Saturday, 18 June 2011

सूबे में कानून व्यवस्था ध्वस्त: जितिन

केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा है कि प्रदेश की सरकार का कानून व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। यहां अपराधी कानून का मखौल उड़ाते हुए खुलेआम घूमते हैं। सूबे में कानून-व्यवस्था ध्वस्त है। यहां औरतों और लड़कियों की आबरू सुरक्षित नहीं है। उन्होंने हर हाल में सोनम के साथ पुलिस कैंपस में हुए हादसे की जांच सीबीआई से कराने की मांग की।

केंद्रीय भूतल परिवहन राज्यमंत्री यहां सोनम के घर आए थे। अपरान्ह करीब तीन बजे यहां पहुंचकर अपनी गाड़ी से उतरने के बाद वह सीधे सोनम के घर चल दिए। उसका हालचाल जानने और घटना के बारे में जानकारी लेने के बाद उन्होंने कहा कि पुलिस का काफी अमला अपने थाने की सुरक्षा के लिए तो मुस्तैद है लेकिन सीधे पुलिस की खिलाफत करते हुए इतने बड़े कांड का मुकाबला कर रही तरन्नुम बानो और उसके परिवार की हिफाजत के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है जबकि उसकी जानमाल को काफी खतरा है। इससे यह लग रहा है कि शासन-प्रशासन अब भी इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि सोनम हत्याकांड को लेकर निघासन में सभी राजनीतिक दल एकजुट होकर लगातार छह दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बावजूद अभी तक किसी मुल्जिम की गिरफ्तारी नहीं की गई है।

श्री प्रसाद ने कहा कि सरकार की संवेदनहीनता इससे जाहिर है कि इतने चर्चित मामले में जिससे पूरे देश के लोग उद्वेलित हैं, अब तक सूबे की सरकार का कोई मंत्री या अन्य नुमाइंदा पीड़ित परिवार का हालचाल लेने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि तरन्नुम और उसके पति को अपनी बेटी की हत्या की जांच के लिए उत्तर प्रदेश की जांच एजेंसियों और पुलिस पर भरोसा नहीं है। उन्होंने बताया कि यह दंपति शुरू से सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि अगर परिवार सीबीआई जांच की मांग करेगा तो वह सीबीआई जांच की सिफारिश कराने को तैयार हैं। जितिन प्रसाद ने कहा कि अब मुख्यमंत्री इस पर आदेश क्यों नहीं कर रही हैं।

केंद्रीय मंत्री ने यह घोषणा की कि प्रदेश सरकार जब तक इस कांड की सीबीआई जांच नहीं कराती तब तक कांग्रेस पार्टी आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने अपनी पार्टी की तरफ से तीन मांगें रखीं जिनमें मामले की सीबीआई जांच और दोषियों को जेल भेजना, पीड़ित परिवार को सुरक्षा और इस प्रदेश में हुए इस तरीके के सभी अपराधों की फाइलें खुलवाकर उनकी फिर से जांच कराना शामिल हैं।

थाने के गेट पर रोकने से भड़के जितिन समर्थक, हंगामा

सोनम के साथ हुए हादसे के घटनास्थल को देखने को पहुंचे प्रसाद के साथ जा रहे कार्यकर्ताओं की थाने में घुसने को लेकर पुलिस और पीएसी वालों से जमकर धक्कामुक्की हुई। जितिन समर्थकों ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

थाने के गेट पर मौजूद दो-दो एसडीएम और सीओ के साथ भारी संख्या में पुलिस बल ने केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के साथ चार पांच लोगों को तो जाने दिया लेकिन बाकी बड़ी तादाद में मौजूद कार्यकर्ताओं को बाहर ही रोक दिया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने गेट के अंदर घुसने के लिए खूब धक्कामुक्की हुई। जितिन समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता जहां अंदर घुसने के लिए जोर लगा रहे थे वहीं गेट पर मौजूद एसडीएम निघासन राजितराम प्रजापति और एसडीएम पलिया सीपी तिवारी समेत यहां भेजे गए सीओ धौरहरा रणवीर सिंह, सीओ मोहम्मदी आरएस गौतम के अलावा एसओ निघासन नितिन कसाना, एसओ सिंगाही चंद्रशेखर आदि अधिकारी इतनी बड़ी तादाद में लोगों को थाने में घुसने मौका-ए-वारदात पर जाने देने के हक में नहीं थे। इसी पर कार्यकर्ताओं ने जहां धक्का देकर गेट खोलने की कोशिश की वहीं पुलिस और पीएसी के लोग गेट न खुलने देने को जोर लगा रहे थे।

घटनास्थल देखकर जैसे ही जितिन वापस लौटे कार्यकर्ताओं ने पुलिस द्वारा उनको बाहर निकालने के लिए पुलिस द्वारा खोले गए थोड़े से गेट को धकियाकर पूरा खोल दिया। इसके बाद उन्होंने थाने के परिसर में घुसकर  जमकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान इस नजारे को देखने के लिए तहसील अधिवक्ता संघ आदि आसपास की इमारतों पर लोगों की भारी भीड़ चढ़कर खड़ी रही।

जितिन ने देखा घटनास्थल और कमरा

निघासन-खीरी। पार्टी के कुछ लोगों के साथ केंद्रीय भूतल परिवहन राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने थाने के परिसर में जाकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने वह गिरा हुआ पेड़ देखा जिससे सोनम की लाश लटकी मिली थी। इसके अलावा उन्होंने उस कमरे का भी मुआयना किया जिसके अंदर सोनम को ले जाकर दुराचार का आरोप लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस सबको देखने के बाद ऐसा लगता है कि सोनम के साथ काफी बेरहमी के साथ बर्ताव किया गया। उसके साथ हुई वारदात काफी अमानवीय और शैतानी है। श्री प्रसाद के साथ इस दौरान पार्टी सांसद जफर अली नकवी, जिलाध्यक्ष इकबाल अहमद, अरविंद गिरि, बंशीधर राज, धीरेंद्र बहादुर सिंह, रामेंद्र जनवार, सैफ अली, राजीव अग्निहोत्री, रमेश सिंह, तृप्ति अवस्थी, अनूप शुक्ल, वैशाली अली, बरकत अली, सतीश अजमानी, नरेंद्र सिंह भदौरिया, मोहन चंद्र उप्रेती, उषा दीक्षित, रमनजीत सिंह, अभिषेक पांडे आदि तमाम पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

 

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