौन साध रखा है।
पीठ ने दिल्ली से पुलिस से सवाल किया कि अधिकारियों द्वारा की गई ज्यादतियों के खिलाफ योगगुरू के समर्थकों की शिकायत पर प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज की गई। न्यायालय ने कहा कि एक हलफनामा दाखिल कर इस मामले में सफाई दी जानी चाहिए।
शीर्ष न्यायालय ने कहा कि पिछले वाले हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि एक जून से तीन जून के बीच क्या हुआ। उसने कहा कि डीवीडी, चित्रों और दस्तावेजों से स्पष्ट तौर पर पता चलता हे कि उस स्थल पर योगाभ्यास करवाया जा रहा था। न्यायालय ने अधिकारियों से इस बात की सफाई देने के लिए कहा कि किस परिस्थिति के तहत उन्हें रामदेव का यह कार्यक्रम रोकना पड़ा था। पीठ ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि पुलिस ने तंबुओं से घेरे गए उस स्थल से लोगों को बाहर निकालने के लिए आंसू गैस के गोलों और पानी की धार का इस्तेमाल किया।
रामदेव बोले, रामलीला मैदान में लाठीचार्ज चिदंबरम का काम
न्यायमूर्ति बी. एस. चौहान और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि रामलीला मैदान पर लगे पंडालों में आंसू गैस के गोले क्यों छोड़े गये।
न्यायालय ने शपथपत्र दाखिल न करने के लिए केन्द्रीय गृह सचिव को भी फटकार लगायी।
बाबा रामदेव ने शपथपत्र में अपने समर्थकों पर बर्बर पुलिस कार्रवाई के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम को जिम्मेदार ठहराया है। बाबा रामदेव ने उच्चतम न्यायालय से आग्रह किया है कि चिदंबरम को बुलाकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाय और उन्हें भी इस मामले में पक्षकार बनाया जाये।
रामदेव समर्थकों पर बलप्रयोग हुआ, लेकिन हम दोषी नहीं: पुलिस
उच्चतम न्यायालय ने मीडिया की खबरों का स्वतः संज्ञान लेते हुए केन्द्रीय गृह सचिव दिल्ली के मुख्य सचिव और दिल्ली के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया था कि वे निजी शपथपत्र दाखिल करें और बतायें कि किन परिस्थितियों में रात डेढ़ बजे बाबा रामदेव के समर्थकों पर पुलिस कार्रवाई की गयी।
बाबा रामदेव को चार जून की रात ही दिल्ली से हरिद्वार ले जाया गया था और 15 दिनों तक राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश नहीं करने दिया गया था। बाबा रामदेव ने उनके भारत स्वाभिमान ट्रस्ट को नोटिस जारी किये जाने के बाद पिछले सप्ताह शपथपत्र दाखिल किया था।
योग गुरु ने ये आरोप भी लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई। बाबा रामदेव ने 4 जून से रामलीला मैदान पर भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन किया था। लेकिन 4 और 5 जून की दरमियानी रात पुलिस ने वहां कार्रवाई की।
पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और रामदेव समर्थकों को वहां से जबरन हटा दिया। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में खुद से कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। दिल्ली पुलिस ने 11 जून को अपने जवाब में कहा कि बाबा रामदेव की जान को खतरा था, इसी वजह से ये कार्रवाई करनी पड़ी।
आखिर क्यों हो रही हैं रेल दुर्घटनाएं?
साल 2009 में ममता बनर्जी के बतौर रेलवे मंत्री शपथ लेने के बाद से दो दर्जन से ज्यादा बड़े रेल हादसे हो चुके हैं। कभी दो ट्रेनों के आपस में टकरा जाने से, कभी अचानक ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतर जाने की वजह से, तो कभी क्रॉसिंग पर वॉचमैन न होने के कारण करीब 400 बेकसूर लोग अपनी जान गवां चुके हैं।
सवाल है कि आखिर कौन है इसका जिम्मेदार? लाखों रेल यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? सीधे तौर पर यह पूरा दारोमदार था तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी के कंधों पर। जब एक के बाद एक रेल हादसे हो रहे थे, बेकसूर लोग एक झटके में अपनी जान से हाथ धोने को मजबूर थे, रेल का सफर लोगों के लिए किसी मौत के सफर से कम नहीं था, ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा करने में जुटी थीं। इसके लिए उन्होंने रेल मंत्रालय के कामकाज, उसकी जिम्मेदारियों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया। बंगाल में चुनाव जीतने के बाद ममता ने रेलमंत्री के पद से इस्तीफा तो दे दिया, लेकिन रेलवे के हालात वैसे ही बदतर बने हुए हैं।
हर पार्टी को लगता है कि रेल मंत्रालय लेकर वह अपने वोट बैंक को ज्यादा खुश रख सकती है। यही कारण है कि ममता बनर्जी हर हाल में यह पद अपनी पार्टी के पास ही रखना चाहती हैं, लेकिन वे अपनी पार्टी में किसी को अपने बराबर की कुर्सी भी नहीं देना चाहतीं। यही वजह है कि ममता ने किसी को अपनी जगह रेलवेमंत्री नहीं बनने दिया और प्रधानमंत्री ने एक बार फिर 'गठबंधन की मजबूरी' में मुकुल रॉय को रेल राज्यमंत्री बनाकर मंत्रालय उसे सीधे तौर पर अपनी छत्रछाया में ले लिया। ऐसे में पिछले दो सालों में हुई दुर्गति के बाद रेलवे जस की तस हालत में राम भरोसे काम कर रहा है। सीधे तौर पर किसी एक मंत्री की जिम्मेदारी न होने से रेलवे का कोई माई-बाप नहीं है।
उधर, फतेहपुर जिले में रविवार दोपहर हुए देश के एक सबसे बड़े रेल हादसे में बचाव कार्य पूरा होने के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। इस हादसे में करीब 250 लोग घायल हुए हैं। दुर्घटना के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
रेलवे प्रशासन, रेल पटरी को दुरुस्त करने में लगा हुआ है, जहां यातायात पूरी तरह से ठप्प है। दुर्घटना रविवार अपराह्न् 12.20 बजे फतेहपुर जिले के मलवा स्टेशन के पास घटी थी। हावड़ा से हरियाणा के कालका जा रही कालका एक्सप्रेस गाड़ी के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए थे।
राहत एवं बचाव अभियान कर्नल ए.डी.एस. ढिल्लन की अंतिम स्वीकृति पर बंद हुआ। कर्नल ढिल्लन इलाहाबाद से आई सेना की एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल का एक विशेष दल सेना की मदद कर रहा था।
दुर्घटना में मारे गए दो स्वीडिश नागरिकों की पहचान विक्टर और विक के रूप में हुई है। दोनों द्वितीय श्रेणी के एक आरक्षित डिब्बे में सफर कर रहे थे, जो बूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उनका स्वीडिश साथी आस्कर हालांकि जीवित बच गया गया है और उसे कानपुर में एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसे कई जगह चोटें आई हैं।
स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि 100 से अधिक घायलों को फतेहपुर और लखनऊ के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
फतेहपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के.एन. जोशी ने कहा कि लगभग 150 लोगों को भर्ती कराया गया। उनमें से कई के अंग कट गए हैं और कई को अन्य तरह की चोटें हैं।
स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले बचाव के लिए दुर्घटना स्थल पर पहुंचे। कई यात्रियों ने शिकायत की कि राहत कार्य बहुत देर से शुरू हुआ और उन्हें मदद के लिए कम से कम दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
एक वरिष्ठ रेल अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि रेलगाड़ी 108 किलोमीटर प्रति घंटा के रफ्तार से चल रही थी। उसी दौरान चालक ने आपातकालीन ब्रेक लगा दी और बोगियां पटरी से उतर गईं।
सेना के कोई 180 जवानों ने रातभर मेहनत कर शवों को बोगियों से बाहर निकाला। सेना के हेलीकॉप्टरों ने गम्भीर रूप से घायलों को लखनऊ और इलाहाबाद के अस्पतालों में पहुंचाया।
इसके पहले उत्तर मध्य रेलवे (इलाहाबाद मुख्यालय) के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी (सीपीआरओ) संदीप माथुर ने सोमवार को आईएएनएस को बताया कि घायलों की सूची बनाने का काम जारी है। जल्द ही भारतीय रेलवे की वेबसाइट पर सभी घायलों के नाम जारी कर दिए जाएंगे।
अधिकारियों के मुताबिक राहत एवं बचाव अभियान में खोजी कुत्तों को भी लगया गया था, ताकि रेलगाड़ी के मलबे में दबे किसी शव का पता लगाया जा सके।
इस रेल हादसे को इस वर्ष का देश का सबसे बड़ा रेल हादसा बताया जा रहा है। भारतीय रेल दुनिया का एक सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है, जो दिन भर में लगभग 1.40 करोड़ यात्रियों को ढोता है।