Monday, 20 June 2011

कर्मियों को देना पड़ेगा संपत्ति का हिसाब

मीरजापुर : खाद्य विभाग में तैनात कर्मचारियों को अपने संपत्ति का हिसाब देना होगा। तत्कालीन आयुक्त राजन शुक्ला के आदेश पर भी अमल नहीं किया जा रहा है। चतुर्थ श्रेणी से लेकर अधिकारी तक करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। विभाग के कर्मियों ने अपने संपत्ति को छिपाने के लिए कागजी कार्रवाई शुरू कर दिया है।

आयुक्त ने पूर्व में ही आदेश दिया था कि चतुर्थ श्रेणी से लेकर पूर्ति निरीक्षक अपने सम्पत्ति का हिसाब जिला मुख्यालयों पर देंगे। आदेश का पालन करने को कौन कहे उसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। सूत्रों पर विश्वास करें तो उनका कहना है कि खाद्य एवं रसद विभाग में तैनात कर्मचारियों के पास लाखों की अचल सम्पत्ति विभिन्न माध्यम से अर्जित की गयी है। जांच किया जाय तो एक कर्मचारी के पास कई लाख की सम्पत्ति है। खाद्य आयुक्त ने एक माह के अंदर सभी कर्मचारियों की सम्पत्ति का ब्योरा मांगा था लेकिन अभी तक विभाग के अधिकारियों ने अपना ब्योरा नहीं दिया। बताते हैं कि विंध्याचल मंडल के संत रविदासनगर भदोही, सोनभद्र और मीरजापुर में लिपिक पद पर तैनात कर्मचारियों के सम्पत्ति का हिसाब ही नहीं है। इन कर्मियों की सम्पत्ति इलाहाबाद और वाराणसी में है। यह बात दीगर है कि जिस आयुक्त ने सम्पत्ति की सूचना मांगी थी उसका स्थानान्तरण हो जाने से कर्मियों ने राहत की सांस लिया है। वहीं उप खाद्य आयुक्त डीसी मिश्र का कहना है आयुक्त के निर्देश का पालन हुआ कि नहीं। इसकी जांच की जायेगी। उन्होंने बताया कि कुछ ने जिला मुख्यालय पर ही जमा कर दिया होगा तो कुछ अपनी रिपोर्ट शासन में सीधे भेज देते हैं। उन्होंने स्वीकार किया है कि आयुक्त ने जो आदेश दिया है उसका पालन नहीं किया गया होगा। तीनों जनपदों के जिला पूर्ति अधिकारियों से जानकारी मांगी गयी है।

Jagran News

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