भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने आमरण अनशन के तीसरे दिन जंतरमंतर पर हजारों समर्थकों से घिरे प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे ने महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के नारे को बुलंद कर संदेश दिया कि सरकार उनके रुख में नरमी की अपेक्षा न करे। अन्ना ने बृहस्पतिवार को अपने संबोधन से आजादी की लड़ाई की याद दिला दी। वहीं, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए जन लोकपाल के गठन संबंधी कानून बनाने की अन्ना की मांग को मिलते देशव्यापी जनसमर्थन के आगे केंद्र सरकार झुकती दिख रही है।
दो दौर की वार्ता, दो मुद्दों पर बिगड़ी बात
केंद्र सरकार बृहस्पतिवार को जन लोकपाल विधेयक का मसौदा बनाने वाली संयुक्त समिति में 50 फीसदी सरकार के लोगों और बाकी 50 फीसदी में नागरिक समाज की महत्वपूर्ण हस्तियों को शामिल करने पर राजी हो गई। लेकिन समिति के अध्यक्ष और इससे संबंधित अधिसूचना जारी करने के मसले पर समझौता अटक गया। अन्ना ने सरकार की ओर से अनौपचारिक कमेटी के गठन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती वह प्रदर्शन जारी रखेंगे। सरकार और सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश व अरविंद केजरीवाल के बीच बातचीत में गतिरोध की खबर के बाद जंतरमंतर पर बैठे अपने सैकड़ों समर्थकों से अन्ना ने कहा, 'मैं अपनी अंतिम सांस तक भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ता रहूंगा'।
समिति का अध्यक्ष नहीं बनना चाहते अन्ना
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से संवाद की पहल के बाद आज केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल की अग्निवेश और केजरीवाल से दो दौर की वार्ता हुई। बातचीत में समान भागीदारी से संयुक्त समिति बनाने पर सहमति बनी लेकिन इसका अध्यक्ष अन्ना को बनाने और इस मामले में अधिसूचना जारी करने के मसले पर समझौता नहीं हो पाया और तीसरे दौर की बातचीत शुक्रवार तक के लिए टाल दी गई। हालांकि सरकार का ही एक वर्ग इस मामले में अधिसूचना जारी करने करने पर सहमत होता दिख रहा है। नाम न छापने की शर्त पर एक केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस मामले में अधिसूचना जारी करने में कोई समस्या नहीं है। बातचीत बेनतीजा रहने के बाद सिब्बल ने कहा, सरकार अभी ही कमेटी के गठन के लिए तैयार है जबकि पहले दौर की बातचीत में उन्होंने कहा था कि सरकार 13 मई के बाद समिति के गठन पर राजी है। उन्होंने कहा कि संसद के मानसून सत्र में इस विधेयक को लाया जा सकता है। वहीं, अन्ना के साथ अपार जनसमर्थन से दबाव में आए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज देर रात सिब्बल से बातचीत की ताकि इसका समाधान निकाला जा सके। समझा जाता है कि सिब्बल ने उन्हें समाजसेवियों की दो मांगों से अवगत कराया। बैठक में कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर भी मौजूद थे।
फिर होगी सरकार और समाजसेवियों के बीच बातचीत
दूसरे दौर की वार्ता के बाद अग्निवेश ने कहा कि प्रस्तावित समिति में पांच सदस्य सरकार की ओर से और पांच नागरिक समाज से होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार हमारी मांगों पर सहमत है लेकिन अब भी दो मांगों पर गतिरोध बना हुआ है। वहीं, अन्ना के प्रशंसक उन्हें समिति का प्रमुख बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन उन्होंने इसका अध्यक्ष बनने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं के बीच ऐलान किया, 'मुझे अध्यक्ष पद नहीं चाहिए।' 72 वर्षीय गांधीवादी ने कहा कि अगर आप लोग चाहते हैं तो मैं समिति में सलाहकार या सदस्य की हैसियत से रह सकता हूं ताकि विधेयक का मसौदा तैयार होने की प्रक्रिया में जनहित का ध्यान रख सकूं। संयुक्त समिति के अध्यक्ष पद के मुद्दे पर केजरीवाल ने कहा कि अन्ना अध्यक्ष पद नहीं चाहते थे लेकिन उनके समर्थक ऐसा चाहते थे। इससे पहले उन्होंने कहा था कि अन्ना किसी सेवानिवृत्त जज को संयुक्त समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त करना चाहते हैं।
सोनिया ने अन्ना से की उपवास तोड़ने की गुजारिश
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बृहस्पतिवार को अन्ना हजारे से गुजारिश की कि वह अपना आमरण अनशन खत्म कर दें। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए सरकार का दोहरा नजरिया कतई नहीं है। उन्होंने हजारे को यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार उनके विचारों पर पूरी तरह गौर करेगी। इस अपील के बाद हजारे ने सोनिया गांधी के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि सोनिया यूपीए सरकार को लोकपाल विधेयक जल्द से जल्द पारित करने को कहें। सोनिया गांधी ने कहा कि वह अन्ना हजारे के आमरण अनशन से बेहद आहत हैं। उन्होंने जनता से जुड़े बेहद गंभीर मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे भ्रष्टाचार को लेकर हमारे विचार भी हजारे से अलग नहीं हैं और वह मानती हैं कि इन मामलों से निपटने के लिए प्रभावी और अपेक्षित नतीजे देने वाला कानून होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह हजारे से अपील करती हैं कि वह अपना आमरण अनशन खत्म कर दें। कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि सोनिया की ओर से जारी सार्वजनिक अपील इस बात का संकेत है कि वह हजारे की चिंताओं से सहमत हैं और इस बात पर भी राजी हैं कि भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए और कड़े कानून की जरूरत है।
आभार जताने के साथ ही उमा ने अन्ना को दी सलाह
भाजपा की फायरब्रांड नेता रहीं उमा भारती ने अन्ना हजारे के प्रति इस बात के लिए आभार जताया है कि उन्हें मंच से दूर रखने पर हजारे ने खेद प्रकट किया है। उमा ने कहा कि हालांकि इसकी जरूरत नहीं थी लेकिन अन्ना ने खेद जताकर अपना बड़प्पन दिखाया है। मध्य प्रदेश भवन में पत्रकारों से मुखातिब उमा ने कहा कि वह अन्ना के निजी सचिव के बुलावे पर बुधवार को धरनास्थल पर गई थीं लेकिन कुछ लोगों ने उनका विरोध किया। इस घटना के लिए अन्ना ने खेद प्रकट कर बड़प्पन दिखाया है। उन्होंने कहा कि वह उनके आंदोलन के साथ पूरी तरह से जुड़ी हैं लेकिन आंदोलन के मंच से राजनीतिज्ञों को दूर रखने की जगह बेहतर होगा कि राजनीति में जो ईमानदार हैं उन्हें अन्ना एकजुट करें। उनका आंदोलन तभी समग्र होगा जब राजनीति और नौकरशाही में मौजूद ईमानदार लोग भी भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट हों। यह प्रयोग जयप्रकाश नारायण ने भी अपने संपूर्ण क्रांति के दौरान किया था।
अजित सिंह ने अन्ना के आंदोलन का समर्थन किया
राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख अजित सिंह ने समाजसेवी अन्ना हजारे का समर्थन किया है जो देश में फैल रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए व्यापक लोकपाल विधेयक लाने की मांग को लेकर संसद भवन के निकट जंतरमंतर पर आमरण अनशन कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को अजित सिंह के दफ्तर की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि वह और उनकी पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का समर्थन करते हैं। मालूम हो कि बुधवार को गलती से मीडिया में यह खबर आई थी कि अन्ना समर्थकों ने अजित सिंह को धरनास्थल पर जाने से रोक दिया था। इस बारे में उनके दफ्तर ने बृहस्पतिवार को कहा कि अजित सिंह महाराष्ट्र के दौरे पर होने की वजह से धरनास्थल पर गए ही नहीं थे। मीडिया में आई खबर निराधार है।
प्रणब ने समझौते में तेजी लाने को कहा
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने स्विट्जरलैंड के आर्थिक मामलों के फेडरल काउंसिलर जोहान एन शेनिडर अमान से कहा है कि दोहरे कराधान से बचने के लिए पिछले साल अगस्त में दोनों देशों के बीच हुए समझौते को मंजूरी देने की प्रक्रिया में तेजी लाना जरूरी है। बृहस्पतिवार को अमान के साथ हुई मुलाकात में प्रणब ने कहा कि ऐसा करने से दोनों देशों के बीच एक संस्थागत व्यवस्था कायम हो जाएगी। बैठक में अमान ने वित्त मंत्री को दोहरे कराधान से बचने संबंधी समझौते की मंजूरी प्रक्रिया में तेजी लाने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए बैंकिंग और बीमा क्षेत्र को और खोलने की जरूरत है। गौरतलब है कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए वित्त मंत्री की अध्यक्षता में मंत्री समूह (जीईओएम) का गठन भी किया गया है। जीईओएम के एजेंडे में कालेधन को विदेशों से वापस लाने की प्रक्रिया पर विचार विमर्श करना है। विदेशी बैंकों में जमा कालाधन के बारे में जानकारी हासिल करना और इसकी रोकथाम का रास्ता तैयार करना भी जीईओएम की वरीयता सूची में है। लेकिन अभी तक जीईओएम से विशेष हल नहीं निकल सका है।
जिन तीन मुद्दों पर बनी सहमति
1. जन लोकपाल विधेयक का मसौदा बनाने वाली संयुक्तसमिति में 50 फीसदी सरकार के लोगों और बाकी 50 फीसदी में नागरिक समाज की महत्वपूर्ण हस्तियों को शामिल करने पर सहमति
2. मानसून सत्र में बिल पेश करने पर सरकार राजी
3. 13 मई से पहले कमेटी बनाने और उसकी बैठक बुलाने पर सरकार रजामंद
----------
जिन दो मुद्दों पर है गतिरोध
1. सरकार अन्ना को लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए प्रस्तावित संयुक्त समिति का अध्यक्ष बनाने पर राजी नहीं है
2. सरकार संयुक्तसमिति गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं करना चाहती है। अन्ना ने अनौपचारिक समिति गठन के प्रस्ताव को खारिज किया
------------
अन्ना के साथ भाजपा की सहानुभूति है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को यह समझना चाहिए कि भ्रष्टाचार को लेकर कितना असंतोष है। यही वह समय है जब हमें लोकपाल और लोकायुक्त चाहिए। --नितिन गडकरी, भाजपा अध्यक्ष
--
लोकपाल बिल के नए मसौदे के लिए सरकार को सभी राजनीतिक दलों, समाजसेवियों और संबंधित नागरिकों से विचार विमर्श करने के मकसद से जल्द से जल्द एक तंत्र बनाना चाहिए। -- माकपा पोलि
No comments:
Post a Comment