दिल्ली के रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अनशन कर रहे बाबा रामदेव के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई का मामला अमरीका में भी उठ रहा है. अमरीकी विदेश मंत्रालय की दैनिक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान पत्रकारों ने इससे संबंधित कई सवाल पूछे.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर ने कहा कि रामदेव के बारे में उन्होंने मीडिया में ढेर सारी ख़बरें देखी हैं लेकिन उनके मुताबिक़ यह भारत का आंतरिक मामला है.
लेकिन पत्रकारों के इस बारे में बार बार सवाल पूछे जाने पर मार्क टोनर ने कहा कि अमरीका शांतिपूर्ण तरीक़े से विरोध प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करता है लेकिन साथ ही नागरिक सुरक्षा को लागू करने के एक लोकतांत्रिक सरकार के अधिकार का भी अमरीका समर्थन करता है.
भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ वहां हज़ारों की संख्या में लोग जमा हुए थे. वे भारत के नेताओं के ज़रिए अरबों रुपए देश से बाहर ले जाने का विरोध कर रहे थे और उन्हें देश में वापस लाए जाने का मांग कर रहे थे. उन लोगों पर रात में हमला किया गया. अमरीकी विदेश मंत्री को इस बारे में कोई बयान देना चाहिए.
एक पत्रकार का सवाल
एक पत्रकार ने जब ये पूछा कि जब इसी तरह की घटना कहीं और होती है तो तब तो अमरीका उसे आंतरिक मामला नहीं कहता है फिर भारत के मामले में ऐसा रवैया क्यूं और ख़ासकर जब भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है.
इस सवाल के जवाब में मार्क टोनर ने कहा कि जी बिल्कुल क़ानून के शासन और मानवाधिकार का सम्मान होना चाहिए.
'जायज़ सवाल'
एक पत्रकार ने कहा, ''भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ वहां हज़ारों की संख्या में लोग जमा हुए थे. वे भारत के नेताओं के ज़रिए अरबों रुपए देश से बाहर ले जाने का विरोध कर रहे थे और उन्हें देश में वापस लाए जाने का मांग कर रहे थे. उन लोगों पर रात में हमला किया गया. अमरीकी विदेश मंत्री को इस बारे में कोई बयान देना चाहिए.''
यह (रामदेव) मामला बहुत पेचीदा है. भारतीय सुरक्षाकर्मी नागरिक सुरक्षा बहाल करने की कोशिश कर रहे थे.प्रदर्शनकारियों के पास अनशन करने का परमिट हो भी सकता है और नहीं भी मै इस बारे में निश्चित तौर पर नहीं कह सकता.हमलोग दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की हैसियत से भारत का सम्मान करते हैं और मानते है कि यह भारत का अंदूरूनी मामला है और क्या अच्छा है इसका फ़ैसला भारत को करना है.
मार्क टोनर, अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
इसके जवाब में मार्क टोनर ने कहा कि यह बिल्कुल जायज़ सवाल है क्योंकि अमरीका का हमेशा ही कहना रहा है कि वो दुनिया भर में लोगों को अपनी बातों को शांतिपूर्वक व्यक्त करने के अधिकार का समर्थन करता है.
रामदेव के मामले में उनका कहना था, ''यह (रामदेव) मामला बहुत पेचीदा है. भारतीय सुरक्षाकर्मी नागरिक सुरक्षा बहाल करने की कोशिश कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों के पास अनशन करने का परमिट हो भी सकता है और नहीं भी मै इस बारे में निश्चित तौर पर नहीं कह सकता. हमलोग दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की हैसियत से भारत का सम्मान करते हैं और मानते है कि यह भारत का अंदरूनी मामला है और क्या अच्छा है इसका फ़ैसला भारत को करना है.''
एक पत्रकार ने सवाल किया कि भारत के चार-चार मंत्री रामदेव से बातचीत कर रहे थे इसलिए परमिट होने या ना होने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता है. इसके जवाब में टोनर ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते भारत की ज़िम्मेदारी है कि वो शांतिपूर्ण तरीक़े से प्रदर्शन कर रहें लोगों को अपनी बात कहने का मौक़ा दे लेकिन उतनी ही बड़ी ज़िम्मेदारी प्रदर्शनकारियों पर भी है कि वो सुरक्षा ज़रूरतों का पूरा ख़्याल रखें
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