हो सकता है जन लोकपाल बिल को आप लोकतंत्र के लिए खतरनाक भी मानते हों। बहुत संभव है कि आप इस बात को लेकर आशंकित हों कि रिटायर्ड नौकरशाहों की अगुवाई में चलायी जा रही यह मुहिम कहीं आखिर में जाकर लोकतंत्र की जड़ को कमजोर तो नहीं करेगी।
मगर इन सबके बावजूद राजघाट पर अन्ना हजारे के अनशन को आप अपना समर्थन दें। समर्थन इसलिए दें कि यह अनशन बीजेपी के पक्ष में नहीं है। यह किसी मोदी, किसी रमण सिंह और किसी आडवाणी की वकालत करने के लिए नहीं है। और, रामदेव बाबा तथा उनके समर्थकों से क्षमा याचना सहित, यह रामदेव बाबा की योग की दुकान चमकाने के लिए भी नहीं है। (अगर बाबा की कोई दुकान है तो उसे चमकाने के लिए वह खुद काफी हैं।) यह अनशन अन्ना हजारे के लिए भी नहीं है। न ही जनलोकपाल बिल के पक्ष और विरोध के लिए है।
यह अनशन है आपके और हमारे लिए। इस देश की सवा सौ करोड़ जनता के लिए है यह अनशन। अन्ना हजारे का राजघाट पर किया जा रहा अनशन यह सवाल पूछने के लिए है कि इस देश में यह हो क्या रहा है?
आखिर एकाध कपिल सिब्बलों और पी चिदंबरमों ने खुद को समझ क्या रखा है? वह जब जिस बात को सही कह देंगे वह सही हो जाएगी और जिस बात को गलत करार देंगे वह गलत हो जाएगी? उन्होंने जब तक चाहा अन्ना हजारे आदरणीय रहे, जब उन्होंने तय किया वे दूध की मक्खी हो गए कि निकाला और फेंक दिया। एक बार जी में आया तो कह दिया कि हम मजबूत लोकपाल बिल लाएंगे। दूसरी बार मन में आया तो कह दिया हम न तो प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाएंगे, न उच्च न्यायपालिका को लाएंगे और न ही सांसदों को इसके दायरे में आने देंगे? और यह भी नहीं बताएंगे कि फिर हम लोकपाल बिल ला ही क्यों रहे हैं? बाबा रामदेव को जब तक वे चाहेंगे सिर पर चढ़ाए रखेंगे और जब मूड होगा जमीन पर पटक देंगे?
और बाबा रामदेव की कोई बात खटक जाएगी तो रामलीला मैदान में सो रही निहत्थी भीड़ को, बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं को लाठियों से पीटना शुरू कर देंगे? क्यों? बस इसलिए कि उन्हें लगता है इसमें बीजेपी की कोई साजिश हो सकती है? कि काला धन और करप्शन का सवाल एक या दो दिन तो ठीक है पर इससे ज्यादा चल जाए तो उनके गले की हड्डी बन जाने का डर रहता है? अपने इस डर के चलते वे इस देश के नागरिकों की जिंदगी ठेंगे पर रखेंगे? उन्हें नींद से जगाकर दौड़ा-दौड़ाकर मारेंगे? उनकी इज्जत का कचूमर निकाल देंगे?
यह अनशन है उन लोगों को यह बताने के लिए कि देश में लोकतंत्र है। कि देश की संप्रभुता सरकार में नहीं, जनता में निहित है। कि जनता अगर चुप है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह गूंगी है। कि जनता को मूर्ख समझने की हिमाकत कोई भी अपनी बर्बादी की कीमत पर ही कर सकता है।
इसलिए और इसीलिए आप इस अनशन को समर्थन दें। हो सके तो अपने शहर के किसी खास स्थान पर जाकर सांकेतिक धरना, प्रदर्शन आदि के जरिए इस समर्थन को व्यक्त करें। नहीं हो सके, तो अपने आसपास के लोगों के सामने ही अपने इस समर्थन का इजहार कर दें। यह भी न हो सके तो कम से कम इतना जरूर करें कि भीतर से सारे अगर-मगर निकाल कर अपने मन में दोहराएं कि टूटा-फूटा, आधा-अधूरा, कच्चा पक्का जैसा भी है हमारे समय का जनांदोलन यही है। इसलिए मैं इसका समर्थन करता/करती हूं। इसे मजबूत करने, आगे बढ़ाने और मंजिल तक पहुंचाने की लड़ाई में मैं भी शामिल हूं।
Sahi kaha aapne "andher nagri chaupat raaja;take ser bhaji take ser khaja"
ReplyDelete100 % sure
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