Sunday, 26 June 2011

दिग्विजय को अन्ना का जवाब, गोलियां खाने को तैयार हूं

पुणे/ भोपाल।। गांधीवादी अन्ना हजारे ने गुरुवार को कहा कि वह गोलियां खाने से नहीं डरते। उन्होंने सरकार से कहा कि मजबूत लोकपाल विधेयक के लिए उनके अनशन पर जाने की स्थिति में वह चाहे तो गोलियां भी चला दें। 

हजारे ने संवाददाताओं से कहा, 'अन्ना हजारे को मरने से डर नहीं लगता। वे चाहें तो हमारे आंदोलन को कुचलने के लिए सिर्फ लाठियां ही नहीं, बल्कि गोलियां भी चला सकते हैं। इस देश की जनता यह फैसला करेगी कि भारत में लोकशाही है या तानाशाही।' दिल्ली से पुणे पहुंचे गांधीवादी से कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के बयानों के बारे में पूछा गया था। 

बहरहाल, दिग्विजय सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने यह नहीं कहा था कि अगर हजारे आमरण अनशन शुरू करते हैं तो उनके साथ भी वैसा ही सलूक होगा, जैसा योग गुरु बाबा रामदेव के साथ हुआ था। 

सिंह ने कहा कि जबलपुर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि कांग्रेस का इस बात से कुछ भी लेना-देना नहीं है कि बाबा रामदेव या अन्ना हजारे के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाए। इन दोनों के साथ क्या सलूक किया जाए, यह स्थानीय शासन पर निर्भर करता है और इस बात से कांग्रेस को जरा भी सरोकार नहीं है। 

अहमदनगर स्थित अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धी जाते हुए हजारे ने सिंह के बयानों पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि क्या मौजूदा कांग्रेस वही पार्टी है, जिसमें महात्मा गांधी और कामराज जैसे नेता थे। हजारे ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। 

उन्होंने कहा, 'कांग्रेस एक मजबूत लोकपाल के लिए होने वाले हमारे आंदोलन को कुचल देने के लिए प्रतिबद्ध नजर आती है। लेकिन उसे अब यह याद रखना चाहिए कि सिर्फ अन्ना हजारे नहीं, बल्कि उनके आंदोलन का समर्थन कर रहा पूरा देश और उसकी जनता उसे सबक सिखाएगी।' 

अन्ना हजारे पक्ष ने गुरुवार को दावा किया कि लोकपाल विधेयक के अपने मसौदे में सरकार ने ऐसे प्रावधान किएहैं जिसके तहत भ्रष्ट नौकरशाहों के बजाय भ्रष्टाचार की शिकायत करने वालों को सख्त सजा मिलेगी। 

लोकपाल मसौदा संयुक्त समिति में समाज की ओर से शामिल रहे सदस्यों ने नई दिल्ली में बयान जारी कर कहा , ' भ्रष्ट सरकारी नौकरशाहों के बजाय शिकायतकर्ताओं के लिए कड़ी सजा के प्रावधान हैं। अगर कोई विशेष अदालतयह कहती है कि शिकायत गलत है तो नागरिकों को कम से कम दो वर्ष की सजा हो सकती है। लेकिन अगरकिसी नौकरशाह के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप साबित हो जाता है तो उसे सिर्फ छह ही महीने की सजा होगी ।'

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