Monday, 27 June 2011

अपराध रोको वर्ना रुकेगा प्रमोशन

लखनऊ [जाब्यू] महिलाओं और बच्चियों के प्रति अपराध की अनदेखी अब अफसरों को महंगी पड़ेगी। सोमवार को मुख्यमंत्री मायावती ने घोषणा कर दी कि अपराध रोक पाने में नाकाम अफसरों का चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्ट देते हुए उनका प्रमोशन रोक दिया जाएगा। यदि जरूरत पाई गई तो उसे निचले पद पर पदावनत भी कर दिया जाएगा। कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के नजरिये से उन्होंने उप्र को तीन जोन में बांटने की भी घोषणा की। प्रत्येक जोन का प्रभार वरिष्ठ अफसरों को सौंपा गया है।

मुख्यमंत्री सोमवार को लखनऊ में वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा कर रही थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बच्चियों के प्रति अपराध होने पर अगर एफआईआर लिखने में देरी की जाती है या आरोपी को बचाने का प्रयास किया जाता है तो थाना इंचार्ज को तुंरत निलम्बित कर दिया जाए। गम्भीर मामलों में उसकी इस हरकत पर उसे न केवल बर्खास्त कर दिया जाए बल्कि उसे जेल भी भेज दिया जाए।

अपराध में खुद पुलिस वाले के शामिल होने पर उसकी तुंरत गिरफ्तारी और बर्खास्तगी हो। जिस सर्किल में महिलाओं के प्रति अपराध लगातार बढ़ते ही पाए जाएं, वहां के सीओ की चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि देकर उसका प्रमोशन रोका जाए। अगर जरूरत पाई जाने पर उसे एक पद नीचे पदावनत कर दिया जाए।

पूरे जिले में महिलाओं और बच्चियों के साथ ज्यादा वारदात होने पर वहां के डीएम, एसपी, एसएसपी और डीआईजी के खिलाफ भी वैसी ही कार्रवाई की जाए जैसे सीओ के खिलाफ प्रस्तावित है। अगर कोई डाक्टर अपराधी को बचाने में अपने पद का दुरुपयोग करता है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश को तीन पुलिस जोन में बांटने की घोषणा की। जोन में विकास और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी अलग-अलग वरिष्ठ अधिकारियों की होगी। इन्हें महीने में छह दिन अनिवार्य रूप से जोन में रहना होगा। हर जोन में छह मंडल रखे गए हैं। पश्चिमी जोन में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री नेतराम और एडीजी केएल मीना की, पूर्वी जोन में विशेष पुलिस महानिदेशक फायर एके गुप्ता एवं प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री दुर्गाशंकर मिश्रा की तथा मध्य जोन में डीजी भ्रष्टाचार निवारण संगठन अतुल एवं प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री आरपी सिंह की तैनाती की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी अगस्त में विधानमंडल का सत्र समाप्त होने के बाद प्रदेश की कानून व्यवस्था एवं विकास कार्यों का मौके पर जाकर वह खुद निरीक्षण करेंगी। मुख्यमंत्री ने पहली जुलाई से थाना स्तर तक एक माह का विशेष अभियान चलाने को कहा है। यह भी निर्देश है कि इसकी तैयारी के लिए सभी जिलाधिकारी 29 जून को पूर्वाह्न दस बजे बैठक बुलाएं। इसमें सभी पुलिस अधिकारी, एसडीएम, सीएमओ व थानेदार भी शामिल होंगे।

विशेष अभियान के दौरान पुलिस अपराधी व संदिग्ध चाल-चलन वालों की सूची तैयार करेगी। सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय पांच लोगों को बुलाकर उनसे अलग से फीडबैक लिया जाएगा। ऐसे ही पांच लोगों से फीडबैक लेने की जिम्मेदारी सीओ, व जिला स्तर के अधिकारियों को भी दी गई है।

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