नई दिल्ली। अपने अनशन और मौन व्रत के बाद राष्ट्रीय राजधानी लौटे बाबा रामदेव ने रविवार को केंद्र सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए कहा कि इस सरकार में भ्रष्टाचार से लड़ने की इच्छाशक्ति नहीं है और जो भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे सरकार कुचल देती है।
योगगुरु ने सरकार से सवाल किया कि अगर उनके मुद्दे गलत थे तो उनसे बातचीत करने चार मंत्रियों को हवाई अड्डे क्यों भेजा गया। उन्होंने यह गंभीर आरोप लगाया कि रामलीला मैदान पर पुलिस कार्रवाई के दौरान उनकी महिला समर्थकों से दुष्कर्म की कोशिश की गई।
अपने और अपने समर्थकों पर पुलिस कार्रवाई के 21 दिन बाद राजधानी लौटे योगगुरु ने आज अपने तेवर बरकरार रखते हुए सरकार पर कई नए आरोप लगाए, लेकिन अपनी आगे की रणनीति का साफ तौर पर खुलासा नहीं किया। उन्होंने सिर्फ यही कहा कि वह एक जुलाई से हरिद्वार में नि:शुल्क आवासीय शिविर लगाएंगे और चार अगस्त ने ग्राम स्वावलंबन योजना शुरू करेंगे, जिसके तहत 624 गांवों को आदर्श ग्राम बनाया जाएगा।
रामदेव ने उनके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भाजपा का मुखौटा होने के आरोपों का खंडन कर दिया, लेकिन लोकपाल के मुद्दे पर गांधीवादी अन्ना हजारे द्वारा 16 अगस्त से प्रस्तावित अनशन से जुड़ने के बारे में पूछे गए सवालों के सीधे जवाब टाल गए।
उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के साथ फोन पर चार जून को हुई उनकी बातचीत के विवरण सार्वजनिक करने की भी मांग की।
रामदेव ने कहा, 'यह सरकार पहले भ्रष्टाचारी थी लेकिन अब यह अत्याचारी हो गई है। हमने जनहित में मुद्दे उठाए थे जिन्हें दरकिनार कर दिया गया। इस सरकार में भ्रष्टाचार से लड़ने की इच्छाशक्ति नहीं है। जो भी भ्रष्टाचार-कालाधन के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे सरकार कुचल देती है और षड्यंत्र करती है।'
रामदेव ने पुलिस कार्रवाई में गंभीर रूप से घायल हुई अपनी एक समर्थक राजबाला से जी बी पंत अस्पताल में मुलाकात करने के बाद संवाददाता सम्मेलन किया। उन्होंने एक दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया कि देश में अब तक जनता ने कुल 200 लाख करोड़ का कर दिया है। सरकार को बताना चाहिए कि इस 200 लाख करोड़ रुपये का खर्च कहां-कहां हुआ।
दिल्ली लौटने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'दिल्ली आने के लिए मैंने आज का दिन इसलिए चुना क्योंकि इन्हीं दिनों आपातकाल लागू हुआ था। अब मैं देश के हालात को अघोषित आपातकाल मानता हूं। चार जून की रात की घटना यह इशारा करती है कि कहीं सरकार और सरकार द्वारा पोषित लोगों का ही कालाधन विदेशों में जमा तो नहीं है। शायद यही कारण है कि हमारे आंदोलन को चार जून को कुचल दिया गया।'
रामदेव ने कहा, 'यदि कालाधन को वापस लाने का मुद्दा गलत था, यदि हमारा आंदोलन अलोकतांत्रिक था और यदि मैं सांप्रदायिक हूं तो हमसे संवाद क्यों किया गया। प्रधानमंत्री ने मुझे पत्र क्यों लिखा।' योगगुरु ने कहा कि उनके और उनके समर्थकों पर हुई कार्रवाई लोकतंत्र की हत्या थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वहां अनशन के लिए आई उनकी महिला समर्थकों के साथ पुलिस कार्रवाई के दौरान शराब के नशे में धुत लोगों ने बदतमीजी की, उन्हें पकड़ा और उनसे दुष्कर्म की कोशिश की गई।
रामदेव ने केंद्रीय मंत्री सिब्बल को वस्तुत: चुनौती देते हुए कहा, 'सरकार मेरे फोन टैप कर रही थी। मैं चाहता हूं कि चार जून को मेरी सिब्बल से हुई बातचीत का टेप सार्वजनिक किए जाएं। उस टेप में सिब्बल ने कालाधन को वैधानिक तरीके से राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने सहित अन्य आश्वसान दिए थे।' बहरहाल, इस मुद्दे पर एक अन्य कार्यक्रम के इतर जब सिब्बल से प्रतिक्रिया मांगी गई तो मंत्री ने संवाददाताओं के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।
रामदेव ने रामलीला मैदान से 'भाग निकलने' के आरोपों के बारे में कहा कि चार जून की रात को वह गिरफ्तारी देना चाहते थे लेकिन पुलिस का इरादा उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय रास्ते से हटाने का था। योगगुरु ने कहा, 'मुझे गीदड़ की मौत नहीं मरना था। मुझे केंद्र की कठपुतली बनी पुलिस के हाथों ने नहीं मरना था, इसलिए मैं वहां से निकल गया। पुलिस ने वहां बंद पंडाल में आंसू गैस के गोले दागे और बर्बर कार्रवाई की।'
उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बिना कहा, 'क्या देश में एक ही पार्टी के लोगों को रहने का हक है। क्या दिल्ली में सिर्फ एक ही पार्टी के लोग आ सकते हैं। ..यह कैसा लोकतंत्र है।' उन्होंने रामलीला मैदान पर आतंकी हमला हो सकने की आशंका संबंधी केंद्र के दावों को भी खारिज कर दिया। नौ दिन बाद अनशन तोड़ने से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा, ''मुझसे मुरारी बापू और श्री श्री रविशंकर सहित अखाड़ों के संतों ने अनुरोध किया था, इसलिए मैंने अनशन तोड़ा। मैंने अनशन इसलिए नहीं तोड़ा कि प्राण संकट में थे।'
योगगुरु ने उन पर आरएसएस या भाजपा का मुखौटा होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ''मैं किसी पार्टी या संगठन का मुखौटा नहीं हूं। मैं देश के 120 करोड़ लोगों को मुखौटा हूं।' लोकपाल के मुद्दे पर हजारे के प्रस्तावित अनशन के बारे में रामदेव ने कहा, 'जो भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएगा, हम उसके साथ खड़े होंगे। फिर चाहे वह किसी भी पार्टी या संगठन का हो।'
उन्होंने कहा कि सरकार के मसौदे में लोकपाल के दायरे में ट्रस्टों और गैर-सरकारी संगठनों के साथ ही प्रधानमंत्री और सांसदों को भी शामिल करने के प्रावधान किए जाते तो उन्हें खुशी होती। रामदेव ने उनके खिलाफ लगातार बयान देने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का नाम लिए बिना कहा, 'मुझे कुछ लोगों ने चोर, ठग और महाठग कहा। लेकिन मैं चुप रहा। मैं ऐसे गैर-जिम्मेदार लोगों की अशलील टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देकर अपनी जुबान गंदी नहीं करना चाहता।'
अपने करीबी आचार्य बालकृष्ण का पासपोर्ट फर्जी होने के आरोपों के बारे में योगगुरु ने कहा कि यह पासपोर्ट 1998 में बना और यह गैर-कानूनी नहीं है। कहा जा रहा है कि स्थानीय जांच अधिकारी ने पासपोर्ट बनने के दौरान गलत रिपोर्ट दी थी। ऐसा है तो यह प्रशासन की गलती है। इसमें बालकृष्ण की क्या गलती है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की भ्रष्टाचार और कालाधन के मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है।
कांग्रेस और सरकार में चुप्पी
बाबा रामदेव को लेकर कांग्रेस और सरकार अब पूरी तरह सतर्क हो गई है। रणनीति अब चुप रहने की है। आलम यह है कि कपिल सिब्बल सरीखे बेबाक नेता भी रामदेव की ओर से लगाए गए आरोपों के बाबत सवालों से दूर भागने लगे हैं। संकेत स्पष्ट है कि अन्ना के मामले में उलझी सरकार कोई बयान देकर फिर से रामदेव की उलझन में फंसना नहीं चाहती है।
संयोग ही था कि कांस्टीट्यूशन क्लब परिसर से बाबा निकले और उसी परिसर में एक सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा लेने सिब्बल पहुंचे। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों ने रामदेव के बाबत सिब्बल से सवाल पूछने की कोशिश की। लेकिन सतर्क सिब्बल रामदेव का नाम सुनने से पहले ही पत्रकारों की भीड़ से पीछा छुड़ाकर अपनी गाड़ी में जा बैठे। पत्रकार उनके पीछे भागते रहे लेकिन वह कुछ नहीं बोले। सिब्बल सरीखे नेता का यह अस्वाभाविक व्यवहार था। रविवार को कांग्रेस की ओर से किसी प्रवक्ता ने भी कोई बयान नहीं दिया। जवाब देने राशिद अल्वी आए और उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि सरकार हर पांच साल में जनता को जवाब देती है। जाहिर है कि लोकपाल के मुद्दे पर टीम अन्ना से छिड़ी जंग के बीच सरकार और कांग्रेस रामदेव को फिर से कोई मौका देना नहीं चाहती हैं।
Jagran News
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