Monday, 4 July 2011

सरकार के दावे में झोल ही झोल

लखनऊ। लखीमपुर खीरी जिले के निघासन थाने में दस जून को मारी गयी नाबालिग सोनम की मौत की गुत्थी सुलझाने के जितने सरकारी प्रयास किये जा रहे हैं, मामला उतना ही उलझता जा रहा है। पहले उसकी मौत को आत्महत्या, फिर हत्या बताने वाली सरकार ने अब इस मामले के 'खलनायक' का नया चेहरा प्रस्तुत कर दिया है। सरकार का कहना है कि हत्या स्थानीय सीओ के गनर ने गला दबा कर की है, उसने पहले बलात्कार का प्रयास किया और जब सफल नहीं हुआ तो गला दबाकर मार डाला। इसके बाद वह सीओ के साथ नमाज पढ़ने चला गया और लौटा तो आत्महत्या साबित करने को लड़की को पेड़ की डाली से लटका दिया। सरकार की इस नई कहानी में भी झोल ही झोल है। खुद सोनम के मां-बाप भी सरकारी सच स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

सवाल जो अनुत्तरित हैं :

-सरकार के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि सीओ के गनर के खिलाफ जांच एजेंसी को कौन से ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जो उसके द्वारा हत्या की बात साबित कर रहे हैं? सबूत के नाम पर सरकार का बस यह दावा है कि अतीक ने अपराध कबूल कर लिया है।

-सरकार ने दुराचार के प्रयास स्थल के रूप में कांस्टेबल राजवंशी के घर को चिन्हित किया है, जबकि अब तक सीबीसीआइडी ने सिपाही विनय सिंह के घर को चिन्हित किया था। इसका आधार सोनम के पांच वर्षीय भाई अरमान की निशानदेही थी। तब उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में विनय के घर का ताला तोड़कर कई खास चीजें बरामद की गयीं। सवाल यह है कि क्या अचानक अरमान की गवाही को जांच एजेंसी ने खारिज कर दिया है।

-सवाल यह भी है कि अगर अतीक अहमद ने अकेले सोनम का शव पेड़ से लटकाया और घटना भी खुद की तो सिपाही शिवकुमार सिंह को साक्ष्य मिटाने का दोषी क्यों माना गया और उसके खिलाफ मुकदमा क्यों हुआ? -बात यह भी उठ रही है कि सोनम के पैर के अंगूठे से लेकर पूरे शरीर में चोट के निशान थे। उसकी मां ने उसके रक्तरंजित शरीर के जख्मों को देखा था, तो क्या अतीक उसका मुंह बंद किये अकेले उसके शरीर पर इतने जख्म दे गया। सवाल यह भी कि अरमान ने राजवंशी का कमरा क्यों नहीं दिखाया?

-सवाल तो यह भी है कि अगर क्षेत्राधिकारी इनायतुल्लाह खान के झूठ बोलने की बात प्रमाणित है और उन्होंने लापरवाही बरती तो उन्हें निलंबित क्यों नहीं किया गया, जबकि शिथिल पर्यवेक्षण में थानेदार से लेकर पुलिस अधीक्षक तक निलंबित कर दिये गये।

-अब तक जांच एजेंसी ने मोबाइल काल डिटेल के आधार पर संदिग्ध सिपाहियों की लोकेशन क्यों नहीं पता की?

विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार शुरू से ही सोनम हत्याकाण्ड की लीपापोती कर रही है। शुरू में थाना परिसर में हत्या की बात छिपाने वाली सरकार सच को दबा नहीं पायी तो फिर वह यह साबित करने में जुट गयी कि सोनम के साथ थाने में दुराचार नहीं हुआ। वैसे भी यह बात मुकामी लोग कहने लगे हैं कि कई तथ्यों को लगातार नजरअंदाज किया गया है। मसलन हत्या के बाद पोस्टमार्टम के लिए सोनम का शव ले जाते समय ढकेरवा चौराहे से पहले नहर में धोया गया था।

दूरभाष पर इस संवाददाता से बातचीत में सोनम के पिता ने कहा कि कभी हमारे परिवार ने इस गनर को नहीं देखा है। सोनम की मां तरन्नुम का यह कहना है कि दुराचार के बाद उसकी बेटी की हत्या की गयी है।

No comments:

Post a Comment