जिनीवा।। विदेशी बैंकों में जमा काला धन वापस लाने के मामले में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। स्विट्जरलैंड की सरकार ने स्विस बैंकों में काला धन जमा करने वालों के बारे में जानकारी पाने का रास्ता खोल दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद भारत जैसे देश स्विस बैकों में जमा काले धन के बारे में जानकारी आसानी से पा सकेंगे।
स्विट्जरलैंड के ऊपरी सदन ने शुक्रवार को डबल टैक्सेशन अग्रीमेंट (डीटीएए) में सेंशोधन को मंजूरी दे दी। जिन देशों की सरकारों ने स्विट्जरलैंड से यह संधि कर रखी है उनके लिए अब वहां से काले धन के बारे में कानूनी मदद लेना और काला धन रखने वालों को पहचानना आसान हो जाएगा। इस संशोधन से भारत, जर्मनी, कनाडा, जापान, नीदरलैंड, यूनान, तुर्की, उरुग्वे, कजाकस्तान और पोलैंड को फायदा पहुंचेगा। इस संशोधन को अभी जनमत संग्रह के जरिये पास करवाया जाएगा। इसके बाद यह पूरी तरह कानून बन जाएगा।
स्विस बैंक का यह संशोधन उस समय आया है, जब भारत की सरकार काले धन के मामले पर जबरदस्त दबाव झेल रही है। देश का विपक्ष, सुप्रीम कोर्ट और सिविल सोसायटी सरकार पर काला धन वापस लाने के मामले में जबरदस्त दबाव बनाए हुए है।
स्विट्जरलैंड के ऊपरी सदन ने शुक्रवार को डबल टैक्सेशन अग्रीमेंट (डीटीएए) में सेंशोधन को मंजूरी दे दी। जिन देशों की सरकारों ने स्विट्जरलैंड से यह संधि कर रखी है उनके लिए अब वहां से काले धन के बारे में कानूनी मदद लेना और काला धन रखने वालों को पहचानना आसान हो जाएगा। इस संशोधन से भारत, जर्मनी, कनाडा, जापान, नीदरलैंड, यूनान, तुर्की, उरुग्वे, कजाकस्तान और पोलैंड को फायदा पहुंचेगा। इस संशोधन को अभी जनमत संग्रह के जरिये पास करवाया जाएगा। इसके बाद यह पूरी तरह कानून बन जाएगा।
स्विस बैंक का यह संशोधन उस समय आया है, जब भारत की सरकार काले धन के मामले पर जबरदस्त दबाव झेल रही है। देश का विपक्ष, सुप्रीम कोर्ट और सिविल सोसायटी सरकार पर काला धन वापस लाने के मामले में जबरदस्त दबाव बनाए हुए है।
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