Saturday, 18 June 2011

पीएम भी होंगे दायरे में

प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग पर ना-नुकुर के बाद सरकार कुछ शर्तों के साथ यह पद लोकपाल के दायरे में शामिल करने को तैयार है। हालांकि उच्च न्यायपालिका को फिलहाल लोकपाल के दायरे से बाहर रखा जाएगा। संसद के भीतर सांसदों के आचरण को भी लोकपाल के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है। इन प्रावधानों के साथ अपना मसौदा सरकार संयुक्त मसौदा समिति की 20 जून को होने वाली बैठक में रखने वाली है।

केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार,  मसौदा तैयार करने के सिलसिले में शुक्रवार को वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मसौदा समिति में शामिल मंत्रियों के साथ बैठक कर विचार-विमर्श किया। सूत्रों के अनुसार, सरकार जो मसौदा तैयार करेगी उसमें तीन तरह की शर्तो के साथ प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे में शामिल किया जाएगा। 
पहली शर्त यह होगी कि देश की सुरक्षा, सेना, खुफिया तंत्र, परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मामलों में लोकपाल पीएम पर सवाल नहीं उठा सकेगा। ऐसे मामलों में न तो पीएम के खिलाफ कोई शिकायत होगी और न ही लोकपाल जांच सकेगा।

दूसरे, लोकपाल को यह अधिकार होगा कि जैसे ही वह किसी मंत्री या अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच शुरू करेगा तो उसे काम से हटा सकता है। लेकिन पीएम के मामले में यह अधिकार उसे नहीं होगा। तीसरे, पीएम से संबंधित शिकायतों के मामले में लोकपाल किन परिस्थितियों में कदम उठा सकता है, इसके लिए कुछ नियम तय होंगे।

घोटालों ने लाया बचाव की मुद्रा में :खुर्शीद
नई दिल्ली (हि.टी.)

केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने शुक्रवार को कहा कि एक के बाद एक घोटालों ने केंद्र सरकार को सिविल सोसायटी के समक्ष रक्षात्मक रुख अपनाने को विवश कर दिया।

'हिन्दुस्तान टाइम्स' के वरिष्ठ संपादकों के साथ बातचीत में खुर्शीद ने कहा, 'अगर 2जी और राष्ट्रमंडल खेलों में घोटाले नहीं हुए होते तो हम लोकपाल की मांग पर अलग रुख अपनाते। लेकिन घोटालों के कारण हमें रक्षात्मक होना पड़ा।' 

खुर्शीद ने माना कि सरकार को अन्ना हजारे और बाबा रामदेव से निपटने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने सिविल सोसायटी सदस्यों पर संवैधानिक संस्थाओं को नजरंदाज करने और 'समानान्तर सरकार' चलाने के प्रयास करने का भी आरोप लगाया।

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