03 जुलाई 2011
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली। एक सख्त लोकपाल विधेयक पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का समर्थन पाने के लिए वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और गांधीवादी अन्ना हजारे ने शनिवार शाम को गांधी से मुलाकात की। गांधी से मिलने के बाद अन्ना हजारे ने कहा कि यदि सरकार एक व्यापक विधेयक संसद में पेश नहीं करती है तो वह 16 अगस्त से आमरण अनशन शुरू कर देंगे।
वहीं, सोनिया ने उनसे कहा कि वह उनके सुझावों पर पार्टी के सहयोगियों के साथ चर्चा करेंगी। जबकि कांग्रेस पार्टी का कहना है कि वह लोकपाल विधेयक पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के रुख का समर्थन करेगी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा है कि रविवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) हिस्सा लेगा।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि प्रधानमंत्री के पद को समुचित बचाव के साथ लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए लेकिन न्यायपालिका को इसके दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने को लेकर राजनीतिक पार्टियों में मतभेद बना हुआ है।
अन्ना हजारे ने कहा एक व्यापक विधेयक संसद में पेश न होने पर वे 16 अगस्त से आमरण अनशन पर चले जाएंगे।
सोनिया के 10 जनपथ आवास पर उनसे बातचीत करने के बाद अन्ना हजारे ने कहा, "यदि एक आधा-अधूरा विधेयक संसद में भेजा जाता है तो संसद उस पर क्या चर्चा करेगी?"
इस मौके पर अन्ना हजारे के साथ संयुक्त मसौदा समिति में शामिल सामाजिक संगठन के सदस्य अरविंद केजरीवाल भी मौजूद थे। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि सोनिया ने उन्हें सामाजिक संगठन के सुझावों पर विचार करने का भरोसा दिया।
केजरीवाल ने बैठक के बाद कहा कि सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाना चाहते हैं। सामाजिक संगठन के सदस्यों का सरकारी प्रतिनिधियों के साथ 15 मुद्दों पर मतभेद हैं।
अन्ना हजारे और केजरीवाल जब सोनिया से मिले तो वहां कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी और मोहसिना किदवई भी मौजूद थीं।
कांग्रेस के महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने संवाददाताओं से कहा, "दोनों पक्षों ने एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपने विचारों का आदान-प्रदान किए। कांग्रेस अध्यक्ष ने उनसे कहा कि उन्होंने संयुक्त मसौदा समिति में अपने विचारों को पहले ही रख दिया है लेकिन बातचीत फिर से हो रही है इस पर वह अपने सहयोगियों के साथ चर्चा करेंगी।"
वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री के पद को समुचित बचाव के साथ लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए लेकिन न्यायपालिका को इसके दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।
करात ने यहां संवाददाताओं से कहा, "प्रधानमंत्री को समुचित बचाव के साथ लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए।"
यह सुझाव देते हुए कि न्यायपालिका को भी जांच के अधीन लाने की जरूरत है, करात ने कहा कि वह उच्चतर न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने के पक्ष में नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि माकपा चाहती है कि न्यायपालिका को और विश्वसनीय बनाने के लिए जल्द से जल्द एक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग की स्थापना की जाए।
इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि लोकपाल विधेयक पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री द्वारा तीन जून को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में राजग शामिल होगा।
विधेयक पर चर्चा के लिए हुई राजग नेताओं की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में आडवाणी ने कहा, "प्रधानमंत्री द्वारा तीन जून को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में राजग शामिल होगा और वह विधेयक पर अपनी बात रखेगा।"
उन्होंने कहा कि विधेयक के बारे में राजग को जो कुछ भी कहना है वह बैठक के दौरान कहेगा। आडवाणी ने कहा कि राजग का सहयोगी घटक शिवसेना सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं होगा।
कांग्रेस ने शुक्रवार को जहां लोकपाल के दायरे से प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को बाहर रखने का पक्ष लिया वहीं उसके नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के घटक दलों में इस मुद्दों को लेकर एकरुपता नजर नहीं आ रही है।
कांग्रेस की सहयोगी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने कहा है कि यदि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाया जाता है तो उसे कोई समस्या नहीं है। जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का कहना है कि लोकपाल के दायरे से प्रधानमंत्री, न्यायपालिका और सांसदों को बाहर रखना चाहिए।
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