नई दिल्ली। भाजपा ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह कौन सी अनिश्चितता की स्थिति में काम कर रहे हैं। भाजपा ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक [कैग] की सिंह द्वारा आलोचना किए जाने की भी निंदा की।
भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लंबे समय तक 'साइलेंट मोड' में रहे। जब बुधवार को संपादकों के एक समूह के साथ बातचीत में उन्होंने अपनी बात रखी तो कहा कि भ्रष्टाचार के मामले अपवाद हैं। नीतिगत निर्णयों और उनके कार्यान्वयन के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि संप्रग सरकार कई बार 'अनिश्चितता की स्थिति' में होती है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रधानमंत्री से सवाल करती है कि जब 2 जी स्पेक्ट्रम और राष्ट्रमंडल खेल आयोजन घोटाला हुआ और जब केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के पद पर पीजे थामस की नियुक्ति की गई तो वह कौन सी अनिश्चितता की स्थिति के दबाव में थे। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की प्रधानमंत्री बनने की काबिलियत संबंधी कांग्रेसी नेताओं की टिप्पणियों पर सिंह की प्रतिक्रिया की भी भाजपा ने आलोचना की।
प्रसाद ने कहा कि सात वर्ष प्रधानमंत्री पद पर रहने के बाद भी सिंह को यह कहना पड़ रहा है कि उन्हें कांग्रेस आलाकमान की ओर से अभी यह नहीं कहा गया है कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद सौंप दिया जाना चाहिए। इस तरह की टिप्पणी भारत जैसे बड़े देश के प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी में हो रही राजनीति की दयनीय दशा को दर्शाती है। प्रसाद ने कहा कि अक्सर खामोश रहने वाले प्रधानमंत्री ने विपक्ष की आलोचना की। सिंह ने मीडिया और कैग को भी आड़े हाथ लिया।
भाजपा प्रवक्ता ने कटाक्ष किया कि यह देश सिंह का शुक्रगुजार है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बख्श दिया। प्रसाद ने कहा कि कैग द्वारा नीतिगत मुद्दों पर टिप्पणी करने पर सिंह का सवाल उठाना भी उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी प्रधानमंत्री ने कैग के खिलाफ टिप्पणी की है। सिंह लंबे समय तक नौकरशाह रहे, पांच वर्ष वित्त मंत्री रहे और अब सात वर्ष से प्रधानमंत्री हैं। उन्हें मालूम होना चाहिए कि कैग को नीतिगत मुद्दों पर गौर करने का अधिकार है। कैग ने 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन की नीति संबंधी जो टिप्पणियां की हैं, उसे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही सीबीआई जांच में भी सही पाया गया है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कैग पर प्रधानमंत्री द्वारा सवाल खड़े करना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सरकार की शासन करने की शुचिता तथा ईमानदारी पर सवाल खड़े करता है। 2जी घोटाले और राजा के मुद्दे पर प्रसाद ने कहा कि दो नवंबर 2007 को प्रधानमंत्री द्वारा पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए जाने के बावजूद तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने सिंह की बात नहीं मानी। हम सिंह से सवाल करते हैं कि आखिर ऐसी कौन सी अनिश्चितता की स्थिति थी कि राजा के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
भाजपा प्रवक्ता ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री पर अनिश्चितता की स्थिति का आखिर ऐसा कौन सा दबाव था कि उन्होंने 2जी लाइसेंस की नीति के संबंध में वित्त और दूरसंचार मंत्रालय के वरिष्ठ नौकरशाहों की आपत्तियों पर गौर नहीं किया और सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने के बाद भी राजा को बेकसूर करार दिया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में अनियमितताओं के मामले में शुंगलू समिति की रिपोर्ट में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सहित वरिष्ठ नौकरशाहों की भूमिका पर सवाल उठने के बाद भी कौन सी अनिश्चितता की स्थिति के दबाव में प्रधानमंत्री रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
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