अमरोहा (ज्योतिबाफूलेनगर)। जिले में पौधारोपण के नाम पर सरकारी खजाने से लूट-खसोट की जा रही है। बीते साल एक करोड़ 87 लाख रुपये पौधारोपण के नाम पर खर्च कर दिए गए, लेकिन हकीकत में प्रगति शून्य है। वहीं इस वर्ष भी तीन करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर दिया गया। सबसे ज्यादा गोलमाल हसनपुर व धनौरा रेंज में किया गया है। जबकि अमरोहा रेंज में पौधारोपण के लिए जमीन उपलब्ध न होना बताया जा रहा है।
वन विभाग प्रतिवर्ष जुलाई में पौधारोपण करता है। जिले की तीन रेंज हसनपुर, मंडी धनौरा व अमरोहा में पौधारोपण के नाम पर सरकारी खजाने से हर साल लाखों रुपये अवमुक्त किए जाते हैं। बीते साल भी वन विभाग को पौधारोपण के लिए एक करोड़ 87 लाख रुपये अवमुक्त किए गए थे। हालांकि अमरोहा रेंज में तो यह दावा किया जा रहा है कि पौधारोपण के लिए यहां पर जमीन ही उपलब्ध नहीं है। लेकिन फिर भी हर साल यहां के लिए पैसा अवमुक्त किया जाता है। रही बात हसनपुर व मंडी धनौरा रेंज की तो इन दोनों रेंजों में विभागीय अधिकारियों ने पौधारोपण के नाम पर सरकारी खजाने में बड़े पैमाने पर सेंध लगाई है। बताते हैं कि बीते साल पौधारोपण के लिए अवमुक्त किया गया एक करोड़ 87 लाख रुपये इन दोनों रेंजों में ही बांटा गया था लेकिन पौधारोपण की हकीकत यह है कि बीते साल लगाया गया एक भी पौधा जीवित नहीं है। यानि एक करोड़ 97 लाख रुपये की रकम से मामूली तौर पर पौधों की रोपाई की गई की। जो देखरेख के अभाव में दम तोड़ गए। हैरत की बात तो यह है कि सरकारी खजाने से पौधारोपण के लिए मिलने वाले इस पैसे के खर्च का ब्यौरा सिर्फ कागजों पर है, लेकिन जमीनी हकीकत जानने की कोशिश जिले के किसी आला अफसर ने आज तक नहीं की है। मजे की बात तो यह है कि वन विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में पौधारोपण के लिए तीन करोड़ रुपये के प्रस्ताव बनाकर भेज दिए। हालांकि अभी तीनों रेंजों के लिए बने इन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन मंजूरी मिलने के बाद पौधारोपण के लिए मिलने वाली भारी-भरकम धनराशि में फिर से खेल होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
Jagran News
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