Thursday, 30 June 2011

गुजरात सरकार ने दंगों से जुड़े दस्तावेज मिटाए

अहमदाबाद, नई दिल्ली।। गुजरात में 2002 में हुए दंगों से संबंधित सरकारी दस्तावेजों को नष्ट कर दिया गया है। दंगों के दौरान टेलिफोन कॉल रेकॉर्ड और अफसरों की गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों को 2007 में ही मिटा दिया गया था। यह जानकारी सरकार ने दंगों की जांच कर रही एक समिति को दी है। इस मामले में अफसरों का कहना है कि यह सामान्य प्रक्रिया है और सिविल सेवा नियमों के तहत है। उनका कहना है कि कोई भी दस्तावेज पांच साल बाद नष्ट कर दिया जाता है, इसलिए दंगों से संबंधित दस्तावेजों को भी मिटा दिया गया। 

अफसरों का कहना है कि सामान्य सरकारी नियमों के अनुसार टेलिफोन कॉल रेकॉर्ड, गाड़ियों की लॉग बुक और सरकारी अधिकारियों गतिविधियों से जुड़ी डायरी एक निश्चित समय के बाद नष्ट कर दी जाती है। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत यह कार्रवाई की गई है। गौरतलब है कि 2002 में गोधरा कांड के बाद पूरे गुजरात में दंगे फैल गए थे, जिसमें हजारों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। 

कांग्रेस ने गुजरात सरकार की इस कार्रवाई को 'आपराधिक षडयंत्र' करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा है,'यह आपराधिक षडयंत्र के अलावा कुछ नहीं हैं ताकि सच सामने न आ सके। यह साफ तौर पर इस बात की ओर इशारा करता है कि राज्य सरकार इस मामले की लीपा पोती करने की कोशिश कर रही है।' 

तिवारी ने कहा कि 'नरसंहार और हत्याकांड' से संबंधित दस्तावेज जो कि सुप्रीम कोर्ट के अधीन था और जिसमें 'शक की सुई सीधे तौर पर राज्य के मुख्यमंत्री' की ओर जाती है, से संबंधित दस्तावेजों को इस तरीके से नष्ट किया जाना 'पूरी तरह से हास्यास्पद' है। 

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