लखनऊ। जिला जेल में डिप्टी सीएमओ डॉ. वाइएस सचान की हत्या हुई या उन्होंने खुदकुशी की। पुलिस इसका जवाब जानने की जरुरत नहीं समझ रही। शायद यही कारण है कि घटना के चार दिन बाद भी पुलिस ने प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की। पुलिस एक ही रट लगाए है कि न्यायिक जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के रवैये से क्षुब्ध डॉ. सचान के घर वालों ने अदालत का दरवाजा खटखटाने का मन बना लिया है।
डिप्टी सीएमओ डॉ. सचान की मौत के बाद उनके घर वालों ने डीजीपी समेत अन्य आला अफसरों को तहरीर भेज दी। शुक्रवार तक तक तहरीर न मिलने का दावा करने वाले अफसर अब स्वीकार रहे हैं कि उन्हें प्रार्थना पत्र मिल गया है, लेकिन एफआईआर दर्ज न करने के सवाल पर सभी ने न्यायिक जांच को ढाल बना रखा है। सवाल उठता है कि पुलिस आखिर प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज करने क्यों कतरा रही है। डॉ. सचान की रहस्यमयी मौत के मामले में रिपोर्ट दर्ज करने को लेकर उन्हें कैसा डर सता रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉ. सचान के शरीर पर नौ जख्म [आठ एंटी मार्टम इंजरी व एक पोस्टमार्टम इंजरी] आने के बाद भी आखिर पुलिस क्या साबित करना चाह रही है। इन सवालों को लेकर पुलिस अफसर किनारा करते नजर आ रहे हैं और डॉ. सचान की मौत का रहस्य बरकार है।
एक वरिष्ठ अधिकारी का तर्क है कि जेल में किसी भी बंदी की मौत के बाद न्यायिक जांच होती है, लेकिन मामला खुदकुशी और हत्या के बीच उलझा है। यदि पुलिस खुदकुशी मान रही, तब भी संज्ञेय धारा में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। आइजी सुवेश कुमार का कहना है कि डॉ. सचान के घर वालों की ओर से तहरीर मिल गई है, लेकिन न्यायिक जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। डीआईजी डीके ठाकुर भी यही बात दोहरा रहे हैं। जबकि पूर्व अधिकारी व अधिवक्ता कहते हैं कि किसी संज्ञेय अपराध के बाद रिपोर्ट दर्ज कराना हर किसी का अधिकार और कार्रवाई करना पुलिस का कर्तव्य है।
ये तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश है
सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर विजय शंकर बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक कोई भी व्यक्ति संज्ञेय अपराध के मामले में रिपोर्ट दर्ज करा सकता है। यदि कोई व्यक्ति किसी मामले में पुलिस को प्रथम सूचना दे रहा है तो उसे दर्ज कर आगे की तफ्तीश करनी चाहिए।
रिपोर्ट तो दर्ज होनी ही चाहिए
पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता कहते हैं कि सीआरपीसी की धारा 154 में साफ तौर पर प्राविधान है कि किसी भी संज्ञेय अपराध की रिपोर्ट पुलिस अवश्य दर्ज करे। डॉ. सचान की मौत के मामले में उनका कहना है कि पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने के बाद विवेचना में यह स्पष्ट कर सकती है कि मामला हत्या का है या खुदकुशी का।
ये तो प्राविधान है
अपराध मामलों के विशेषज्ञ वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद कुमार शाही कहते हैं कि यह तो सीआरपीसी में प्राविधान है कि पुलिस किसी भी संज्ञेय अपराध की प्रथम सूचना दर्ज करे। यदि थाने पर सुनवाई नहीं होती तो सूचना देने वाला वरिष्ठ अधिकारियों से मुकदमा दर्ज करने को लेकर बात कर सकता है।
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