नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बार फिर मंदी की चपेट में आने का खतरा पैदा हो गया है।
अर्थव्यवस्थाओं की सेहत पर नजर रखने वाली पेरिस स्थित अंतर्राष्ट्रीय संस्था 'आर्थिक सहयोग एंव विकास संगठन' (ओईसीडी) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में आ रही लगातार गिरावट को देखते हुए उसने यह निष्कर्ष निकाला है।
संगठन ने कहा है कि अर्थव्यवस्थाओं की सेहत नापने का उसका पैमाना (कंपोजिट लीडिंग इंडीकेटर) मई में लगातार दूसरे महीने गिरकर 102.8 अंक से 102.5 अंक पर आ गया है।
दुनिया में फिर आ सकती है मंदी: ओबामा
संगठन ने चीन को दुनिया की अर्थव्यवस्था का इंजन बताते हुए कहा है कि यह इंजन अब धीमा पड़ने लगा है। इसके साथ ही यूरोप गहरे ऋण संकट में फंसता जा रहा है। अमेरिका में रोजगार के आंकड़े बता रहे हैं कि वह मंदी से उबरने के लिए अभी भी संघर्ष कर रहा है। उधर जापान की कमर प्राकृतिक आपदा की मार ने तोड़ रखी है।
दुनिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का रुतबा पाने वाले भारत और ब्राजील की हालत भी खस्ता है। लगातार बढ़ती मंहगाई ने यहां विकास की सारी संभावनाओं को कमजोर बना दिया है। ऐसे में लगता है कि 'हम फिर वहीं लौट रहे हैं जहां से वर्ष 2008 में हमने शुरूआत की थी।'
ओईसीडी का कहना है कि सारे हालात इस ओर संकेत कर रहे हैं कि दुनिया की आर्थिक सेहत बिगड़ रही है। हालांकि इसे सुधारने के प्रयासों के तहत 10 हजार अरब डॉलर आर्थिक तंत्र में झोंके जा चुके हैं। इसमें अमेरिका और चीन के केन्द्रीय बैंक भी अहम भूभिका निभा रहे हैं। इसके अलावा सरकारी खर्चों में कटौती की पुरजोर कोशिश भी जारी है।
ओईसीडी के मुताबिक उसने अपने 34 सदस्य देशों की आर्थिक विकास दर 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है लेकिन उसका मानना है कि जैसे हालात है उससे ऐसा लगता है कि अन्य देशों की हालत जो होगी सो होगी पर अमीर देशों की विकास दर भी 2.3 प्रतिशत पर ही सिमट कर रह जाएगी। संगठन के मुताबिक मंहगाई विकास के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा बन रही है। केन्द्रीय बैंक ब्याज दरें बढाकर इसे रोकने के उपाय कर रहे हैं पर इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। चीन और भारत पर इसकी सबसे ज्यादा मार पड़ रही है।
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