अन्ना हजारे ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि देश में निर्वाचन आयोग है और सरकार उसके क्रियाकलापों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। देश में सर्वोच्च न्यायालय है और सूचना का अधिकार है। सरकार इनमें भी हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि ठीक इसी तरह लोकपाल भी होना चाहिए, जिसमें सरकारी हस्तक्षेप न हो। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों की ओर से पेश मसौदे पर सरकार की ओर से किए जा रहे दावे जनता को गुमराह करने वाले हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून बनाने के मसले पर केंद्र सरकार के रवैये को उदासीन करार देते हुए हजारे ने कहा कि 16 अगस्त से वह फिर से जंतर-मंतर पर अनशन करेंगे, यह अनशन उनके पिछले अनशन से भी बड़ा होगा। अन्ना हजारे ने कहा कि देश से भ्रष्टाचार को मिटाने को लेकर केंद्र सरकार का रवैया उदासीन है। इसलिए हमारी ओर से सुझाए गए बिन्दुओं पर वह देश को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच ?यूरो (सीबीआई) को लोकपाल के दायरे में लाना देश से भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार के कितने ही मामलों की जांच की लेकिन आजादी के बाद कितने मंत्री जेल गए। ऐसा इसलिए है क्योंकि सीबीआई पर सरकार का नियंत्रण है। इसलिए भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्री जेल जाने से बच जाते हैं। अन्ना हजारे ने कहा कि यही वजह है कि सीबीआई को लोपकाल के दायरे में लाया जाना चाहिए। यही हम मांग भी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पेश लोकपाल विधेयक के मसौदे में आम आदमी के लिए कुछ नहीं है। सरकार क्यों नीचे से लेकर ऊपर के अधिकारियों को इस विधेयक के दायरे में लाने से कतरा रही है। भ्रष्टाचार की मार तो सबसे अधिक निचले स्तर पर ही है। राशन कार्ड बनवाने से लेकर अन्य छोटे मोटे कामों के लिए लोगों को हजार चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि पिछली बार जब मैं जंतर-मंतर पर धरने पर बैठा था तो सरकार ने सिर्फ समय निकालने के लिए हमारी मांगे मानी थी। लेकिन बाद में वह पलट गई। इस बार 16 अगस्त को मैं फिर से अनशन पर बैठूंगा।
A.U. News
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