Thursday, 30 June 2011

मैं कमजोर प्रधानमंत्री नहीं हूं: मनमोहन सिंह

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ने देश के प्रमुख संपादकों से बातचीत करने हुए कहा बुधवार को उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि वे कमजोर प्रधानमंत्री हैं। यह जानकारी बुधवार को प्रधानमंत्री के साथ बैठक में शामिल होने वाले एक सम्पादक ने दी।

'दिव्य मराठी' के सम्पादक कुमार केतकर के मुताबिक प्रधामंत्री ने ऐसी बातों को 'विपक्ष का चतुर प्रचार' करार दिया।

केतकर के मुताबिक मनमोहन सिंह ने कहा, "मुझे सोनिया गांधी से अधिकतम सहयोग मिला है, जो कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर बेहतरीन कार्य कर रही हैं।"

महत्वपूर्ण मसलों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर बार-बार उठते सवालों के बीच बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पांच सम्पादकों के साथ बातचीत की। इस दौरान उन्होंने लोकपाल विधेयक, बाबा रामदेव के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई तथा राहुल गांधी सहित विभिन्न मुद्दों पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए।

बैठक के बाद प्रधानमंत्री आवास के बाहर 'नई दुनिया' के सम्पादक आलोक मेहता और 'दिव्य मराठी' के सम्पादक कुमार केतकर ने इस बैठक के बारे में मीडिया को जानकारी दी।

'नई दुनिया' के सम्पादक आलोक मेहता ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं लोकपाल के दायरे में आने को तैयार हूं लेकिन आखिरी फैसला मेरे मंत्रिमंडलीय सहयोगी लेंगे।" प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और योग गुरु बाबा रामदेव से सम्पर्क करने की पहल की थी।

अन्ना हजारे के नेतृत्व में सामाजिक संगठन प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को सम्पादकों के समूह के साथ बातचीत में यह भी कहा कि मंत्रिमंडल में जल्द ही फेरबदल किया जाएगा लेकिन उन्होंने इसकी तिथि नहीं बताई। उन्होंने कहा, "मैं आपको तारीख नहीं बता सकता लेकिन फेरबदल जल्दी ही किया जाएगा।"

प्रधानमंत्री सम्पादकों के साथ बातचीत के दौरान यह भी कहा कि उन्हें 'युवा नेतृत्व से परहेज नहीं है' लेकिन कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को यह जिम्मेदारी कब सौंपी जाएगी इसका फैसला सरकार और पार्टी करेगी।

केतकर के मुताबिक प्रधामंत्री ने कहा, "मुझे युवा नेतृत्व से परहेज नहीं है। लेकिन यह मेरा फैसला नहीं है। यह अभी पार्टी के एजेंडे या सरकार के एजेंडे में नहीं आया है।"

केतकर ने कहा, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बुधवार को सम्पादकों के साथ बैठक के दौरान विश्वास से भरपूर और प्रसन्न दिखाई दे रहे थे तथा उन्होंने हरेक प्रश्न का जवाब विस्तार से दिया।

दिल्ली के रामलीला मैदान में बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर की गई पुलिस कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने कहा, "दिल्ली के रामलीला मैदान में चार जून को योग गुरु बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर पुलिस कार्रवाई जरूरी हो गई थी क्योंकि अगले दिन समस्या पैदा हो सकती थी।"

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ 'कोई तनाव' नहीं है। यह बात उन्होंने बुधवार को सम्पादकों के साथ बातचीत के दौरान कही।

'दिव्य मराठी' अखबार के सम्पादक कुमार केतकर के मुताबिक सोनिया के साथ अपने सम्बंधों के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, "हम पूरी तरह बेबाक हैं और कोई तनाव नहीं है।" 

बैठक के बाद प्रधानमंत्री आवास के बाहर केतकर ने संवाददाताओं से कहा, "प्रधानमंत्री ने कहा कि वे यह नहीं जानते कि ऐसी धारणा क्यों बनी है कि सोनिया गांधी के साथ उनके अच्छे सम्बंध नहीं हैं।" 

चौतरफा घोटालों के आरोपों से घिरी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की धूमिल छवि फिर चमकाने के लिए इस बार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मोर्चा संभाला है। प्रधानमंत्री ने संपादकों के साथ बातचीत में जोर देकर कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री को लेकपाल के दायरे में लाने को लेकर व्यक्तिगत तौर पर कोई आपत्ति नहीं है। अपनी सरकार का पक्ष रखने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पांच वरिष्ठ संपादकों के साथ मुलाकात करीब दो घंटे चली।

प्रधानमंत्री ने मीडिया से शिकायत करते हुए कहा कि देश का मीडिया पुलिस, वकील और न्यायाधीश का काम कर रहा है। उनकी इस बात से मीडिया को लेकर नाराजगी सामने आई है।

आलोक मेहता ने बताया कि पूरी बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आड़े हाथों लेते नजर आए। प्रधानमंत्री ने भाजपा को असहयोगात्मक रवैया अपनाने वाला विपक्षी दल बताया।

प्रणव मुखर्जी की जासूसी को लेकर उन्होंने आईबी की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट ने जासूसी की बात को नकार दिया है।


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