Thursday, 30 June 2011

अन्ना का नहले पर दहला कहा :भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग से डरे नेता

नागपुर. कई राजनीतिक नेताओं के समाजसेवी अन्ना हजारे पर निशाना साधे जाने के बाद, अन्ना ने आज इसका जवाब देते हुए कहा कि देश की राजनीतिक और अपराधिक ताकतें भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़े गए आंदोलन और जन लोकपाल बिल का ड्राफ्ट तैयार करने से डरी हुई हैं और इसी कारण इसमें बाधा पैदा कर रही हैं। वे आंदोलन को मिले जबर्दस्त समर्थन से भयभीत हैं और इसीलिए मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।    

अन्ना हजारे ने आज कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि सभी नेता भ्रष्ट हैं। अपवाद सभी जगह होते हैं। लेकिन वे नेता भी ईमानदार तभी कहलाएंगे, जब वे भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाएंगे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर खामोश रहना भी भ्रष्टाचार को समर्थन देना ही है और जो भी नेता इस दायरे में हैं, वे देश के किसी काम के नहीं हैं। उन्होंने कहा कि क्या आज किसी ईमानदार व्यक्ति का बिना काले धन के चुनाव जीतना संभव है।  

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के बाद आलोचना झेल रहे अन्ना ने कहा कि उन्होंने केवल प्रदेश के विकास की तारीफ की है। सांप्रदायिक दंगों का उन्होंने हमेशा विरोध किया है, भले ही वे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में भड़के दंगे ही क्यों न हों।  

उन्होंने कहा कि मतदाताओं को बेईमान बनाने में भी इन्हीं नेताओं और राजनीतिक दलों का हाथ है। वे भ्रष्ट तरीकों से करोड़ों रुपए का काला धन कमाते हैं और चुनाव में उसका छोटा सा हिस्सा बांट देते हैं।

प्रधानमंत्री हैं ईमानदार, लेकिन कैबिनेट को भी समझाएं: अन्ना

नई दिल्ली। लोकपाल के दायरे में खुद को लाने के प्रधानमंत्री के बयान का अन्ना हजारे ने स्वागत किया है। अन्ना के मुताबिक अगर प्रधानमंत्री खुद लोकपाल के दायरे में आना चाहते हैं, तो उनकी कैबिनेट को इसमें दिक्कत नहीं होनी चाहिए। बुधवार को दिल्ली पहुंचे अन्ना हजारे ने अपने जन लोकपाल ड्राफ्ट के समर्थन में राजनीतिक नेताओं से मिलने की शुरुआत भी कर दी।

अन्ना ने एक बार फिर दोहराया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अच्छे और ईमानदार प्रधानमंत्री हैं। साथ ही उनकी कैबिनेट पर कटाक्ष करते हुए अन्ना ने कहा कि उसे इस काम में मदद करनी चाहिए।

अन्ना के दिल्ली आने से पहले उनके सहयोगियों अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी ने सीपीआई दफ्तर जाकर पार्टी महासचिव प्रकाश करात से मुलाकात की। दोपहर बाद अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों ने आरएलडी सुप्रीमो अजीत सिंह से मुलाकात की। अपने इस अभियान को जारी रखते हुए अपनी टीम के साथ देर शाम अन्ना हजारे जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव से भी मिले।

सोनिया व्यस्त, अन्ना हजारे से मुलाकात टली 

गुरुवार को अन्ना सीपीआई महासचिव ए.बी. वर्धन से मिलेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मिलने का समय मांगा गया है और गुरुवार को ये मुलाकात होने की संभावना है। शुक्रवार को अन्ना हजारे की बीजेपी के बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी से दोबारा मुलाकात होगी।

मनमोहन के प्रधानमंत्री पद के दिन कम रह गए हैं: गडकरी

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने आज कहा कि भले ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि वे कठपुतली सरकार के मुखिया नहीं हैं, लेकिन उन्हें यह समझ लेना चाहिए कांग्रेस की ओर से पद छोड़ने के लिए उन्हें पर्याप्त संकेत दे दिये गये हैं।

गडकरी ने प्रधानमंत्री द्वारा खुद को कठपुतली सरकार का मुखिया नहीं होने का दावा किए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यहां कहा कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की ओर से डॉ. सिंह को पद छोड़ने का फरमान निकाला जा चुका है और उनके सोचने के लिए यह इशारा काफी है।

मैं कमजोर प्रधानमंत्री नहीं हूं: मनमोहन सिंह 


उल्लेखनीय है कि कांग्रेस में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए उठ रही मांग के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ संपादकों के साथ विचार-विमर्श में आज कहा कि वे किसी भी समय युवा नेतृत्व के लिए स्थान खाली करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि यह मामला तो अभी सरकार और पार्टी के एजेंडे में ही नहीं है और वे किसी कठपुतली सरकार के मुखिया नहीं हैं।

घोटालों के प्रॉड्यूसर, डायरेक्टर हैं मनमोहन, सोनिया: गडकरी 


गडकरी ने आरोप लगाया कि डॉ. सिंह हर मोर्चे पर पूरी तरह से विफल साबित हुए है। दरअसल बहुत दिनों बाद उन्होंने चुनींदा संपादकों को अपनी सफाई देने और अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए बुलाया था।

गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि वह कौन-सी मजबूरी थी, जिसके कारण रामलीला मैदान में बाबा रामदेव के सत्याग्रहियों के खिलाफ आधी रात को पुलिस कार्रवाई की गई। अब समाजसेवी अन्ना हजारे को धमकी दी जा रही है कि उनका हश्र भी बाबा रामदेव जैसा होगा।

उन्होंने कहा कि यह बाबा रामदेव और अन्ना हजारे का मामला नहीं है, यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की बात है। क्या भ्रष्टाचार और विदेशों में जमा काले धन के मुद्दे को उठाना गुनाह है।

मनमोहन सिंह विश्वसनीयता गंवा चुके हैं: गडकरी 

गडकरी ने आरोप लगाया कि अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री महंगाई रोकने की परीक्षा में फेल हो गये हैं। उन्होंने लालकिला से ऐलान किया था कि सौ दिन में महंगाई कम कर देंगे, लेकिन ऐसा करने में वे नाकाम रहे। दरअसल वे बार-बार महंगाई कम करने का वादा करते हैं, लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाते यह देश की जनता के साथ विश्वासघात है।


स्पीक एशिया के फर्जी सर्वे से सावधान रहें!

भारी फर्जीवाड़े से घिरी ऑनलाइन सर्वे कंपनी 'स्पीकएशिया' के प्रमुख सफाई देने के बाबजूद भी ये बताने में नाकाम रहे कि आखिर ये कंपनी है क्या। चूंकि ये कंपनी भारत में पंजीकृत नहीं है इसलिए ऐसी फर्जी कंपनी के झांसे में आने से सावधान रहें।   

यदि आप स्पीकएशिया जैसी सर्वे कंपनी का हिस्सा बनने की सोच रहे हैं तो सावधान हो जाइए क्योंकी कंपनी के कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों का कंपनी के पास कोई जबाव नहीं है। 

हालांकि कंपनी दावा करती है कि वे दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए सर्वे करती हैं। लेकिन जब कंपनी से कुछ कंपनियों के नाम पूछे गए तो कंपनी एक भी ऐसी कंपनी का नाम बताने में नाकाम रही जिनके लिए वो सर्वे करती है। कंपनी गोपनियता का बहाना बनाकर हर सवाल को टाल गई।

स्पीकएशिया मई 2010 से भारत में ऑनलाइन सर्वे का काम कर रही है। कंपनी के देशभर में 19 लाख सदस्य हैं। स्पीकएशिया सदस्य बनाने के लिए 11,000 रुपए लेती है। महीने में कुल 8 सर्वे कराए जाते हैं और हर सर्वे के लिए 500 रुपए मिलते हैं। यानी 3 महीने में 11,000 रुपए वसूल हो जाते हैं। इस तरह ये एक मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी की तरह काम करती है। 

कंपनी पर उठ रहे सवालों का जबाब देने के लिए कंपनी प्रमुखों ने एक प्रेस कॉंफ्रेंस की जिसके दौरान कहा की स्पीकएशिया न निवेश कंपनी है, न रिसर्च कंपनी है और न ही मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनी। तो आखिर ये कंपनी है क्या? ये बताने में कंपनी पूरी तरह से नाकाम रही। कंपनी का कार्यालय सिंगापुर में है और भारत में कहीं भी पंजीकृत नहीं है। 
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फर्जी कंपनी ‘स्पीक एशिया’ के सामने सरकार लाचार

सरकार स्पीक एशिया जैसी फर्जी कंपनियों पर नियंत्रण कर पाने में नाकाम साबित हो रही है। कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय के मुताबिक सिंगापुर में ऑपरेट कर रही कंपनी को भारत में रेगुलेट करना बेहद मुश्किल है और इसमें वह कुछ नहीं कर सकता।

डब्ल्यूटीओ और दूसरे देशों के कानून की वजह से सरकार स्पीक एशिया जैसी कंपनियों पर नकेल कस पाने में नाकाम है। हालांकि सरकार स्पीक एशिया को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है।

स्पीक एशिया के खाते सील, ट्रांजेक्शन पर रोक 

कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय ने कहा है कि वो लोगों को जागरूक करेगी, जिससे निवेशक स्पीक एशिया जैसी कंपनी के झांसे में ना आएं। एमसीए ने इसके लिए सेबी और आरबीआई के साथ मिलकर अगले 3 महीन में 300 जिलों में लोगों को जागरूक करने के कार्यक्रम का आयोजन करेगी।

स्पीक एशिया के फर्जी सर्वे से सावधान रहें! 
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आसाराम बापू बोले, ‘सोनिया को देश छोड़ना चाहिए’, कांग्रेस भड़की

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने बुधवार को पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक बयान देने पर आध्यात्मिक गुरु आसाराम बापू की आलोचना की। आध्यात्मिक गुरु ने इस सप्ताह के शुरुआत में एक धार्मिक कार्यक्रम में गांधी के खिलाफ बयान दिया था।

आसाराम ने सोमवार को अपने कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से सोनिया को देश छोड़कर जाने के लिए कहा था। उनके इस विवादास्पद बयान पर कांग्रेस ने आध्यात्मिक गुरु को गिरफ्तार करने की मांग की।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल ने कहा, "आध्यात्मिक गुरु के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए और उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ उनके बयान के लिए गिरफ्तार किया जाना चाहिए।"

वहीं, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अजित जोगी ने एक बयान जारी कर आसाराम के बयान को 'अत्यंत शर्मनाक एवं अक्षम्य' करार दिया।

बिहार में बैंक से बांटे जा रहे थे जाली नोट

औरंगाबाद [जासं]। मध्य बिहार ग्रामीण बैंक के सहायक प्रबंधक चंदेश्वर राम को पुलिस ने गुरुवार को ग्राहक को एक लाख के जाली नोट भुगतान करने पर गिरफ्तार कर लिया। बरामद जाली नोट पांच-पांच सौ के हैं।

डीएसपी संजय कुमार के अनुसार नगर थाने के गायत्री नगर निवासी धनंजय कुमार सिंह ग्रामीण बैंक के अपने खाते से 1.20 लाख रुपये की निकासी कर उसे पंजाब नेशनल बैंक में जमा कराने पहुंचे तो वहां नोट नकली बताए गए। बैंक के अधिकारी ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने पांच-पांच सौ के दो सौ जाली नोट जब्त करके धनंजय कुमार से पूरा मामला जाना। तब पुलिस ने ग्रामीण बैंक जाकर सहायक प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया। एसपी विवेकराज सिंह ने बताया कि जाली नोटों के कारोबार में कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी जांच चल रही है।

पुलिस ग्रामीण बैंक के कैशियर ललन सिंह और उसके पुत्र रोहित कुमार से भी पूछताछ कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि बैंक के जरिए जाली नोट कितने दिनों से वितरित किये जा रहे थे।

गुजरात दंगे से जुड़े दस्तावेज नष्ट हो गए हैं: मोदी सरकार

अहमदाबाद। आईपीएस अफसर संजीव भट्ट के बयानों को झुठलाने के लिए गुजरात सरकार ने एक बयान देकर अपने आप को विवादों में फंसा लिया है। सरकार ने कहा कि 2002 के दंगों से जुड़े कई अहम प्रशासनिक दस्तावेज उसने नष्ट कर दिए हैं। ऐसे में सरकार पर सवाल उठने लगा है कि जब कोर्ट में केस चल रहा था तो उसने दंगों से जुड़े दस्तावेजों को कैसे नष्ट कर दिया।

गुजरात की मोदी सरकार दंगों में अपनी भूमिका को लेकर पाकसाफ बताती रही है। लेकिन दंगों की जांच कर रहे नानावटी आयोग के सामने सरकार का ताजा बयान उसकी मंशा पर सवाल खड़े करता है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने नानावटी कमीशन को बताया कि वो 2002 दंगों से जुड़े जरूरी दस्तावेज नष्ट कर चुकी है। कमीशन के सामने सरकारी वकील एसबी वकील के मुताबिक इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल डेटा, सरकारी वाहनों का हिसाब रखने वाली लॉग रजिस्टर बुक्स, अफसरों की आवाजाही की सरकारी डायरियां 2007 में ही नष्ट कर दिए गए थे।

मुझे बदनाम करने का प्रयास हो रहा है: नरेंद्र मोदी
 

वकील के मुताबिक आईपीएस अफसर संजीव भट्ट नरेंद्र मोदी की बुलाई मीटिंग में अपनी मौजूदगी के बारे में झूठ बोल रहे हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि इसका सरकारी रिकॉर्ड मौजूद ही नहीं है। एसबी वकील की मानें तो इस बात को समझने की जरूरत वास्तव में संजीव भट्ट को कॉल की गई थी या वो मीटिंग में गए भी थे या नहीं। ये रिकॉर्ड तो 2007 में ही नष्ट हो गए थे।

वहीं, सांप्रदायिक दंगों के केसों से जुड़े लोग सरकार के इस बयान के बाद ताज्जुब में हैं। मुकुल सिन्हा (वकील, जनसंघर्ष मंच) ने बताया कि सभी अहम केसों में कार्यवाही, नरोदा ग्राम केस, जकिया जाफरी की मुख्य शिकायत और दूसरे केस अभी तक चल रहे हैं। ऐसे में साक्ष्यों को नष्ट करना न केवल ताज्जुब पैदा करता है बल्कि ये गैरकानूनी भी है।

लोकपाल: अन्ना को नीतीश से ‘ठोस’ आश्वासन नहीं


नई दिल्ली।
 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भ्रष्टाचार के खिलाफ 'प्रभावी तथा व्यापक' लोकपाल विधेयक के पक्ष में हैं। लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह इसके दायरे में प्रधानमंत्री को लाने के समर्थक हैं या नहीं।

ये बातें उन्होंने गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और उनकी टीम से मुलाकात के बाद कही। अन्ना हजारे और उनकी टीम के सदस्य लोकपाल पर अपने मसौदे के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से मिल रहे हैं। इसी सिलसिले में गुरुवार को उन्होंने यहां बिहार भवन में मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

 

मैं लाठी तो क्या, गोली से भी नहीं डरता: अन्ना 

अन्ना हजारे से मुलाकात के बाद नीतीश ने कहा, "भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल का दायरा व्यापक और प्रभावी होना चाहिए।" लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इसके दायरे में प्रधानमंत्री को शामिल करने के पक्ष में हैं तो उन्होंने कहा, "इस बारे में मुझे अपनी पार्टी के भीतर और सहयोगी दलों से बात करनी होगी। मैं फिलहाल कुछ ज्यादा नहीं कह सकता।"

लोकपाल मसौदा समिति द्वारा मंत्रिमंडल के समक्ष लोकपाल विधेयक के दो प्रारूप भेजने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "सरकार क्या चाहती है, यह ही स्पष्ट नहीं है। पहले सरकार अपनी राय प्रकट करे। फिर हम विभिन्न बिंदुओं पर अपनी राय देंगे।"

 

अन्ना का हाल भी रामदेव जैसा हो सकता है: दिग्विजय 

वहीं, अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश सरकार की ओर से उठाए गए विभिन्न कदमों की सराहना की और कहा कि केंद्र सरकार को इससे सीख लेनी चाहिए।

अन्ना हजारे की टीम के सदस्य अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी ने कहा कि नीतीश ने बिहार में उनके मसौदे की तर्ज पर लोकायुक्त की स्थापना का आश्वासन दिया है, जो प्रशंसनीय है। इस तरह की पहल करने वाला बिहार पहला राज्य है।

क्या राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने लायक हैं?

 
मुंबई।
 राहुल गांधी की चाची मेनका गांधी ने उन्हें लम्बी उम्र का आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे देश के प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं तो बनें, वैसे भी इस देश में प्रधानमंत्री बनने के लिए किसी योग्यता की जरूरत नहीं है। 

मेनका गांधी ने राहुल गांधी की काबिलीयत पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है! उन्हें लगता है कि भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री में भी किसी प्रकार की योग्यता नहीं। 

उन्हीं की पार्टी का दावा है कि अगर हिम्मत है तो कांग्रेस राहुल को प्रधानमंत्री बनाकर दिखाए, जनता को फौरन पता चल जाएगा कि उनके पास देश चलाने की क्षमता है या नहीं।  

हालांकि दूसरी ओर पूरा कांग्रेस परिवार पिछले कई बरसों से राहुल को देश का प्रधानमंत्री बनाने के लिए मुहिम-सी चलाए हुए है। 
आए-दिन उन्हें भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया जाता है। जब कभी मंत्रीमंडल में फेर-बदल की बात आती है, तो सवाल उठता है कि क्या इस बार उन्हें कोई मंत्री पद दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होता और वे कांग्रेस के महासचिव के रूप में ही अपनी भूमिका निभाते आगे बढ़ जाते हैं। 

ऐसा महसूस होता है कि हर कांग्रेसी का सपना है कि राहुल जल्द से जल्द प्रधानमंत्री का पद ग्रहण करें, क्योंकि वह पद उन्हीं के लिए सुरक्षित है, मौजूदा प्रधानमंत्री तो बस उसे संभाले हुए हैं। मनमोहन सिंह जैसे दिग्गज और काबिल प्रधानमंत्री के रहते हुए और बिना किसी आंतरिक मतभेद के अगर किसी दूसरे व्यक्ति का नाम प्रधानमंत्री के पद के लिए उछाला जाता रहे, तो यह सचमुच उस प्रधानमंत्री की गरिमा पर कुठाराघात है। लेकिन कांग्रेस के भीतर ऐसा होता रहता है। प्रणव मुखर्जी से लेकर दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर नेता किसी न किसी रूप में राहुल को भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश करते हुए गौरव महसूस करते हैं। लेकिन वे पूरी विनम्रता से यह जरूर कहते हैं कि राहुल को देश का प्रधानमंत्री बनना है या नहीं इसका फैसला तो वे खुद करेंगे यानी वे जब चाहें प्रधानमंत्री बन सकते हैं हम सब तैयार हैं! 

दिग्विजय सिंह को लगता है कि सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर अच्छी समझ रखनेवाले राहुल परिपक्व हो गए हैं। उनमें नेतृत्व करने की सारी खूबियां हैं।

कई अन्य नेताओं ने दिग्विजय सिंह की बातें दोहराई हैं और उन्हें लगता है कि सोनिया गांधी के बेटे राहुल में प्रधानमंत्री बनने के सारे गुण हैं।

कांग्रेस नेता शकील अहमद ने कहा कि अधिकांश पार्टी कार्यकर्ता महसूस करते हैं कि राहुल में अच्छे नेता बनने की क्षमता है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पार्टी के कोषध्यक्ष मोतीलाल वोरा की नजर में राहुल देश को विकास के रास्ते पर ले जाने की क्षमता रखते हैं। वे दृष्टि सम्पन्न हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह ने 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले राहुल को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने की मांग उठाई थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उनकी मांग ठुकरा दी थी।

उनके द्वारा बोया गया बीज अब वट वृक्ष बन चुका है। हर एक कांग्रेसी नेता गाहे-बगाहे अपनी ख्वाहिश जाहिर करता रहता है कि राहुल को प्रधानमंत्री बना दिया जाए, हालांकि यह कहते हुए वे जरा भी झेंपते नहीं कि उन्हीं की पार्टी का एक विरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री के पद पर बैठा हुआ है। 

कांग्रेस की बातें और नीतियां कांग्रेस जाने, लेकिन देश को तो सोचना होगा कि क्या राहुल सचमुच हमारे प्रधानमंत्री बनने लायक हैं, क्या सचमुच उनमें इतनी क्षमता है कि वे देश, विदेश, रक्षा, वित्त, गृह विभागों से जुड़े मुद्दों को संभाल सकते हैं? क्या वे इतने जिम्मेदार हैं कि हजारों समस्याओं, परिशानियों से दो-चार हो रहे इस देश को बिना घबराए आगे ले चलेंगे? क्या विदेशों में जाकर वहां दिग्गजों से मिलकर अपनी बात कहने की सलाहियत उनमें है? क्या वे देश की गरीबी दूर करने के लिए नई योजनाओं की अगुवाई कर सकते हैं? क्या वे राजनीति के दलदल में फंसे राजनेताओं के बीच अपनी अलग छवि बना सकते हैं? क्या वे कृषि और नई तकनीक के बीच की खाई पाट सकते हैं? एक ओर अंधविश्वासों से घिरे और दूसरी ओर विज्ञान और तकनीक में विश्व भर में अपनी धाक जमाते देश की दो अलग-अलग प्रकृतियों के बीच क्या वे संतुलन बना सकते हैं?

क्या राहुल गांधी में इतनी क्षमता है कि वे कश्मीर का मुद्दा अपने बूते पर हल कर सकते हैं? 

क्या राहुल गांधी पाकिस्तान से भारत के रिश्तों को दिशा दे सकते हैं? क्या वे चीन की कूटनीति का जवाब दे सकते हैं? क्या वे अमेरिका के सामने डटकर खड़े रह सकते हैं? क्या वे रूस को आज भी अपना सबसे अच्छा दोस्त कह सकते हैं? क्या वे पड़ोसी देशों से तालमेल बैठा सकते हैं?
 
राहुल अभी तक कई मुद्दों पर अपनी राय नहीं बना पाए हैं, यह सच है। ऐसा लगता है कि वे वही करते हैं जो उनसे कहा जाता है या फिर एक बार में एक ही काम करते हैं, जैसे कोई किसी प्रोजेक्ट पर काम करता हो। वे कई मुद्दों पर स्वतंत्र सोच बना नहीं पाए हैं, ऐसा लगता है। क्योंकि वे हर मुद्दे पर नहीं बोलते। लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर वे चुप रहे, बाबा रामदेव के मुद्दे पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा, हालांकि इस बीच वे उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसानों की मदद से कुछ खंगालते नजर आए। वे भ्रष्टाचार पर खूब बोलते हैं और कहते हैं कि युवा ही इसे खत्म कर सकते हैं, लेकिन काले धन पर कुछ नहीं कहते। 

राहुल ने एक युवा होने के नाते पिछले सात बरसों में देश भर में भ्रमण कर युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। वे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सभाएं लेने लगे और सन 2009 के चुनावों के दौरान उन्होंने केवल छह सप्ताह में ही 125 रैलियों को सम्बोधित किया और भारी भीड़ भी खींची। 

लेकिन भीड़ को आकर्षित तो हर मशहूर हस्ती करती है। चाहे वे अमिताभ हों, शाहरुख हों या फिर ऐश्वर्य राय। लेकिन राहुल का काम तो उससे आगे जाता है। उन्हें ठोस जमीन पर खड़े होकर हर मुद्दे पर खुलकर बोलना होगा और अपने विचार रखने होंगे। देश को बताना होगा कि वे अगर प्रधानमंत्री बनते हैं तो देश को किस दिशा में ले जाएंगे। एक साफ, स्पष्ट भविष्य दिखाने की क्षमता उनमें होनी चाहिए। 

सन 2014 में जब लोकसभा के चुनाव आएंगे तो पूरे कयास हैं कि राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाकर पेश किया जाए। 

लेकिन क्या यह सही है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में किसी भी मंत्रालय की जिम्मेदारी नहीं संभालनेवाले राहुल को देश का प्रधानमंत्री पद ही सौंप दिया जाए? 

सन 2004 से सांसद बने राहुल ने अब तक किसी मंत्रालय का कार्यभार क्यों नहीं संभाला? इंदिरा गांधी भी तो प्रधानमंत्री बनने से पहले लाल बहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में मंत्री हुआ करती थीं। हां, यह और बात है कि अचानक राजनीति में आनेवाले राजीव गांधी पायलट की नौकरी करते-करते सीधे प्रधानमंत्री बन गए थे।

शायद यहां भी ऐसा हो! ऐसा हो सकता है। हो चुका है। तो अब क्यों न हो! 

लेकिन आज इस लोकतांत्रिक युग में क्या किसी देश को अपने प्रधानमंत्री से हर वह उम्मीद नहीं करनी चाहिए जो देश को तरक्की की राह पर ले जाए? 

क्या हर देशवासी को यह हक नहीं है कि वह सबसे काबिल, योग्य, समझदार, जिम्मेदार और समर्पित नेता को देश का प्रधानमंत्री चुने?
 
क्या सबसे बड़े राजनीतिक परिवार या देश को तीन प्रधानमंत्री देनेवाले परिवार की संतान के रूप में पैदा होना ही प्रधानमंत्री बनने की योग्यता हो सकती है? 

अगर नहीं, तो फिर राहुल गांधी को जल्द से जल्द यह साबित करना होगा कि वे इसलिए प्रधानमंत्री नहीं बने हैं कि सत्ता उन्हें विरासत में मिली है, बल्कि इसलिए बने हैं कि उनमें काबिलियत है, योग्यता है और वे देश की बागडोर संभालने में सक्षम हैं। उन्हें दिखाना होगा कि वे हर तरह के निर्णय लेने में सक्षम हैं। उन्हें अपने अनुभव बढ़ाने होंगे, जिसके लिए उन्हें किसी मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालनी होगी, देश के आम लोगों के साथ केवल यात्राएं कर या उनके घर में कुछ समय बिताकर नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी भर के लिए उन्हें खुशियां देने का इंतजाम उन्हें करना होगा, उन्हें देश की राजनीति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना होगा और लगातार मेहनत करनी होगी, उन्हें साबित करना होगा कि वे सचमुच देश की बागडोर संभालने लायक हैं। 

अगर कांग्रेसी नेता कहते हैं कि प्रधानमंत्री बनना न बनना राहुल के हाथ में है, तो फिर राहुल को ही यह फैसला करना होगा कि वे खुद इस पद के लायक हैं या नहीं। 

लेकिन देश को भी फैसला करना होगा कि क्या वह वाकई राहुल गांधी को देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता है। 

क्या वह राजनीतिक विरासत को किसी प्रधानमंत्री की योग्यता मानता है या उसकी अपनी योग्यता के बल पर उसे चुना जाना चाहिए? 

आप बताइए, क्या राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनने लायक हैं? 


जोश 18

मैं कमजोर प्रधानमंत्री नहीं हूं: मनमोहन सिंह

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ने देश के प्रमुख संपादकों से बातचीत करने हुए कहा बुधवार को उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि वे कमजोर प्रधानमंत्री हैं। यह जानकारी बुधवार को प्रधानमंत्री के साथ बैठक में शामिल होने वाले एक सम्पादक ने दी।

'दिव्य मराठी' के सम्पादक कुमार केतकर के मुताबिक प्रधामंत्री ने ऐसी बातों को 'विपक्ष का चतुर प्रचार' करार दिया।

केतकर के मुताबिक मनमोहन सिंह ने कहा, "मुझे सोनिया गांधी से अधिकतम सहयोग मिला है, जो कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर बेहतरीन कार्य कर रही हैं।"

महत्वपूर्ण मसलों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर बार-बार उठते सवालों के बीच बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पांच सम्पादकों के साथ बातचीत की। इस दौरान उन्होंने लोकपाल विधेयक, बाबा रामदेव के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई तथा राहुल गांधी सहित विभिन्न मुद्दों पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए।

बैठक के बाद प्रधानमंत्री आवास के बाहर 'नई दुनिया' के सम्पादक आलोक मेहता और 'दिव्य मराठी' के सम्पादक कुमार केतकर ने इस बैठक के बारे में मीडिया को जानकारी दी।

'नई दुनिया' के सम्पादक आलोक मेहता ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं लोकपाल के दायरे में आने को तैयार हूं लेकिन आखिरी फैसला मेरे मंत्रिमंडलीय सहयोगी लेंगे।" प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और योग गुरु बाबा रामदेव से सम्पर्क करने की पहल की थी।

अन्ना हजारे के नेतृत्व में सामाजिक संगठन प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को सम्पादकों के समूह के साथ बातचीत में यह भी कहा कि मंत्रिमंडल में जल्द ही फेरबदल किया जाएगा लेकिन उन्होंने इसकी तिथि नहीं बताई। उन्होंने कहा, "मैं आपको तारीख नहीं बता सकता लेकिन फेरबदल जल्दी ही किया जाएगा।"

प्रधानमंत्री सम्पादकों के साथ बातचीत के दौरान यह भी कहा कि उन्हें 'युवा नेतृत्व से परहेज नहीं है' लेकिन कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को यह जिम्मेदारी कब सौंपी जाएगी इसका फैसला सरकार और पार्टी करेगी।

केतकर के मुताबिक प्रधामंत्री ने कहा, "मुझे युवा नेतृत्व से परहेज नहीं है। लेकिन यह मेरा फैसला नहीं है। यह अभी पार्टी के एजेंडे या सरकार के एजेंडे में नहीं आया है।"

केतकर ने कहा, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बुधवार को सम्पादकों के साथ बैठक के दौरान विश्वास से भरपूर और प्रसन्न दिखाई दे रहे थे तथा उन्होंने हरेक प्रश्न का जवाब विस्तार से दिया।

दिल्ली के रामलीला मैदान में बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर की गई पुलिस कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने कहा, "दिल्ली के रामलीला मैदान में चार जून को योग गुरु बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर पुलिस कार्रवाई जरूरी हो गई थी क्योंकि अगले दिन समस्या पैदा हो सकती थी।"

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ 'कोई तनाव' नहीं है। यह बात उन्होंने बुधवार को सम्पादकों के साथ बातचीत के दौरान कही।

'दिव्य मराठी' अखबार के सम्पादक कुमार केतकर के मुताबिक सोनिया के साथ अपने सम्बंधों के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, "हम पूरी तरह बेबाक हैं और कोई तनाव नहीं है।" 

बैठक के बाद प्रधानमंत्री आवास के बाहर केतकर ने संवाददाताओं से कहा, "प्रधानमंत्री ने कहा कि वे यह नहीं जानते कि ऐसी धारणा क्यों बनी है कि सोनिया गांधी के साथ उनके अच्छे सम्बंध नहीं हैं।" 

चौतरफा घोटालों के आरोपों से घिरी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की धूमिल छवि फिर चमकाने के लिए इस बार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मोर्चा संभाला है। प्रधानमंत्री ने संपादकों के साथ बातचीत में जोर देकर कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री को लेकपाल के दायरे में लाने को लेकर व्यक्तिगत तौर पर कोई आपत्ति नहीं है। अपनी सरकार का पक्ष रखने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पांच वरिष्ठ संपादकों के साथ मुलाकात करीब दो घंटे चली।

प्रधानमंत्री ने मीडिया से शिकायत करते हुए कहा कि देश का मीडिया पुलिस, वकील और न्यायाधीश का काम कर रहा है। उनकी इस बात से मीडिया को लेकर नाराजगी सामने आई है।

आलोक मेहता ने बताया कि पूरी बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आड़े हाथों लेते नजर आए। प्रधानमंत्री ने भाजपा को असहयोगात्मक रवैया अपनाने वाला विपक्षी दल बताया।

प्रणव मुखर्जी की जासूसी को लेकर उन्होंने आईबी की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट ने जासूसी की बात को नकार दिया है।


मैं जानवर की मौत नहीं मरना चाहता था: बाबा रामदेव

नई दिल्ली। काले धन के खिलाफ आमरण अनशन करने पर नई दिल्ली से बाहर भेजे गए योग गुरु बाबा रामदेव तीन सप्ताह बाद रविवार को अपनी अनुयायी राजबाला से मिलने यहां पहुंचे। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान पर गत पांच जून को पुलिस उनकी हत्या करनी चाहती थी। लेकिन वे जानवर की मौत नहीं मरना चाहते थे। 

रविवार शाम आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में योग गुरु ने अपने समर्थकों को यह कहते हुए धन्यवाद दिया कि रामलीला मैदान पर पुलिस की कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों के साथ जो अन्याय हुआ उसे पूरे विश्व ने देखा।

राजबाला के स्वास्थ्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यदि वह ठीक हो जाती हैं तो यह एक चमत्कार से कम नहीं होगा। उन्होंने कहा, "यदि पुलिस यह कहती है कि उसने राजबाला को चोट नहीं पहुंचाई तो यह किसने किया। उन्हें जीवन रक्षक उपकरण पर रखा गया है।"

अनशन पर सरकार की ओर से हुई कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदेव ने कहा कि यदि सरकार को संदेह था कि वह कुछ अवैध कर रहे हैं तो सरकार के चार केंद्रीय मंत्री उनसे मिलने हवाईअड्डे क्यों गए और प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने उन्हें पत्र क्यों लिखा।

उन्होंने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी हत्या करने के लिए पुलिस को रामलीला मैदान भेजा गया था।

रामदेव ने कहा, "पुलिस रामलीला मैदान मुझे गिरफ्तार करने नहीं आई थी। वह मेरी हत्या करनी चाहती थी। मैं इसके बारे में कोई साक्ष्य नहीं दूंगा क्योंकि मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित है।"

 

रामलीला मैदान में हुई पुलिस की कर्रावाई के बाद पहली बार दिल्ली पहुंचने पर बाबा रामदेव ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल या संगठन का नहीं बल्कि देश के 120 करोड़ लोगों का मुखौटा हैं।

बाबा रामदेव ने यहां संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा, "मेरी भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम जारी रहेगी। सत्ताधारी दल द्वारा मीडिया के माध्यम से मुझ पर राजनीतिक दलों या संगठनों का मुखौटा होने का आरोप लगाया जा रहा है। मैं देश के 120 करोड़ लोगों का मुखौटा हूं। मेरा कोई दल नहीं है। मैं किसी भी राजनीतिक दल से सम्बंध नहीं रखता। मैं भ्रष्टाचार के विरुद्ध खड़े लोगों के साथ हूं चाहे वह किसी भी दल या सम्प्रदाय के हों।"

राजनीतिक दलों से सम्बंध का आरोप लगाने वालों के सवाल पर उन्होंने कहा, "दुष्प्रचार करने वालों और गैर-जिम्मेदाराना बयान देने वालों की मुझे कोई परवाह नहीं है।"

उन्होंने कालेधन पर सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि उनके पास जितना भी कालाधन मिले उसे राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित कर दिया जाए। रामलीला मैदान पर चार जून की रात हुई पुलिस की कार्रवाई की ओर इशारा करते हुए बाबा ने कहा कि विदेशों में सारा धन सरकार और उसके सहयोगियों का है। अगर ऐसा नहीं है तो सरकार को पुलिस कार्रवाई करने की जगह उस धन को राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित करना चाहिए था। उन्होंने एक थैले की तरफ इशारा करते हुए बताया के इसमें सरकार के 200 लाख करोड़ के कालेधन का हिसाब है। सरकार को इसका हिसाब देना चाहिए। 

 

योग गुरु बाबा रामदेव ने आज कहा कि उनके आंदोलन को बर्बरता से कुचला गया। राजबाला की हालत के बारे में उन्होंने बताया कि उसके हाथो और पैरों में कोई मूवमेंट नहीं है। पीठ, पैर पर डंडों के चोट के निशान हैं। पुलिस ने डंडा नहीं मारा तो राजबाला के पीठ, पैर और कमर पर डंडे का बार किसने किया।

बाबा रामदेव ने कहा कि पहले तो सरकार भ्रष्टाचारी थी लेकिन अब अत्याचारी हो गई है। काले धन और भ्रष्टाचार की बात नहीं होती है। व्यवस्था परिवर्तन की बात की जाती है तो परिवर्तन की मांग करने वालो को दबाने की कोशिश की जाती है।

उन्होंने कहा कि गांव, गरीब और भारत के विकास की बात जो करता है तो जो इसके विरोधी हैं वो रामदेव को जिंदा नहीं देखना चाहते हैं। अगर भ्रष्टाचार और काले धन का मुद्दा उठाना गलत है तो ये गुनाह लाख बार करेंगे। बाबा ने आरोप लगाते हुए कहा कि 4 जून की रात को महिलाओं के साथ बलात्कार की कोशिश की गई। महिला अधिकारों और मानवीय अधिकारों का हनन किया गया।

उन्होंने कहा कि 4 जून को जब मैं गिरफ्तारी देने को पहुंचा तो पुलिस ने मुझे क्यों नहीं गिरफ्तार किया। रामदेव ने कहा कि पुलिस उनको मिटाना चाहती थी। इसलिए मुझे गिरफ्तार नहीं किया गया। बंद पंडालों में आंसू गैस के गोले छोड़े गए। बाबा ने कहा कि मुझे आतंकवादी हमले का ईमेल भेजा गया। एक लाख किलोमीटर की यात्रा में मुझपर कोई आतंकी हमला नहीं हुआ। रामलीला मैदान में कौन सा आतंकवादी हमला होने वाला था।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, 'क्या ये देश एक पार्टी के लोगों के रहने के लिए है। क्या दिल्ली एक पार्टी के लोगों को रहने के लिए है। दूसरे लोग यहां नहीं रह सकते हैं। ये कैसा लोकतंत्र है। मुझे पार्टी का मुखौटा कहा जाता है। मैं किसी पार्टी का मुखौटा नहीं हूं। सरकार को उन पार्टियों से दिक्कत है तो उन्हें बैन क्यों नहीं करती है सरकार।'

 

रामलीला मैदान में हुए थे बलात्कार के प्रयास: बाबा रामदेव


रामलीला मैदान में गत चार जून की रात हुई पुलिस की कार्रवाई के बाद पहली बार रविवार को दिल्ली पहुंचे योग गुरु बाबा रामदेव ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं के साथ बलात्कार की कोशिश की गई और यदि वह भागे नहीं होते तो उनकी हत्या कर दी गई होती।

पुलिस कार्रवाई के तीन सप्ताह बाद राजधानी पहुंचे बाबा रामदेव ने एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया, "पुलिस की कार्रवाई के दौरान महिलाओं के साथ बलात्कार की कोशिश की गई..मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ।"

उन्होंने कहा, "समय आने पर हम इस सम्बंध में साक्ष्य देंगे।" 

Josh18 News

कौन सी अनिश्चितता में काम कर रहे हैं मनमोहन

नई दिल्ली। भाजपा ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह कौन सी अनिश्चितता की स्थिति में काम कर रहे हैं। भाजपा ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक [कैग] की सिंह द्वारा आलोचना किए जाने की भी निंदा की।

भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लंबे समय तक 'साइलेंट मोड' में रहे। जब बुधवार को संपादकों के एक समूह के साथ बातचीत में उन्होंने अपनी बात रखी तो कहा कि भ्रष्टाचार के मामले अपवाद हैं। नीतिगत निर्णयों और उनके कार्यान्वयन के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि संप्रग सरकार कई बार 'अनिश्चितता की स्थिति' में होती है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रधानमंत्री से सवाल करती है कि जब 2 जी स्पेक्ट्रम और राष्ट्रमंडल खेल आयोजन घोटाला हुआ और जब केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के पद पर पीजे थामस की नियुक्ति की गई तो वह कौन सी अनिश्चितता की स्थिति के दबाव में थे। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की प्रधानमंत्री बनने की काबिलियत संबंधी कांग्रेसी नेताओं की टिप्पणियों पर सिंह की प्रतिक्रिया की भी भाजपा ने आलोचना की।

प्रसाद ने कहा कि सात वर्ष प्रधानमंत्री पद पर रहने के बाद भी सिंह को यह कहना पड़ रहा है कि उन्हें कांग्रेस आलाकमान की ओर से अभी यह नहीं कहा गया है कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद सौंप दिया जाना चाहिए। इस तरह की टिप्पणी भारत जैसे बड़े देश के प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी में हो रही राजनीति की दयनीय दशा को दर्शाती है। प्रसाद ने कहा कि अक्सर खामोश रहने वाले प्रधानमंत्री ने विपक्ष की आलोचना की। सिंह ने मीडिया और कैग को भी आड़े हाथ लिया।

भाजपा प्रवक्ता ने कटाक्ष किया कि यह देश सिंह का शुक्रगुजार है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बख्श दिया। प्रसाद ने कहा कि कैग द्वारा नीतिगत मुद्दों पर टिप्पणी करने पर सिंह का सवाल उठाना भी उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी प्रधानमंत्री ने कैग के खिलाफ टिप्पणी की है। सिंह लंबे समय तक नौकरशाह रहे, पांच वर्ष वित्त मंत्री रहे और अब सात वर्ष से प्रधानमंत्री हैं। उन्हें मालूम होना चाहिए कि कैग को नीतिगत मुद्दों पर गौर करने का अधिकार है। कैग ने 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन की नीति संबंधी जो टिप्पणियां की हैं, उसे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही सीबीआई जांच में भी सही पाया गया है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कैग पर प्रधानमंत्री द्वारा सवाल खड़े करना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सरकार की शासन करने की शुचिता तथा ईमानदारी पर सवाल खड़े करता है। 2जी घोटाले और राजा के मुद्दे पर प्रसाद ने कहा कि दो नवंबर 2007 को प्रधानमंत्री द्वारा पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए जाने के बावजूद तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने सिंह की बात नहीं मानी। हम सिंह से सवाल करते हैं कि आखिर ऐसी कौन सी अनिश्चितता की स्थिति थी कि राजा के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।

भाजपा प्रवक्ता ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री पर अनिश्चितता की स्थिति का आखिर ऐसा कौन सा दबाव था कि उन्होंने 2जी लाइसेंस की नीति के संबंध में वित्त और दूरसंचार मंत्रालय के वरिष्ठ नौकरशाहों की आपत्तियों पर गौर नहीं किया और सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने के बाद भी राजा को बेकसूर करार दिया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में अनियमितताओं के मामले में शुंगलू समिति की रिपोर्ट में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सहित वरिष्ठ नौकरशाहों की भूमिका पर सवाल उठने के बाद भी कौन सी अनिश्चितता की स्थिति के दबाव में प्रधानमंत्री रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

गुजरात सरकार ने दंगों से जुड़े दस्तावेज मिटाए

अहमदाबाद, नई दिल्ली।। गुजरात में 2002 में हुए दंगों से संबंधित सरकारी दस्तावेजों को नष्ट कर दिया गया है। दंगों के दौरान टेलिफोन कॉल रेकॉर्ड और अफसरों की गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों को 2007 में ही मिटा दिया गया था। यह जानकारी सरकार ने दंगों की जांच कर रही एक समिति को दी है। इस मामले में अफसरों का कहना है कि यह सामान्य प्रक्रिया है और सिविल सेवा नियमों के तहत है। उनका कहना है कि कोई भी दस्तावेज पांच साल बाद नष्ट कर दिया जाता है, इसलिए दंगों से संबंधित दस्तावेजों को भी मिटा दिया गया। 

अफसरों का कहना है कि सामान्य सरकारी नियमों के अनुसार टेलिफोन कॉल रेकॉर्ड, गाड़ियों की लॉग बुक और सरकारी अधिकारियों गतिविधियों से जुड़ी डायरी एक निश्चित समय के बाद नष्ट कर दी जाती है। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत यह कार्रवाई की गई है। गौरतलब है कि 2002 में गोधरा कांड के बाद पूरे गुजरात में दंगे फैल गए थे, जिसमें हजारों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। 

कांग्रेस ने गुजरात सरकार की इस कार्रवाई को 'आपराधिक षडयंत्र' करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा है,'यह आपराधिक षडयंत्र के अलावा कुछ नहीं हैं ताकि सच सामने न आ सके। यह साफ तौर पर इस बात की ओर इशारा करता है कि राज्य सरकार इस मामले की लीपा पोती करने की कोशिश कर रही है।' 

तिवारी ने कहा कि 'नरसंहार और हत्याकांड' से संबंधित दस्तावेज जो कि सुप्रीम कोर्ट के अधीन था और जिसमें 'शक की सुई सीधे तौर पर राज्य के मुख्यमंत्री' की ओर जाती है, से संबंधित दस्तावेजों को इस तरीके से नष्ट किया जाना 'पूरी तरह से हास्यास्पद' है। 

लाखों शिव सैनिक हैं मेरी संपत्ति, कुर्क करोः ठाकरे

मुंबई।। बिहार की एक अदालत के संपत्ति कुर्क करने के आदेश पर शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कहा है कि उनकी असली संपत्ति लाखों शिव सैनिक हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि क्या कोई इस संपत्ति को कुर्क कर सकता है। शिव सेना के मुखपत्र 'सामना' में 'अपमानजनक' लेख छपने के मामले में बिहार की एक अदालत में हाजिर नहीं होने पर कोर्ट ने उनकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया था। 

ठाकरे ने 'सामना' में छपे संपादकीय में लिखा है, 'मेरी असली संपत्ति लाखों शिव सैनिक और मराठी मानुष हैं जो जंग के मेरे आह्वान पर तैयार रहते हैं। क्या कोई इस संपत्ति को कुर्क कर सकता है? इस तरह का कानून और अदालत अब तक नहीं है।' 

उन्होंने कहा, 'श्रद्धालु शिरडी के फकीर साईंबाबा के लिए सोने का मुकुट और सोने का सिंहासन दान में देते हैं। मेरा जीवन उसी फकीर की तरह है। मुझे काफी धन मिलता है लेकिन मैं इसे सड़ाने के लिए स्विस बैंक में नहीं रखता और गरीबों की मदद करता हूं।' 

ठाकरे ने अपने पिता प्रबोधांकर ठाकरे को याद करते हुए कहा कि उनके पिता ने उनके घर आने वाले लोगों के जूते चप्पलों का ढेर दिखाते हुए कहा था कि यह 'असली संपत्ति' है। 

शिव सेना प्रमुख ठाकरे ने कहा, 'अब अगर कोई इस संपत्ति को कुर्क करने आता है तो आए।' ठाकरे की प्रतिक्रिया से पहले शिव सेना के प्रवक्ता संजय राउत ने अदालत के आदेश को सदी का सबसे बड़ा मजाक' बताया था। 

गौरतलब है कि अडिशनल जुडिशल मैजिस्ट्रेट एसबीएम त्रिपाठी ने एडवोकेट राजेश कुमार सिंह की शिकायत मामले में 27 जून को ठाकरे की संपत्ति कुर्क करने के लिए वॉरंट जारी किया था। राजेश कुमार सिंह ने आरोप लगाया था कि 'सामना' में छपे ठाकरे के लेख ने 'करोड़ों बिहारियों' की भावनाओं को आहत किया है। 

आज अन्ना से नहीं मिलेंगी सोनिया

नई दिल्ली। सोनिया गांधी के गुरुवार को अन्ना हजारे से मिलने की संभावना नहीं है जो लोकपाल विधेयक पर काग्रेस प्रमुख के साथ समाज के रुख को लेकर चर्चा करना चाहते थे।

सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ के सूत्रों ने बताया कि अन्ना हजारे और सोनिया गांधी के बीच आज किसी मुलाकात की संभावना नहीं है। आज इस तरह की मुलाकात के लिए कोई समय तय नहीं हुआ है।

हजारे ने बुधवार को कहा था कि वह लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री कार्यालय को शामिल करने के लिए सोनिया गांधी को विश्वास में लेने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि हम सभी दलों से मिलेंगे और तीन जुलाई को लोकपाल विधेयक को लेकर होने वाली सर्वदलीय बैठक से पूर्व वे एक बार फिर काग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाधी से मिलकर उन्हें बताएंगे कि यदि प्रधानमंत्री ऐसा कह रहे हैं तो फिर क्या समस्या है।

समाज के सदस्यों ने बताया कि आज वे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाकपा महासचिव एबी वर्धन से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा एक जुलाई को उनका भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी से फिर से मुलाकात का कार्यक्रम है।

लोकपाल विधेयक को लेकर विभिन्न दलों से समर्थन जुटाने की अपनी मुहिम के तहत समाज के सदस्यों ने कल माकपा महासचिव प्रकाश करात जद यू नेता शरद यादव और रालोद नेता अजित सिंह से मुलाकात की थी।

हजारे ने कहा था कि पदस्थ प्रधानमंत्री एक ईमानदार व्यक्ति हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल भारत का है मंत्रिमंडल में बैठे लोग हमारे अपने लोग हैं। तब फैसला करने में क्या समस्या है? उन्हें देश के लिए इसे करने में सक्षम होना चाहिए।

वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे कि उन्हें खुद को लोकपाल के दायरे में लाए जाने पर कोई समस्या नहीं है लेकिन उनके मंत्रिमंडल के कुछ सहयोगी महसूस करते हैं कि प्रधानमंत्री पद को इसके दायरे में लाए जाने से अस्थिरता पैदा होगी।

Monday, 27 June 2011

अपराध रोको वर्ना रुकेगा प्रमोशन

लखनऊ [जाब्यू] महिलाओं और बच्चियों के प्रति अपराध की अनदेखी अब अफसरों को महंगी पड़ेगी। सोमवार को मुख्यमंत्री मायावती ने घोषणा कर दी कि अपराध रोक पाने में नाकाम अफसरों का चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्ट देते हुए उनका प्रमोशन रोक दिया जाएगा। यदि जरूरत पाई गई तो उसे निचले पद पर पदावनत भी कर दिया जाएगा। कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के नजरिये से उन्होंने उप्र को तीन जोन में बांटने की भी घोषणा की। प्रत्येक जोन का प्रभार वरिष्ठ अफसरों को सौंपा गया है।

मुख्यमंत्री सोमवार को लखनऊ में वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा कर रही थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बच्चियों के प्रति अपराध होने पर अगर एफआईआर लिखने में देरी की जाती है या आरोपी को बचाने का प्रयास किया जाता है तो थाना इंचार्ज को तुंरत निलम्बित कर दिया जाए। गम्भीर मामलों में उसकी इस हरकत पर उसे न केवल बर्खास्त कर दिया जाए बल्कि उसे जेल भी भेज दिया जाए।

अपराध में खुद पुलिस वाले के शामिल होने पर उसकी तुंरत गिरफ्तारी और बर्खास्तगी हो। जिस सर्किल में महिलाओं के प्रति अपराध लगातार बढ़ते ही पाए जाएं, वहां के सीओ की चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि देकर उसका प्रमोशन रोका जाए। अगर जरूरत पाई जाने पर उसे एक पद नीचे पदावनत कर दिया जाए।

पूरे जिले में महिलाओं और बच्चियों के साथ ज्यादा वारदात होने पर वहां के डीएम, एसपी, एसएसपी और डीआईजी के खिलाफ भी वैसी ही कार्रवाई की जाए जैसे सीओ के खिलाफ प्रस्तावित है। अगर कोई डाक्टर अपराधी को बचाने में अपने पद का दुरुपयोग करता है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश को तीन पुलिस जोन में बांटने की घोषणा की। जोन में विकास और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी अलग-अलग वरिष्ठ अधिकारियों की होगी। इन्हें महीने में छह दिन अनिवार्य रूप से जोन में रहना होगा। हर जोन में छह मंडल रखे गए हैं। पश्चिमी जोन में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री नेतराम और एडीजी केएल मीना की, पूर्वी जोन में विशेष पुलिस महानिदेशक फायर एके गुप्ता एवं प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री दुर्गाशंकर मिश्रा की तथा मध्य जोन में डीजी भ्रष्टाचार निवारण संगठन अतुल एवं प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री आरपी सिंह की तैनाती की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी अगस्त में विधानमंडल का सत्र समाप्त होने के बाद प्रदेश की कानून व्यवस्था एवं विकास कार्यों का मौके पर जाकर वह खुद निरीक्षण करेंगी। मुख्यमंत्री ने पहली जुलाई से थाना स्तर तक एक माह का विशेष अभियान चलाने को कहा है। यह भी निर्देश है कि इसकी तैयारी के लिए सभी जिलाधिकारी 29 जून को पूर्वाह्न दस बजे बैठक बुलाएं। इसमें सभी पुलिस अधिकारी, एसडीएम, सीएमओ व थानेदार भी शामिल होंगे।

विशेष अभियान के दौरान पुलिस अपराधी व संदिग्ध चाल-चलन वालों की सूची तैयार करेगी। सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय पांच लोगों को बुलाकर उनसे अलग से फीडबैक लिया जाएगा। ऐसे ही पांच लोगों से फीडबैक लेने की जिम्मेदारी सीओ, व जिला स्तर के अधिकारियों को भी दी गई है।

रामदेव के सामने अन्ना ने रखी शर्ते

नई दिल्ली। वरिष्ठ गांधीवादी अन्ना हजारे ने अपने प्रस्तावित अनशन में योग गुरु बाबा रामदेव के शामिल होने के प्रस्ताव पर कहा है कि इसके लिए उन्होंने बाबा के सामने कुछ शर्ते रखी हैं।

इस वर्ष अप्रैल में दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे गांधीवादी अन्ना हजारे ने मंच पर योग गुरु बाबा रामदेव का स्वागत किया था। अन्ना हजारे ने 16 अगस्त से एक बार फिर अनशन पर बैठने की घोषणा की है। महाराष्ट्र में रविवार देर शाम टेलीविजन संवाददताओं से बातचीत में अन्ना हाजारे ने कहा कि बाबा ने मेरे साथ अनशन पर बैठने की इच्छा जताई है, लेकिन मैंने उनके सामने कुछ शर्ते रखी है। यदि वह शर्ते मानते है तो मैं इस बारे में विचार करूंगा।

इस बारे में अन्ना हाजरे के नेतृत्व वाले सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के एक सदस्य ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब अन्ना हजारे ने ऐसा कहा है। इससे पहले भी उन्होंने कहा था कि बाबा रामदेव से कुछ निश्चित मुद्दों पर बातचीत करने के बाद वह अनशन में उनके शामिल होने का स्वागत करेगे। सरकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की समिति के एक सशक्त लोकपाल विधेयक तैयार करने में विफल रहने के कारण अन्ना हजारे ने 16 अगस्त से फिर अनशन करने की घोषणा की है। भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव के अभियान का समर्थन करने वाले अन्ना हजारे कुछ मुद्दों पर बाबा के विचारों से सहमत नहीं है।

अंतिम सांस तक भ्रष्टाचार से लड़ेंगे: रामदेव

गुड़गांव [जागरण संवाददाता]। योग गुरु बाबा रामदेव ने अंतिम सांस तक भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जारी रखने का एलान किया है।

उन्होंने कहा कि जब तक विदेशों में जमा काला धन राष्ट्रीय संपत्ति घोषित नहीं हो जाता, भ्रष्टाचारियों के लिए सख्त कानून नहीं बनता तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। वह हर हाल में अपने संघर्ष में कामयाब होंगे।

सोमवार को बाबा रामदेव गुड़गांव स्थित मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजेठमलानी की बेटी रानी जेठमलानी का हालचाल पूछने आए थे। इस दौरान मीडियाकर्मियों से बातचीत में बाबा ने कहा कि भ्रष्टाचार को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। चार जून की घटना इस बात का प्रमाण है। अब उनका आंदोलन और तेज होगा। लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए एक बार फिर पूरे देश की यात्रा करेंगे। दो लाख किलोमीटर 

Sunday, 26 June 2011

दिग्विजय को अन्ना का जवाब, गोलियां खाने को तैयार हूं

पुणे/ भोपाल।। गांधीवादी अन्ना हजारे ने गुरुवार को कहा कि वह गोलियां खाने से नहीं डरते। उन्होंने सरकार से कहा कि मजबूत लोकपाल विधेयक के लिए उनके अनशन पर जाने की स्थिति में वह चाहे तो गोलियां भी चला दें। 

हजारे ने संवाददाताओं से कहा, 'अन्ना हजारे को मरने से डर नहीं लगता। वे चाहें तो हमारे आंदोलन को कुचलने के लिए सिर्फ लाठियां ही नहीं, बल्कि गोलियां भी चला सकते हैं। इस देश की जनता यह फैसला करेगी कि भारत में लोकशाही है या तानाशाही।' दिल्ली से पुणे पहुंचे गांधीवादी से कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के बयानों के बारे में पूछा गया था। 

बहरहाल, दिग्विजय सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने यह नहीं कहा था कि अगर हजारे आमरण अनशन शुरू करते हैं तो उनके साथ भी वैसा ही सलूक होगा, जैसा योग गुरु बाबा रामदेव के साथ हुआ था। 

सिंह ने कहा कि जबलपुर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि कांग्रेस का इस बात से कुछ भी लेना-देना नहीं है कि बाबा रामदेव या अन्ना हजारे के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाए। इन दोनों के साथ क्या सलूक किया जाए, यह स्थानीय शासन पर निर्भर करता है और इस बात से कांग्रेस को जरा भी सरोकार नहीं है। 

अहमदनगर स्थित अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धी जाते हुए हजारे ने सिंह के बयानों पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि क्या मौजूदा कांग्रेस वही पार्टी है, जिसमें महात्मा गांधी और कामराज जैसे नेता थे। हजारे ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। 

उन्होंने कहा, 'कांग्रेस एक मजबूत लोकपाल के लिए होने वाले हमारे आंदोलन को कुचल देने के लिए प्रतिबद्ध नजर आती है। लेकिन उसे अब यह याद रखना चाहिए कि सिर्फ अन्ना हजारे नहीं, बल्कि उनके आंदोलन का समर्थन कर रहा पूरा देश और उसकी जनता उसे सबक सिखाएगी।' 

अन्ना हजारे पक्ष ने गुरुवार को दावा किया कि लोकपाल विधेयक के अपने मसौदे में सरकार ने ऐसे प्रावधान किएहैं जिसके तहत भ्रष्ट नौकरशाहों के बजाय भ्रष्टाचार की शिकायत करने वालों को सख्त सजा मिलेगी। 

लोकपाल मसौदा संयुक्त समिति में समाज की ओर से शामिल रहे सदस्यों ने नई दिल्ली में बयान जारी कर कहा , ' भ्रष्ट सरकारी नौकरशाहों के बजाय शिकायतकर्ताओं के लिए कड़ी सजा के प्रावधान हैं। अगर कोई विशेष अदालतयह कहती है कि शिकायत गलत है तो नागरिकों को कम से कम दो वर्ष की सजा हो सकती है। लेकिन अगरकिसी नौकरशाह के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप साबित हो जाता है तो उसे सिर्फ छह ही महीने की सजा होगी ।'