अपने अनशन के दौरान सियासी दलों से दूरी बनाए रखने वाली टीम अन्ना ने लोकपाल विधेयक पर समर्थन जुटाने के लिए अब उन्हीं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इस सिलसिले में टीम अन्ना ने शुक्रवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की। हालांकि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने पर वह भाजपा का रुख नहीं जान सकी। इस बीच, गांधीवादी अन्ना हजारे ने सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जन लोकपाल के जरिए बिना जवाबदेही वाली 'समानांतर सरकार' बनाने की उनकी कोई मंशा नहीं है।
मूलभूत ढांचे से खिलवाड़
गौरतलब है कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने इससे पहले रांची में कहा था कि हजारे जन लोकपाल बिल के जरिए बिना जवाबदेही वाली समानांतर सरकार बनाना चाहते हैं और संविधान के मूलभूत ढांचे से खिलवाड़ करना चाहते हैं। अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों और सिविल सोसायटी की ओर से तैयार दोनों मसौदे को राजनीतिक दलों के सामने रखा जाएगा। हम उनसे जानना चाहेंगे कि आखिर हमारे मसौदे में कौन सी बात संविधान के खिलाफ है और हमारे ड्राफ्ट में समानांतर सरकार बनाने की कोशिश कहां की गई है।
आडवाणी से मुलाकात
अन्ना की टीम में शामिल अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पूर्व आईपीएस अफसर किरण बेदी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी से मुलाकात की। उन्होंने आडवाणी को दोनों मसौदों के बीच के अंतर के बारे में बताया और अपना पक्ष रखा। इसके जवाब में आडवाणी की ओर से सिर्फ इतना कहा गया कि पार्टी ने इस पर अभी अपना कोई मत नहीं बनाया है। सूत्रों का कहना है कि आडवाणी ने टीम अन्ना की ओर से बनाए गए मसौदे की कुछ खामियों का भी जिक्र किया।
सरकार अपनी बात रखे
टीम अन्ना को यह भी बताया गया कि भाजपा 3 जुलाई को सर्वदलीय बैठक के दौरान अपना स्पष्ट रुख लेकर सरकार के पास जाएगी लेकिन वह अपना पक्ष तभी रखेगी जब सरकार अपनी बात रखे। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली के दिल्ली से बाहर होने के कारण अन्ना हजारे की टीम की उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।
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Saturday, 25 June 2011
समर्थन जुटा रहे हैं अन्ना हजारे
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