Monday, 20 June 2011

'बम का बदला बम' और ले ली 68 मासूमों की जान


पंचकुला (हरियाणा) ।। समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट कांड जिस थिअरी के तहत हुआ था वह 'बम का बदला बम' का सिद्धांत था। इस सिद्धांत को प्रतिपादित किया था स्वामी असीमानंद ने। मजहबी हिंसा के विचार ने असीमानंद को इतना वहशी बना दिया कि उसने 68 मासूम लोगों की जान ले ली। यह बात राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 2007 के समझौता एक्सप्रेस विस्फोट कांड में दाखिल चार्जशीट में कही है। 

करीब 4 साल की जांच के बाद एनआईए ने 2007 के समझौता एक्सप्रेस विस्फोट कांड में सोमवार को स्वामी असीमानंद और 5 अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। 

एनआईए इस मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की भूमिका की भी जांच कर रही है। उसने कहा कि प्रज्ञा को इस मामले में शीघ ही गिरफ्तार किया जा सकता है। 

विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट में एनआईए ने असीमानंद, सुनील जोशी, लोकेश शर्मा, संदीप डांगे और रामचंद्र, कलासांगरा उर्फ रामजी पर समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट करने के लिए षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है। एक आरोपी सुनील जोशी की मौत हो चुकी है। 

गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में 18 फरवरी 2007 को हुए ब्लास्ट में 68 व्यक्ति मारे गए थे। मरने वालों में ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे। 

इस कांड में रामचंद्र, कलासांगरा और संदीप डांग को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है, जबकि असीमानंद और शर्मा पहले ही अंबाला जेल में न्यायिक हिरासत में है। 

एनआईए की जांच के मुताबिक, असीमानंद गुजरात के अक्षरधाम मंदिर, जम्मू के रघुनाथ मंदिर और वाराणसी स्थित संकट मोचन मंदिर में हुए आतंकवादी हमलों को लेकर बहुत व्यथित था। 

चार्जशीट में कहा गया है कि वह (असीमानंद) सुनील जोशी और अन्य सहयोगियों के साथ बातचीत करते समय अपना (उग्र) विचार व्यक्त करता था। समय बीतने के साथ ही इन लोगों के अंदर न सिर्फ 'जिहादी' आतंकवादियों बल्कि पूरे अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति बदले की भावना आ गई। 

चार्जशीट में कहा गया है कि असीमानंद ने 'बम का बदला बम' का सिद्धांत प्रतिपादित किया। 

समझौता ट्रेन का चयन इसलिए किया गया, क्योंकि इसमें यात्रा करने वाले ज्यादातर यात्री पाकिस्तानी नागरिक होते हैं। ब्लास्ट को अंजाम देने वाले आतंकी ग्रुप को असीमानंद ने फाइनैंशल मदद और साजो-सामान मुहैया कराया। साथ ही उसने इस आतंकवादी कार्रवाई को अंजाम देने वाले अपने साथियों को उकसाने में भी अहम भूमिका निभाई। 

एनआईए के वकील अहमद खान ने अदालत के बाहर पत्रकारों से कहा कि आईपीसी और रेलवे अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल किया गया है।
NBT News

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