लगाते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने वालों पर इलाहाबाद
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 50 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है और उनके
खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।
इस मामले में एक याचिका मध्य प्रदेश के पूर्व एसपी विधायक किशोर समरीते
ने, जबकि दूसरी याचिका गजेंद्र पाल सिंह ने दाखिल की थी।
जस्टिस उमानाथ सिंह और जस्टिस सतीश चंद्र की बेंच ने कथित रूप से अमेठी
में रहने वाली सुकन्या और उसके माता-पिता को राहुल द्वारा बंदी बना लिए
जाने की खबर देने वाली एक वेबसाइट पर भी प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए हैं।
अदालत के पिछले शुक्रवार के आदेश के तहत उत्तर प्रदेश के डीजीपी करमवीर
सिंह ने सुकन्या और उसके माता-पिता को अदालत में पेश किया और उन्होंने
अदालत को बताया कि उन्हें किसी ने बंधक नहीं बनाया था।
सुकन्या बताई जा रही लड़की ने अदालत को अपना असली नाम कीर्ति सिंह बताया,
जबकि अपने पिता का नाम बलराम सिंह और मां का नाम सुशीला उर्फ मोहिनी होने
की पुष्टि की। अमेठी थाना प्रभारी ने इन तीनों कथित बंदियों की शिनाख्त
की। इस परिवार ने अदालत को बताया कि वे किसी की अवैध हिरासत में नहीं
हैं।
इस मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि
अमेठी की सुकन्या और उसके माता-पिता को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया
है, लिहाजा उसे अदालत में पेश कर मुक्त कराया जाए।
अदालत ने तीनों कथित बंदियों की ओर से याचिका दाखिल करने वाले याची पर 50
लाख रुपये हर्जाना लगाया है और बड़ी शख्सियत को बदनाम करने के मामले का
खुद संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के आदेश भी दिए।
NBT News.
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