न्यायमूर्ति बी. एस. चौहान और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि रामलीला मैदान पर लगे पंडालों में आंसू गैस के गोले क्यों छोड़े गये।
न्यायालय ने शपथपत्र दाखिल न करने के लिए केन्द्रीय गृह सचिव को भी फटकार लगायी।
बाबा रामदेव ने शपथपत्र में अपने समर्थकों पर बर्बर पुलिस कार्रवाई के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम को जिम्मेदार ठहराया है। बाबा रामदेव ने उच्चतम न्यायालय से आग्रह किया है कि चिदंबरम को बुलाकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाय और उन्हें भी इस मामले में पक्षकार बनाया जाये।
रामदेव समर्थकों पर बलप्रयोग हुआ, लेकिन हम दोषी नहीं: पुलिस
उच्चतम न्यायालय ने मीडिया की खबरों का स्वतः संज्ञान लेते हुए केन्द्रीय गृह सचिव दिल्ली के मुख्य सचिव और दिल्ली के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया था कि वे निजी शपथपत्र दाखिल करें और बतायें कि किन परिस्थितियों में रात डेढ़ बजे बाबा रामदेव के समर्थकों पर पुलिस कार्रवाई की गयी।
बाबा रामदेव को चार जून की रात ही दिल्ली से हरिद्वार ले जाया गया था और 15 दिनों तक राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश नहीं करने दिया गया था। बाबा रामदेव ने उनके भारत स्वाभिमान ट्रस्ट को नोटिस जारी किये जाने के बाद पिछले सप्ताह शपथपत्र दाखिल किया था।
योग गुरु ने ये आरोप भी लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई। बाबा रामदेव ने 4 जून से रामलीला मैदान पर भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन किया था। लेकिन 4 और 5 जून की दरमियानी रात पुलिस ने वहां कार्रवाई की।
पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और रामदेव समर्थकों को वहां से जबरन हटा दिया। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में खुद से कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। दिल्ली पुलिस ने 11 जून को अपने जवाब में कहा कि बाबा रामदेव की जान को खतरा था, इसी वजह से ये कार्रवाई करनी पड़ी।
Josh18 News
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