योग गुरु बाबा रामदेव भ्रष्टाचार और कालेधन को लेकर आज सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में हजारों मां-बहन-बेटियों पर जिस तरह का अत्याचार किया गया, वैसा इतिहास में कभी नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला मैदान से वह इसलिए छुप कर भागे क्योंकि वह गीदड़ की मौत नहीं मरना चाहते थे।
मारना चाहती थी पुलिस
उन्होंने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी हत्या करने के लिए पुलिस को रामलीला मैदान भेजा गया था। रामदेव ने कहा कि पुलिस रामलीला मैदान मुझे गिरफ्तार करने नहीं आई थी। वह मेरी हत्या करनी चाहती थी। मैं इसके बारे में कोई साक्ष्य नहीं दूंगा क्योंकि मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित है।
अंतिम सांस तक लडूंगा
भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अभियान के बारे में योगगुरु ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरी मुहिम जारी रहेगी। सत्ताधारी दल द्वारा मीडिया के माध्यम से मुझ पर राजनीतिक दलों या संगठनों का मुखौटा होने का आरोप लगाया जा रहा है। मैं देश के 120 करोड़ लोगों का मुखौटा हूं। मेरा कोई दल नहीं है। मैं किसी भी राजनीतिक दल से सम्बंध नहीं रखता। मैं भ्रष्टाचार के विरुद्ध खड़े लोगों के साथ हूं चाहे वह किसी भी दल या सम्प्रदाय के हों।
कालेधन का मुद्दा नहीं छोड़ा
उन्होंने इस प्रश्न का उत्तर भी नहीं दिया कि क्या प्रभावी लोकपाल के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के 16 अगस्त से शुरू होने वाले अनशन में वह भी शामिल होंगे। बाबा ने कहा कि जो लोग उनके नौ दिन के अनशन को लेकर उनकी और योग की क्षमता पर प्रश्न उठा रहे हैं। वे पहले उनकी तरह एक लाख किलोमीटर की यात्रा करें और फिर नौ दिन का अनशन कर के दिखाए।
सिब्बल से वार्ता सार्वजनिक हो
बाबा रामदेव ने सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने का अध्यादेश लाने का आश्वासन दिया लेकिन बाद में वह इससे मुकर गए। उन्होंने मांग की कि सिब्बल और उनके बीच फोन पर हुई अंतिम बातचीत को सार्वजनिक किया जाए जिससे सच्चाई सबके सामने आ सके।
उन्होंने कहा कि जिस तरह उन्होंने अपने आश्रम की संपत्ति का खुलासा किया है उसी तरह सभी राजनीतिक दल अपने ट्रस्टों की संपत्ति का ब्योरा दें। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुखौटा होने के आरोपों के जवाब में उन्होंने कहा कि वह किसी दल या संगठन के प्रतिनिधि है।
राजबाला ठीक हो गई तो होगा चमत्कार
इसके पहले बाबा रामदवे ने जी.बी.पंत अस्पताल जाकर गुड़गांव की रहने वाली 51 वर्षीय राजबाला से मुलाकात की। राजबाला के स्वास्थ्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यदि वह ठीक हो जाती हैं तो यह एक चमत्कार से कम नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस यह कहती है कि उसने राजबाला को चोट नहीं पहुंचाई तो यह किसने किया। उन्हें जीवन रक्षक उपकरण पर रखा गया है।
भ्रष्टाचार और काला धन के मुद्दे पर बाबा रामदेव रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे थे। इस दौरान उनके साथ हजारों समर्थक भी मौजूद थे। पुलिस द्वारा चार जून की आधी रात को समर्थकों पर की गई कार्रवाई में कई लोग घायल हो गए थे, जिनमें राजबाला भी शामिल थी। गौरतलब है कि इस घटना के बाद बाबा रामदेव को दिल्ली छोड़ने और 15 दिनों तक शहर में न लौटने का निर्देश जारी किया गया था। रामदेव हरिद्वार जाकर 12 जून तक भूख हड़ताल पर बैठे थे।
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