Thursday, 16 June 2011

क्या सोते हुए लोगों पर लाठियां बरसाना तानाशाही नहीं है: हजारे

 लोकपाल बिल को लेकर सिविल सोसायटी और सरकार की जुबानी जंग दिनोंदिन तल्ख होती जा रही है। कांग्रेस की ओर से सिविल सोसायटी के सदस्यों के रवैये को तानाशाही करार दिए जाने पर मंगलवार को अन्ना हजारे ने पलटवार किया। 

सरकार को आड़े हाथ लेते हुए अन्ना हजारे ने सवाल किया कि रात में सोते हुए लोगों पर लाठियां बरसाने वाली सरकार तानाशाह नहीं तो क्या है उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार ने जनता को हल्के में लिया तो नतीजे भुगतेगी। हालांकि उन्होंने कहा कि वह लोकपाल समिति की कल होने वाली बैठक में शामिल होंगे। 

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि अन्ना लोकपाल बिल को लेकर तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहे हैं। इसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने भी कहा था कि लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा ऐसे तानाशाहों से है जो चुनकर नहीं आ सकते और न ही चुने जा सकते हैं। 

अन्ना ने इसके जवाब में सरकार के रवैये पर सवाल उठाए और कहा कि रामलीला मैदान में सोते हुए लोगों पर लाठियां बरसाने वाली सरकार क्या तानाशाह नहीं है! उन्होंने कहा कि सरकार चुनी हुई तानाशाह है। अन्ना ने दिग्विजय सिंह के उस बयान का स्वागत किया जिसमें कांग्रेस महासचिव ने पीएम को भी लोकपाल के भीतर लाने की बात कही थी। 

बैठक में शामिल होंगे 
सरकार के आरोपों का उसी की शैली में जवाब देने वाले अन्ना हजारे ने हालांकि बातचीत और विचार-विमर्श से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि बातचीत से ही मसले हल होते हैं। इसलिलए लोकतंत्र में बातचीत की संभावना बंद नहीं होने देनी चाहिए। अन्ना ने कहा कि लोकपाल समिति की कल होने वाली बैठक में वह शामिल होंगे। दिल्ली पहुंचने के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे ऊपर है। अगर सरकार जनता को हल्के में लेगी तो नतीजों के लिए वही जिम्मेदार होगी।

NBT News

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