अन्ना ने दोहराया है कि मानसून सत्र में सख्त लोकपाल विधेयक संसद में पेश नहीं हुआ तो 16 अगस्त से वे हर हाल में अनशन करेंगे। इसी के साथ उन्होंने पुणे की विवादित लवासा परियोजना की जांच कराने के लिए भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।
अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार ने अगर हमें जंतर-मंतर पर आंदोलन करने की इजाजत नहीं दी तो हम राजघाट पर अनशन करने का प्रयास करेंगे और कहीं पर भी आंदोलन करने नहीं दिया तो जेल में अनशन करेंगे। ये लोकतंत्र है इसमें आम जनता को आंदोलन करने का अधिकार है।
रामदेव अन्ना के अनशन में आ सकते हैं, मगर शर्त है कि...
जाहिर है, अन्ना देश का मिजाज भांप रहे हैं। हाल में हुए कई सर्वेक्षण बताते हैं कि अन्ना की साख सरकार से कहीं ज्यादा है। यही वजह है कि अन्ना ने पुणे की लवासा परियोजना के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। ये परियोजना एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के दिमाग की उपज कही जाती है। आरोप है कि इसके लिए पर्यावरण नियमों सहित तमाम कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। अन्ना ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर परियोजना की जांच कराके प्रभावित आदिवासियों को उनकी जमीन वापस करने की मांग की है।
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