बाबा रामदेव और सरकार में कालेधन के खिलाफ लड़ाई में बनी सहमति अब दोनों के बीच वादाखिलाफी की सीधी जंग में तब्दील हो गई है। दो दिन में अनशन खत्म करने की हामी भरने की बाबा की ओर से लिखी गई चिट्ठी का खुलासा कर सरकार ने शनिवार को रामदेव के अनशन सत्याग्रह पर सीधा वार कर दिया। वहीं, बाबा ने सरकार पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए साफ कहा कि वार्ताकार मंत्रियों कपिल सिब्बल और सुबोधकांत सहाय ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उनकी मांग लिखित में दिखाने के बहाने छल कर उनसे यह चिट्ठी लिखवाई। बाबा ने सिब्बल पर निशाना साधते हुए कहा कि वाकई राजनीतिज्ञ ने अपना रंग दिखा दिया है और वह अब सिब्बल के साथ कोई वार्ता नहीं करेंगे।
शनिवार शाम एक पत्रकार वार्ता में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने बाबा के सबसे निकटस्थ शिष्य आचार्य बालकृष्ण की ओर से सरकार को लिखित में दिए गए इस राजीनामे की कॉपी मीडिया को जारी कर रामदेव के अनशन को विवादास्पद बना दिया। चिट्ठी में बाबा की ओर से सरकार के साथ कुछ एक को छोड़ तमाम मुद्दों पर सहमति बन जाने की बात कही गई है। साथ ही कहा गया है कि सरकार के लिखित आश्वासन देने पर राजी होने के मद्देनजर अब बाबा अनशन नहीं बल्कि 4 से 6 जून तक रामलीला मैदान में तप करेंगे। इसमें यह भी कहा गया है कि सरकार के साथ सहमति की घोषणा खुद बाबा शनिवार दोपहर तक कर देंगे। सिब्बल ने कहा कि बाबा ने जब लिखित वादे के अनुसार दोपहर को इसकी घोषणा नहीं कि तो कई बार उन्हें फोन किया गया और फिर अंततः सरकार ने प्रेस कांफ्रेंस कर खुद इसका ऐलान करने की बात बाबा को बता दी।
सिब्बल और सहाय की प्रेस कांफ्रेंस शुरू होने से ठीक पहले बाबा से बात हुई। इसके बाद उधर रामलीला मैदान में बाबा के सरकार की सभी मांगें मान लेने की घोषणा पर जश्न शुरू ही हुआ था कि इधर सिब्बल ने उनकी चिट्ठी का खुलासा कर चंद मिनटों के अंदर ही इस पर पानी फेर दिया। इतना ही नहीं सरकार के तल्ख तेवरों को जाहिर करते हुए सिब्बल ने बाबा को चेतावनी के अंदाज में कहा कि वार्ता करने को सरकार का डर मानने की गुस्ताखी किसी को नहीं करनी चाहिए क्योंकि जरूरत पड़ी तो सरकार कठोर तेवर भी दिखा सकती है। उनका कहना था कि सरकार सभी वर्गों तक पहुंचना चाहती है इसलिए सरकार के तमाम मंत्री बाबा के पास गए।
इस चिट्ठी का खुलासा होते ही बाबा सरकार के साथ हुई डील को छुपाने के सवालों से घिर गए। सरकार के इस वार से आहत रामदेव ने कहा कि उन्हें पता नहीं था कि वाकई राजनीति में इतनी कुटिलता होती है। मंत्रियों ने दबाव डालकर प्रधानमंत्री को देने के नाम पर शुक्रवार को कैलेरिजेज होटल में यह चिट्ठी लिखवाई थी। इतना ही नहीं बाबा खुद हस्ताक्षर करें इसका भी दबाव डाला मगर वे राजी नहीं हुए और अपने महामंत्री से हस्ताक्षर करवाए। अनशन नहीं करने के लिए मान जाने की सरकार की घेरेबंदी में आए आहत बाबा ने इसके बाद सिब्बल और सरकार पर धोखा करने का आरोप जड़ दिया। साथ ही यह भी ऐलान कर दिया कि अब वे फोन पर कोई वार्ता नहीं करेंगे और न ही सिब्बल से जिंदगी में कोई बातचीत होगी। बाबा ने प्रधानमंत्री से सिब्बल को सुलह वार्ता की टीम से निकालने की मांग करते हुए उम्मीद जताई कि दुबारा इस तरह का छल उनके साथ न किया जाए। उन्होंने कहा कि वह अब सिर्फ प्रधानमंत्री की ही बातें सुनेंगे। बहरहाल बाबा ने चाहे सरकार के वार पर तुरंत पलटवार कर दिया हो मगर कालेधन के खिलाफ उनके अनशन सत्याग्रह की गेंद को केंद्र ने अब बाबा के पाले में ही डाल दिया है। केंद्र के इसी दांव का नतीजा रहा कि देर रात तक बाबा रामलीला मैदान में लगातार अपने समर्थकों को सफाई देने के अंदाज में थे।
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