प्रणव ने किया था समर्थन : चिट्ठी में कहा गया है कि प्रणव 2001 में लोकपाल पर बनी स्टैंडिंग कमिटी के मुखिया थे। उस वक्त उन्होंने पीएम को लोकपाल के दायरे में लाए जाने की सिफारिश की थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने इस पर रजामंदी जताई थी। सिविल सोसायटी के मेंबर अरविंद केजरीवाल ने बताया कि पहले पीएम ने खुद कहा था कि लोकपाल के दायरे में होने से उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन उनके मंत्री अब कुछ और कह रहे हैं। पत्र में कहा गया कि सरकार को प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने के लिये संविधान और भ्रष्टाचार निरोधी कानून में बदलाव करना होगा। उसे पीएम को वैसी ही छूट देनी होगी जैसी राष्ट्रपति को मिलती है।
तो हो सकती थी सीबीआई जांच : सिविल सोसायटी ने कहा कि इस मामले में मार्च, 2011 के बाद ऐसा क्या हुआ कि सरकार ने यू टर्न ले लिया। वरना अब तक प्रधानमंत्री की सीबीआई जांच हो सकती थी। मेंबरों ने पूछा है, 'आखिरकार आपके (मनमोहन सिंह) जैसा ईमानदार प्रधानमंत्री स्वतंत्र लोकपाल की जांच के दायरे में आने से क्यों डर रहा है?'
NBT News
No comments:
Post a Comment