Sunday, 26 June 2011

घाटे का सौदा हो सकता है मूल्य वृद्धि

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो] रसोई गैस, केरोसिन और डीजल के मूल्य बढ़ाकर सरकार ने भले ही आम आदमी तक पर बड़ी चोट कर दी हो, लेकिन इसका खामियाजा उसे भी भुगतना पड़ सकता है। इसके विरोध में विपक्षी ही नहीं, सरकार समर्थक दल भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का मन बना रहे हैं। देशभर में शनिवार को विभिन्न दलों ने बढ़ती महंगाई के मद्देनजर सरकार के खिलाफ तगड़ा विरोध प्रदर्शन किया।

समाजवादी पार्टी तो इस पर इतना नाराज है कि लोकपाल पर प्रधानमंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक में जाने तक से परहेज के बारे में सोच रही है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव मोहन सिंह ने शनिवार को यहां पत्रकारों से कहा, प्रधानमंत्री की ओर से लोकपाल मसौदे पर तीन जुलाई को बुलाई गई बैठक में शामिल होने या न होने को लेकर पार्टी असमंजस में है'।

मोहन सिंह ने यहां तक कहा कि सपा के लिए एक तरफ सरकार है तो दूसरी तरफ जनता का दबाव। पार्टी की स्थिति सैंडविच जैसी हो गयी है। लिहाजा पार्टी प्रधानमंत्री को आगाह करती है कि वे पेट्रो पदार्थों की मूल्य वृद्धि को तुरंत वापस लें। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बढ़ा मूल्य वापस नहीं होता तो पार्टी वामदलों व बढ़े मूल्य का विरोध करने वाले दूसरे दलों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेगी।

भाजपा की वरिष्ठ नेता व लोकसभा में नेता विपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा कि पेट्रो पदार्थों में मूल्य वृद्धि करना आम आदमी की बात करने वाली कांग्रेस की अगुआई वाली सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। भाजपा चाहती है कि मूल्य वृद्धि वापस हो। जब तक यह नहीं होता पार्टी सड़क से संसद तक इसके खिलाफ आंदोलन जारी रखेगी। भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि सरकार को बताना होगा कि आखिर चुनावों के बाद ही यह मूल्य वृद्धि क्यों होती है।

माकपा, भाकपा, आरएसपी और फॉरवर्ड ब्लाक ने भी पेट्रो पदार्थों की मूल्य वृद्धि के विरोध में देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है। माकपा के राज्यसभा सांसद सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार महंगाई घटाने की बात करती है, जबकि घटाने बजाय हमेशा बढ़ाती है।

कांग्रेसी राज्य सरकारों को करों में कटौती के निर्देश

नई दिल्ली। रसोई गैस, केरोसिन व डीजल के मूल्यों में वृद्धि पर सरकार की चौतरफा आलोचना के बाद कांग्रेस ने अपनी राज्य सरकारों को करों में कटौती का निर्देश देकर गैर कांग्रेसी सरकारों पर भी दबाव बनाना शुरू कर दिया है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सभी मुख्यमंत्रियों को करो में रियायत देने के लिए लिखा है।

पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने सीमा व उत्पाद शुल्क में कटौती करके आम आदमी को राहत देने की कोशिश की है। लिहाजा राज्य सरकारों को भी अपने करों में कटौती करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने कांग्रेस शासित राज्यों को पेट्रोलियम पदार्थों के करों में यथासंभव कटौती करने के निर्देश दे दिए हैं। द्विवेदी ने मूल्य वृद्धि के फैसले को सरकार की ओर से मजबूरी में उठाया गया कदम करार दिया। साथ ही भाजपा के विरोध को यह कहकर खारिज किया कि राजग सरकार ने भी कई बार पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्य बढ़ाये थे। हालांकि उन्होंने माना कि डीजल में मूल्य वृद्धि का असर सभी पर पड़ता है, लेकिन कई बार मजबूरी में कड़े फैसले लेने पड़ते हैं। बताते हैं कि संभव है कि रात तक कुछ कांग्रेसी राज्य सरकारें इसकी घोषणा भी कर दें।

इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रसोई गैस पर प्रति सिलेंडर कर में 16 रुपए की कटौती कर दी है। उन्होंने कहा कि मूल्य वृद्धि के केंद्र के फैसले से उन्हें तकलीफ हुई है, इसलिए वे सरकार से इसे वापस लेने की मांग करेंगी।

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