Saturday, 16 July 2011

देश पर एक हजार हमलों की साजिश है ‘कराची प्रोजेक्ट’?

नई दिल्ली। 26/11 के 31 महीने बाद एक बार फिर मुंबई शहर सीरियल धमाकों से दहल उठा। माना जा रहा है कि ये हमले 'कराची प्रोजेक्ट' की एक कड़ी हैं। कराची प्रोजेक्ट वह प्रोजेक्ट है जो आतंकियों ने भारत पर हमले के लिए तैयार किया था। 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली ने इस प्रोजेक्ट के बारे में सबसे पहले खुलासा किया था। उसके मुताबिक भारत पर अब बड़े हमले नहीं, सिर्फ छोटे-छोटे हमले किए जाएंगे।

खुफिया सूत्रों ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान में कराची प्रोजेक्ट नाम से एक खास आतंकवादी मिशन तैयार किया गया है। 26/11 को मुंबई में हुए बड़े हमले के बाद आतंकवादी गुट बदले हालात में काम कर रहे हैं। कराची प्रोजेक्ट का नाम सबसे पहले पिछले साल अमेरिका में गिरफ्तार किए गए आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने एफबीआई से पूछताछ में लिया था। उसने साफ बताया था कि पाकिस्तान की ओर से सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि वहां हिंदुस्तान पर एक हजार हमले करने का एक मिशन तैयार किया जा रहा है। कराची प्रोजेक्ट खासतौर पर भारत की फौजी ताकत और आर्थिक तरक्की को घाव देगा।

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कराची प्रोजेक्ट के तहत अब भारत पर 26/11 जैसे बड़े हमले नहीं किए जाएंगे, बल्कि पूरे देश में छोटे-छोटे हमले कर नाक में दम कर दिया जाएगा। 26/11 के बाद पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी संगठन खासे अंतर्राष्ट्रीय दबाव में हैं और इसीलिए वे अब कम लोगों को लेकर छोटे हमलों की साजिश तैयार कर रहे हैं।

कराची प्रोजेक्ट के तहत बेरोजगार नौजवानों और दाऊद कंपनी के गुर्गों को साथ लेकर छोटे हमले किए जाते रहेंगे। आरडीएक्स या बेहद घातक विस्फोटकों की जगह बम में दूसरे विस्फोटकों का इस्तेमाल होगा-जैसे अमोनियम नाइट्रेट।

मुंबई जैसे एक हजार धमाके भारत के अलग-अलग शहरों में हों, तो जितनी दहशत फैलेगी, उतनी ही बार सरकार और खुफिया एजेंसियां कठघरे में खड़ी की जाएंगी। धमाकों में सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम भी नहीं उछलेगा।

अब 26/11 जैसा बड़ा हमला नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा हमला हुआ तो भारत और पाकिस्तान के बीच जंग की नौबत आ सकती है, इसलिए देश की तरक्की, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर सीधा वार करने के लिए छोटे-छोटे हमले ज्यादा कारगर हैं। 

खुफिया अफसरों का कहना है कि अब आतंकवादियों का मकसद ज्यादा लोगों को मारना नहीं है, बल्कि अलग-अलग इलाकों में दहशत फैलाना है।

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यानी सरहद पार भारत की तबाही की नई कहानी लिखी जा रही है। इस कहानी में एक के बाद एक करीब एक हजार छोटे हमलों की साजिश है। पाकिस्तान में अब तक चल रहा आपराधिक गठजोड़ अब अपराध और आतंकवाद की घुट्टी पी चुका है।

कराची प्रोजेक्ट दरअसल अपराधी, माफिया और आतंकवादियों का नापाक गठजोड़ है। इसकी नींव आईएसआई, लश्कर-ए-तैयबा और हूजी ने मिलकर 2003 में डाली थी। इससे नाम जुड़ा मीर और जकी-उर्रहमान का। और फिर आतंक के सौदागर, हिंदुस्तान के गद्दार दाऊद के साथ मिलकर यह कराची प्रोजेक्ट फल-फूल रहा है।

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