Tuesday, 21 June 2011

सुरक्षित नहीं महिलाओं व बच्चियों की आबरू

लखीमपुर, जिले में लचर कानून-व्यवस्था के चलते मजलूमों पर होने वाले जुर्म बढ़े हैं। निघासन कांड का मंजर इसका एक अकेला उदाहरण नहीं है। यहां हर महीने दो मासूम बालिकाएं दरिंदों की हवस का शिकार होती हैं। यह तो वे आंकड़े हैं जिन्हें पुलिस स्वीकार करती है। पुलिस के रिकार्ड में जो दर्ज है हकीकत की तस्वीर इससे कहीं ज्यादा भयावह है। तमाम लोग तो ऐसे भी हैं जो थोनों के चक्कर लगाते-लगाते थक कर बैठ जाते हैं और जुर्म को अपना भाग्य मानकर सब कुछ ईश्वर पर छोड़ देते हैं, लेकिन यह कुछ चंद उदाहरण पुलिस की स्थिति बयां करने को शायद पर्याप्त है।

निघासन थाना परिसर में मासूम सोनम जिसकी उम्र मात्र 13 वर्ष थी, दरिंदों ने थाने में उसके साथ दुराचार कर हत्या कर दी। पुलिस इस मामले में अभी तक दुराचार होना ही नहीं मानती है। यह केस अभी तक पुलिस रिकार्ड में दुराचार के रूप में दर्ज नहीं है। भले ही उसकी मां व भाई चिल्ला-चिल्ला कर दुराचार की बात कह रहे हों। तमाम राजनीतिक और सामाजिक संगठन, दुराचार को लेकर हो हल्ला कर रहे हैं, लेकिन अभी तक पुलिस ने नहीं माना कि यहां दुराचार हुआ है।

अब हम बात करते हैं पुलिस के पिछले रिकार्ड की। यह आंकड़े भी कम चौंकाने वाले नहीं हैं। मार्च से अभी तक आधा दर्जन दुराचार के मामले दर्ज हैं। इसमें भी खास बात यह है कि दरिंदगी की शिकार हुई महिलाओं में आधा दर्जन मामले दुराचार के हैं। इनमें चार बालिकाएं अवयस्क हैं। घटनाओं पर नजर डालें तो चौंकाने वाली ही नहीं मानवता को शर्मसार कर देने वाली भी है। 27 मार्च को थाना घरथनिया में एक सात वर्ष की बालिका के साथ दुराचार किया गया। इसमें गांव का ही युवक उत्तम कुमार अभियुक्त है। दूसरी घटना थाना फूलबेहड़ क्षेत्र के ग्राम पयाग की है। यहां मासूम अली की पत्‍‌नी के साथ गांव के ही एक व्यक्ति ने दुराचार किया। मामला दस जनवरी का है, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट ही नहीं लिखी, आखिर भुक्तभोगी महिला की गुहार पर न्यायालय के हस्तक्षेप से 28 अप्रैल को रिपोर्ट दर्ज की गई। 20 मई को थाना मितौली के दतेली गांव में एक नौ वर्ष की बालिका के साथ दुराचार हुआ। फिर 29 मई को थाना ईसानगर के गांव दुर्गापुर में 15 वर्षीय एक दलित किशोरी के साथ गांव के ही युवक ने दुराचार किया। इससे पहले 25 अप्रैल को थाना मैलानी के ग्राम हजरतपुर में एक भगत सिंह की पत्‍‌नी के साथ दो लोगों ने दुराचार किया। इसकी रिपोर्ट थाना मैलानी में दर्ज कराई गई और इसी महीने 16 जून को थाना ईसानगर के गांव पचासा में 14 वर्ष की एक बालिका दुराचार की शिकार हुई। यह वे आंकड़े हैं जो पुलिस रिकार्ड में दर्ज हैं। पुलिस ने मामलों की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है, लेकिन इन आंकड़ों से जिले की कानून व्यवस्था की स्थिति तो साफ हो ही जाती है। किसी घटना की रिपोर्ट लिखाना कितना कठिन कार्य है, यह भी किसी से छिपा नहीं। न जाने कितने ही पीड़ित थानों के चक्कर लगाते रहते हैं और पुलिसिया उत्पीड़न का शिकार होकर वापस लौटते रहते हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट नहीं लिखी जाती।

घटनाएं रोकने के लिए समाज के बीच जाएंगे एसपी

लखीमपुर : दुराचार की इन घटनाओं को लेकर पुलिस अधीक्षक अमित चंद्रा गंभीर हैं। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इधर दुराचार की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ऐसे मामलों में कार्रवाई भी कर रही है। अभियुक्तों को गिरफ्तारी हो रही है और ऐसी घटनाएं न हो इसके लिए प्रयास होंगे। उन्होंने कहा सबसे अहम बात हैं कि इसके लिए सोशल शरण भी जिम्मेदार है। हमारे समाज को भी इस पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वे डीएम से बात कर समाज के लोगों के बीच जाएंगे तथा सामाजिक लोगों को भी साथ लेकर प्रयास करेंगे कि ऐसी घटनाएं न हों।

Jagran News

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