Thursday, 30 June 2011

गुजरात दंगे से जुड़े दस्तावेज नष्ट हो गए हैं: मोदी सरकार

अहमदाबाद। आईपीएस अफसर संजीव भट्ट के बयानों को झुठलाने के लिए गुजरात सरकार ने एक बयान देकर अपने आप को विवादों में फंसा लिया है। सरकार ने कहा कि 2002 के दंगों से जुड़े कई अहम प्रशासनिक दस्तावेज उसने नष्ट कर दिए हैं। ऐसे में सरकार पर सवाल उठने लगा है कि जब कोर्ट में केस चल रहा था तो उसने दंगों से जुड़े दस्तावेजों को कैसे नष्ट कर दिया।

गुजरात की मोदी सरकार दंगों में अपनी भूमिका को लेकर पाकसाफ बताती रही है। लेकिन दंगों की जांच कर रहे नानावटी आयोग के सामने सरकार का ताजा बयान उसकी मंशा पर सवाल खड़े करता है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने नानावटी कमीशन को बताया कि वो 2002 दंगों से जुड़े जरूरी दस्तावेज नष्ट कर चुकी है। कमीशन के सामने सरकारी वकील एसबी वकील के मुताबिक इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल डेटा, सरकारी वाहनों का हिसाब रखने वाली लॉग रजिस्टर बुक्स, अफसरों की आवाजाही की सरकारी डायरियां 2007 में ही नष्ट कर दिए गए थे।

मुझे बदनाम करने का प्रयास हो रहा है: नरेंद्र मोदी
 

वकील के मुताबिक आईपीएस अफसर संजीव भट्ट नरेंद्र मोदी की बुलाई मीटिंग में अपनी मौजूदगी के बारे में झूठ बोल रहे हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि इसका सरकारी रिकॉर्ड मौजूद ही नहीं है। एसबी वकील की मानें तो इस बात को समझने की जरूरत वास्तव में संजीव भट्ट को कॉल की गई थी या वो मीटिंग में गए भी थे या नहीं। ये रिकॉर्ड तो 2007 में ही नष्ट हो गए थे।

वहीं, सांप्रदायिक दंगों के केसों से जुड़े लोग सरकार के इस बयान के बाद ताज्जुब में हैं। मुकुल सिन्हा (वकील, जनसंघर्ष मंच) ने बताया कि सभी अहम केसों में कार्यवाही, नरोदा ग्राम केस, जकिया जाफरी की मुख्य शिकायत और दूसरे केस अभी तक चल रहे हैं। ऐसे में साक्ष्यों को नष्ट करना न केवल ताज्जुब पैदा करता है बल्कि ये गैरकानूनी भी है।

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