Sunday, 26 June 2011

महंगाई की मार से बढ़ेगी ब्याज दरें

महंगाई कम करने की कोशिश में केंद्रीय बैंक एक बार फिर नीतिगत दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। बाजार से नकदी कम करने के लिए रिजर्व बैंक मंगलवार को होने वाली सालाना मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर और रिवर्स रेपो दर में 25 से 50 आधार अंकों तक की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो एक ओर आम आदमी पर महंगे कर्ज और ईएमआई का दबाव बढ़ेगा, वहीं देश के विकास दर को भी झटका लग सकता है। जबकि निवेश में भी भारी कमी आएगी। 

प्रमुख दरों में 25 आधार अंकों का इजाफा
क्रिसिल के प्रमुख अर्थशास्त्री डीके जोशी का मानना है कि आरबीआई प्रमुख दरों में 25 आधार अंकों का इजाफा कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह नौंवी दफा होगा, जब आरबीआई प्रमुख दरों में वृद्धि कर महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिश करेगा। महंगाई काबू में करने की सरकार की प्राथमिकता को देखते हुए आरबीआई विकास दर के अनुमान को घटा सकती है। क्रिसिल का अंदाजा है कि मौजूदा वित्त वर्ष में विकास दर 8.3 फीसदी से नीचे रहेगी। जोशी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी व कच्चे तेल की कीमतों का कम से कम असर देश में हो इसलिए भी आरबीआई को मजबूत नीतिगत पहल करनी पड़ेगी। मौजूदा परिस्थितियों में देश के विकास दर को प्रभावित किए बगैर महंगाई काबू में करना चुनौतीपूर्ण है। लेकिन रिजर्व बैंक के पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प फिलहाल मौजूद नहीं है। वहीं इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक टीएम भसीन का कहना है कि अगर रेपो व रिवर्स रेपो दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी होती है तो इसका तत्काल असर बैंक की उधारी व जमा दरों पर भी पड़ेगा। यानी कर्ज की दरें एक बार फिर से ऊंची हो सकती है। 

अमर उजाला ब्यूरो

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