नई दिल्ली।। लोकपाल कानून को लेकर सिविल सोसायटी और सरकार के बीच जबर्दस्त टकराव के आसार दिख रहे हैं। एक तरफ अन्ना सरकार को सबक सिखाने के लिए 16 अगस्त से अनशन पर बैठने की जिद पकड़े हुए हैं, वहीं दूसरी ओर दिग्विजय सिंह ने कहा है कि अन्ना अनशन पर बैठ कर तो देखें, उनका वही हाल होगा जो रामदेव का हुआ।
बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार के मन में बेईमानी है। वह सख्त लोकपाल के पक्ष में ही नहीं है। उन्होंने समानांतर सरकार बनाने की कोशिश करने के सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और सीवीसी के स्वतंत्र और स्वायत्त होने के मायने क्या देश में समानांतर सरकार चलना है।
अन्ना ने तो यहां तक कहा कि आज की तारीख में आंतकवाद से ज्यादा खतरनाक करप्शन है।
अन्ना ने केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल पर देश की जनता को 'गुमराह' करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमारे लोकपाल ड्राफ्ट में ऐसा कोई जिक्र नहीं है कि प्रस्तावित जांच निकाय को जीडीपी का 1 फीसदी बजट आवंटित किया जाए।
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अन्ना हजारे ने आज एकबार फिर घोषणा की कि हम 16 अगस्त से आंदोलन करेंगे और यह आंदोलन अप्रैल में हुए आंदोलन से कहीं बड़ा होगा। यह आजादी की दूसरी लड़ाई होगी। अगर सरकार ने हमें जंतर-मंतर पर जाने की इजाजत नहीं दी, तो हम लाठियां खाएंगे, गिरफ्तारियां देंगे और जेल जाएंगे, लेकिन आंदोलन जरूर होगा।
इस सवाल पर कि उनके प्रस्तावित आंदोलन को भी बाबा रामदेव के आंदोलन की तरह ही सरकार द्वारा कुचल देने की स्थिति में क्या होगा? हजारे ने कहा कि हम ऐसी किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। हम गोलियां खाने को भी तैयार हैं।
दूसरी ओर, कांगेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अन्ना हजारे को गांधीवादी और बुजुर्ग नेता बताते हुए कहा कि उनके समर्थक उन्हें 'चने की झाड़' पर चढ़ाकर अनशन पर बैठा देते हैं, जबकि उम्र को देखते हुए उनका अनशन पर बैठना ठीक नहीं है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि अन्ना हजारे यदि नई दिल्ली में अनशन पर बैठते हैं, तो उनके साथ भी वही सलूक किया जाएगा, जो उस वक्त की परिस्थितयों में किया जा सकता है।
बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार के मन में बेईमानी है। वह सख्त लोकपाल के पक्ष में ही नहीं है। उन्होंने समानांतर सरकार बनाने की कोशिश करने के सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और सीवीसी के स्वतंत्र और स्वायत्त होने के मायने क्या देश में समानांतर सरकार चलना है।
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इस सवाल पर कि उनके प्रस्तावित आंदोलन को भी बाबा रामदेव के आंदोलन की तरह ही सरकार द्वारा कुचल देने की स्थिति में क्या होगा? हजारे ने कहा कि हम ऐसी किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। हम गोलियां खाने को भी तैयार हैं।
दूसरी ओर, कांगेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अन्ना हजारे को गांधीवादी और बुजुर्ग नेता बताते हुए कहा कि उनके समर्थक उन्हें 'चने की झाड़' पर चढ़ाकर अनशन पर बैठा देते हैं, जबकि उम्र को देखते हुए उनका अनशन पर बैठना ठीक नहीं है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि अन्ना हजारे यदि नई दिल्ली में अनशन पर बैठते हैं, तो उनके साथ भी वही सलूक किया जाएगा, जो उस वक्त की परिस्थितयों में किया जा सकता है।
NBT News
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